{"_id":"695962c69a581323bd0dc514","slug":"the-freezing-cold-poses-a-threat-to-pregnant-women-and-their-babies-auraiya-news-c-211-1-aur1020-137169-2026-01-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: गलन भरी ठंड गर्भवती व शिशु के लिए खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: गलन भरी ठंड गर्भवती व शिशु के लिए खतरा
Sun, 04 Jan 2026 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:11 AM IST
विज्ञापन
फोटो-17-मेडिकल कॉलेज में मरीज देखतीं चिकित्सक। संवाद
औरैया। लगातार बढ़ रही गलन और सर्द हवाओं ने गर्भवतियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ठंड की चपेट में आकर कई गर्भवती निमोनिया और गंभीर श्वसन संक्रमण की शिकार हो रही हैं।
इसका सीधा असर न सिर्फ मां की सेहत पर पड़ रहा है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी खतरा है। मेडिकल कॉलेज में रोज ऐसे 10-15 केस आ रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य से कमजोर हो जाती है। ऐसे में ठंडी हवा और तापमान में उतार-चढ़ाव संक्रमण को तेजी से बढ़ावा देता है।
विज्ञापन
सर्दी-खांसी को नजरअंदाज करना कई बार निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है, इससे सांस लेने में तकलीफ, बुखार और शरीर में ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 से 15 ऐसे मरीज आ रहे हैं। उन्हें उपचार के साथ ही विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
निमोनिया की स्थिति में मां के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है, जिसका असर भ्रूण तक पहुंचता है। इससे शिशु का वजन कम होना, समय से पहले प्रसव और अन्य जटिलताओं की आशंका बढ़ जाती है।
मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल जादौन का कहना है कि गर्भवती गर्म कपड़े पहनें। ठंडी हवा से बचें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करें। सर्दी-खांसी या बुखार के लक्षण दिखते ही स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। पौष्टिक आहार, गुनगुने तरल पदार्थ और पर्याप्त आराम भी बेहद जरूरी है। डॉक्टर रश्मि यादव ने बताया कि गर्भवती सर्दी के लक्षण होने पर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर न खाएं, डॉक्टर को दिखाकर ही दवा लें।
यह भी करें
- ठंड में बाहर निकलते समय शरीर को अच्छी तरह ढकें।
- सुबह-शाम की ठंडी हवा से बचाव करें।
- किसी भी तरह की सांस की परेशानी को हल्के में न लें।
- नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
विज्ञापन
इसका सीधा असर न सिर्फ मां की सेहत पर पड़ रहा है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी खतरा है। मेडिकल कॉलेज में रोज ऐसे 10-15 केस आ रहे हैं।
विज्ञापन
चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य से कमजोर हो जाती है। ऐसे में ठंडी हवा और तापमान में उतार-चढ़ाव संक्रमण को तेजी से बढ़ावा देता है।
विज्ञापन
सर्दी-खांसी को नजरअंदाज करना कई बार निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है, इससे सांस लेने में तकलीफ, बुखार और शरीर में ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 से 15 ऐसे मरीज आ रहे हैं। उन्हें उपचार के साथ ही विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
निमोनिया की स्थिति में मां के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है, जिसका असर भ्रूण तक पहुंचता है। इससे शिशु का वजन कम होना, समय से पहले प्रसव और अन्य जटिलताओं की आशंका बढ़ जाती है।
मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल जादौन का कहना है कि गर्भवती गर्म कपड़े पहनें। ठंडी हवा से बचें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करें। सर्दी-खांसी या बुखार के लक्षण दिखते ही स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। पौष्टिक आहार, गुनगुने तरल पदार्थ और पर्याप्त आराम भी बेहद जरूरी है। डॉक्टर रश्मि यादव ने बताया कि गर्भवती सर्दी के लक्षण होने पर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर न खाएं, डॉक्टर को दिखाकर ही दवा लें।
यह भी करें
- ठंड में बाहर निकलते समय शरीर को अच्छी तरह ढकें।
- सुबह-शाम की ठंडी हवा से बचाव करें।
- किसी भी तरह की सांस की परेशानी को हल्के में न लें।
- नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।