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Auraiya News: लार ग्रंथि ट्यूमर में एफएनएसी की उपयोगिता बताई
Tue, 24 Feb 2026 11:54 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 24 Feb 2026 11:54 PM IST
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फोटो-26- स्टाफ के साथ संवाद करते प्रोफेसर। स्रोत:कर्मी
औरैया। समाधान पुर्वा स्थित मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में कॉटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) का आयोजन किया गया। इसका विषय लार ग्रंथि ट्यूमर में एफएनएसी व मिलान सिस्टम की भूमिका था।
कार्यक्रम में लार ग्रंथि ट्यूमर में एफएनएसी व मिलान सिस्टम की भूमिका की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम की वक्ता डॉ. शिल्पी राज सिंह ने बताया कि लार ग्रंथि के ट्यूमर सिर व गर्दन के कैंसरों का एक महत्वपूर्ण भाग होते हैं। इनके सटीक व समयपूर्व निदान के लिए फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी (एफएनएसी) एक सुरक्षित, सरल, कम खर्चीली व प्रभावी जांच पद्धति है। यह विधि सौम्य व घातक ट्यूमर के बीच अंतर स्पष्ट करने में सहायक होती है।
उन्होंने कार्यक्रम में लार ग्रंथि ट्यूमर में एफएनएसी व मिलान सिस्टम की भूमिका की उपयोगिता भी बताई। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली एफएनएसी रिपोर्ट को मानकीकृत श्रेणियों में बांटते हुए प्रत्येक श्रेणी के लिए कैंसर की संभाव्यता निर्धारित करती है। इससे डॉक्टरों को उचित उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है। सीएमई संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है। इससे विभाग में शोध भी हो सकेंगे।
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इस मौके पर अकादमिक डीन डॉ. मेधा दास, कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ संजीव दवे, बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. पवन कुमार शर्मा, डेंटिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. जूही यादव, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पंखुड़ी गुप्ता, डॉ. अनुभव, डॉ. पंकज, डॉ. राकेश, डॉ. प्रियंका साहू समेत सभी संकाय सदस्य मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में लार ग्रंथि ट्यूमर में एफएनएसी व मिलान सिस्टम की भूमिका की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम की वक्ता डॉ. शिल्पी राज सिंह ने बताया कि लार ग्रंथि के ट्यूमर सिर व गर्दन के कैंसरों का एक महत्वपूर्ण भाग होते हैं। इनके सटीक व समयपूर्व निदान के लिए फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी (एफएनएसी) एक सुरक्षित, सरल, कम खर्चीली व प्रभावी जांच पद्धति है। यह विधि सौम्य व घातक ट्यूमर के बीच अंतर स्पष्ट करने में सहायक होती है।
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उन्होंने कार्यक्रम में लार ग्रंथि ट्यूमर में एफएनएसी व मिलान सिस्टम की भूमिका की उपयोगिता भी बताई। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली एफएनएसी रिपोर्ट को मानकीकृत श्रेणियों में बांटते हुए प्रत्येक श्रेणी के लिए कैंसर की संभाव्यता निर्धारित करती है। इससे डॉक्टरों को उचित उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है। सीएमई संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है। इससे विभाग में शोध भी हो सकेंगे।
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इस मौके पर अकादमिक डीन डॉ. मेधा दास, कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ संजीव दवे, बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. पवन कुमार शर्मा, डेंटिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. जूही यादव, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पंखुड़ी गुप्ता, डॉ. अनुभव, डॉ. पंकज, डॉ. राकेश, डॉ. प्रियंका साहू समेत सभी संकाय सदस्य मौजूद रहे।