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Auraiya News: दो वर्ष पहले पंजीकृत की गई थी कंपनी, एक वर्ष पहले खुली बैंक शाखाएं

Fri, 23 Dec 2022 11:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 23 Dec 2022 11:21 PM IST
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The company was registered two years ago, bank branches opened a year ago
दिबियापुर । प्रदेश के कई जिलों में फर्जी बैंक की शाखाएं खोलकर हजारों ग्रामीणों को अपना शिकार बनाने वाले बैंक के चेयरमैन और एएसएम ने एक साल पहले शाखाएं खोलकर फर्जीवाड़ा शुरू किया था। हालांकि, कंपनी का पंजीकरण दो साल पहले ही करा लिया था।
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दरअसल गुरुवार को फर्जी बैंक डिजिटल आर्यावर्त निधि बैंक के चेयरमैन मैनपुरी निवासी असलम और एक कर्मचारी(एएसएम) सहायल, कुढ़री पुरवा निवासी अद्वैत उर्फ लल्ली यादव को पुलिस ने बैंक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार उन्होंने लगभग एक वर्ष पहले मैनपुरी से शाखा खोलनी शुरू की थी।
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जब इंटरनेट पर बैंक की जानकारी खंगाली गई तो वहां पर बकायदा डिजिटल आर्यावर्त निधि लिमिटेड की वेबसाइट नजर आई। इंटरनेट पर मिली डिटेल के अनुसार उनकी यह कंपनी 30 अक्तूबर 2020 को पंजीकृत कराई गई। आरोपियों ने मैनपुरी, औरैया, कानपुर देहात और जालौन जिले में बैंक की शाखाएं खोलकर लगभग पांच हजार उपभोक्ताओं और भर्ती किए गए कर्मियों से मिलाकर करोड़ों रुपये की ठगी की थी।
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इंटरनेट बैंकिंग चाहने वालों को भरोसा दिलाने के लिए उन्हें कंपनी का एप डाउनलोड कराया जाता था। इसके बाद भी कोई उपभोक्ता बिना बैंक के चेयरमैन की मर्जी के एप के माध्यम से रुपये किसी दूसरी बैंक में स्थानांतरित (एनआईएफटी और आरटीजीएस) नहीं कर पाते थे।
मास्टर माइंड असलम मैनपुरी से अपनी देखरेख में संचालन करता था। उसकी अनुमति के बाद ही किसी भी उपभोक्ता का लेनदेन होता था।
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डिजिटल आर्यावर्त निधि बैंक के कर्मियों को खासकर ग्रामीणों को टारगेट करने के निर्देश थे। केवल 100 रुपये में बचत खाता खोलने के लिए शिविर लगाने का कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता था। कथित बैंक में जुड़े रहे एक कर्मचारी के अनुसार 100 रुपये में बचत खाता खोलने का उद्देश्य अधिक धनराशि जमा करने का था।

कथित बैंक अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए कम समय में अधिक मुनाफे का झांसा देता था। छह साल में रकम दोगुनी और 18 सालों में रकम दस गुनी जैसे लुभावने ऑफर देकर ठग ग्रामीणों को चूना लगाते थे। पुलिस के अनुसार कर्मचारियों को साफ निर्देश थे कि लोगों को लंबी अवधि के लिए रुपये निवेश कराए जाएं, जिससे बड़ी संख्या में रुपये जमा हो सकें।
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