{"_id":"6a70f7812d3a1f2368024826","slug":"the-team-did-not-reach-the-villages-yet-vaccination-was-completed-on-paper-auraiya-news-c-211-1-akb1003-149197-2026-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: गांवों में नहीं पहुंची टीम, कागजों में पूरा हो गया टीकाकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: गांवों में नहीं पहुंची टीम, कागजों में पूरा हो गया टीकाकरण
Tue, 04 Aug 2026 01:48 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:48 AM IST
विज्ञापन
सदर ब्लाॅक के सामने पशु अस्पताल में बकरी का इलाज करता कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Archive
औरैया। मवेशियों को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए शासन की ओर से टीकाकरण अभियान चलाया गया था, लेकिन यह सिर्फ कागजों में ही सीमित रह गया। कई गांवों में टीम पहुंची ही नहीं, इस वजह से मवेशियों का टीकाकरण नहीं हो पाया है।
पशुपालन विभाग की ओर से हर साल एचएस यानी हेमरेजिक सेप्टिसीमिया का टीका दुधारू जानवरों को लगाया जाता है, ताकि गला घोंटू जैसी गंभीर बीमारियों से उन्हें को बचाया जा सके। इसको लेकर जिले में पशुपालन विभाग की ओर से 20 जुलाई तक अभियान चलाया गया।
विभाग का दावा है कि 2.60 लाख जानवरों को टीका लगाया गया है। यह शत प्रतिशत टीकाकरण है। हकीकत इससे इतर है। बिधूना, अजीतमल, सदर सहित अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जानवरों तक पशुपालन विभाग की टीम पहुंच ही नहीं पाई है।
विज्ञापन
--
मिली थी 2.82 लाख वैक्सीन
पशुपालन विभाग को शासन की ओर से इस बार 2.82 लाख वैक्सीन भेजी गई थी। इसमें से 2.60 लाख वैक्सीन ही लग पाई हैं। अब बची हुई वैक्सीन को छह माह बाद बूस्टर डोज के माध्यम से इस्तेमाल में लाया जाएगा।
गोशालाओं को दी जाती प्राथमिकता
गला घोंटू बीमारी से बचाने के लिए पशुपालन विभाग गोशालाओं को प्राथमिकता में रखता है। ज्यादातर गोशालाओं में जाकर पशुपालन विभाग के कर्मचारियों ने वैक्सीन लगाई हैं।
इस तरह से तैयार होता कागजी आंकड़ा
पशुपालन विभाग की टीम जब गांव पहुंचती है तो उससे पहले प्रधान व अन्य जनप्रतिनिधि को फोन कर देती है। गांव में कुछ जानवरों को वैक्सीन लगाने के बाद जनप्रतिनिधि से शत प्रतिशत पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। इस तरह से विभाग पूरा आंकड़ा तैयार करता है।
--
फोटो-23 लल्लू
केस एक
कानपुर-इटावा हाईवे किनारे स्थित भाऊपुर गांव निवासी लल्लू के पास छह भैंस हैं। उन्होंने बताया कि टीका लगाने के लिए डॉक्टर आते हैं, लेकिन इस बार अभी नहीं आए हैं। उनके आने का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से भैंसों को टीका नहीं लगा है।
--
फोटो-22 राहुल
केस दो
रुरुकला निवासी राहुल यादव के पास चार जानवर हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक पशुपालक विभाग का कोई कर्मचारी नहीं आया। गला घोंटू बीमारी से बचाव के लिए यह टीका लगता है, लेकिन अभी गांव में टीम नहीं आई।
--
फोटो-21 सुभाष चंद्र
केस तीन
रुरुकला निवासी सुभाष चंद्र के पास तीन जानवर हैं। उन्हें टीका लगाने के लिए अभी तक कोई कर्मचारी नहीं आया है। उन्होंने बताया कि पशुपालक विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान की भी जानकारी नहीं है।
--
फोटो-20 रामकुमार
केस चार
कंचौसी के रहने वाले पशुपालक रामकुमार के पास दो जानवर हैं। बताया कि पिछले तीन माह से गांव में पशुपालन विभाग की टीम नहीं आई है। अगर वैक्सीन लग जाए तो निजी अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
--
22 जुलाई तक अभियान चलाकर जानवरों को एचएस का टीका लगाया गया है। अभी एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण चल रहा है। यह आठ सितंबर तक चलेगा। जिनके पशु एचएस में रह गए हैं। उनको भी लगाया जाएगा।
-डॉ. विशन सिंह विकल, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
पशुपालन विभाग की ओर से हर साल एचएस यानी हेमरेजिक सेप्टिसीमिया का टीका दुधारू जानवरों को लगाया जाता है, ताकि गला घोंटू जैसी गंभीर बीमारियों से उन्हें को बचाया जा सके। इसको लेकर जिले में पशुपालन विभाग की ओर से 20 जुलाई तक अभियान चलाया गया।
विज्ञापन
विभाग का दावा है कि 2.60 लाख जानवरों को टीका लगाया गया है। यह शत प्रतिशत टीकाकरण है। हकीकत इससे इतर है। बिधूना, अजीतमल, सदर सहित अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जानवरों तक पशुपालन विभाग की टीम पहुंच ही नहीं पाई है।
विज्ञापन
मिली थी 2.82 लाख वैक्सीन
पशुपालन विभाग को शासन की ओर से इस बार 2.82 लाख वैक्सीन भेजी गई थी। इसमें से 2.60 लाख वैक्सीन ही लग पाई हैं। अब बची हुई वैक्सीन को छह माह बाद बूस्टर डोज के माध्यम से इस्तेमाल में लाया जाएगा।
गोशालाओं को दी जाती प्राथमिकता
गला घोंटू बीमारी से बचाने के लिए पशुपालन विभाग गोशालाओं को प्राथमिकता में रखता है। ज्यादातर गोशालाओं में जाकर पशुपालन विभाग के कर्मचारियों ने वैक्सीन लगाई हैं।
इस तरह से तैयार होता कागजी आंकड़ा
पशुपालन विभाग की टीम जब गांव पहुंचती है तो उससे पहले प्रधान व अन्य जनप्रतिनिधि को फोन कर देती है। गांव में कुछ जानवरों को वैक्सीन लगाने के बाद जनप्रतिनिधि से शत प्रतिशत पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। इस तरह से विभाग पूरा आंकड़ा तैयार करता है।
फोटो-23 लल्लू
केस एक
कानपुर-इटावा हाईवे किनारे स्थित भाऊपुर गांव निवासी लल्लू के पास छह भैंस हैं। उन्होंने बताया कि टीका लगाने के लिए डॉक्टर आते हैं, लेकिन इस बार अभी नहीं आए हैं। उनके आने का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से भैंसों को टीका नहीं लगा है।
फोटो-22 राहुल
केस दो
रुरुकला निवासी राहुल यादव के पास चार जानवर हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक पशुपालक विभाग का कोई कर्मचारी नहीं आया। गला घोंटू बीमारी से बचाव के लिए यह टीका लगता है, लेकिन अभी गांव में टीम नहीं आई।
फोटो-21 सुभाष चंद्र
केस तीन
रुरुकला निवासी सुभाष चंद्र के पास तीन जानवर हैं। उन्हें टीका लगाने के लिए अभी तक कोई कर्मचारी नहीं आया है। उन्होंने बताया कि पशुपालक विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान की भी जानकारी नहीं है।
फोटो-20 रामकुमार
केस चार
कंचौसी के रहने वाले पशुपालक रामकुमार के पास दो जानवर हैं। बताया कि पिछले तीन माह से गांव में पशुपालन विभाग की टीम नहीं आई है। अगर वैक्सीन लग जाए तो निजी अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
22 जुलाई तक अभियान चलाकर जानवरों को एचएस का टीका लगाया गया है। अभी एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण चल रहा है। यह आठ सितंबर तक चलेगा। जिनके पशु एचएस में रह गए हैं। उनको भी लगाया जाएगा।
-डॉ. विशन सिंह विकल, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी

सदर ब्लाॅक के सामने पशु अस्पताल में बकरी का इलाज करता कर्मचारी। संवाद- फोटो : Archive

सदर ब्लाॅक के सामने पशु अस्पताल में बकरी का इलाज करता कर्मचारी। संवाद- फोटो : Archive

सदर ब्लाॅक के सामने पशु अस्पताल में बकरी का इलाज करता कर्मचारी। संवाद- फोटो : Archive

सदर ब्लाॅक के सामने पशु अस्पताल में बकरी का इलाज करता कर्मचारी। संवाद- फोटो : Archive