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Auraiya News: सदर तहसील से उतार फेंका था ब्रिटिश यूनियन जैक, फहराया था तिरंगा
Tue, 12 Aug 2025 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 12 Aug 2025 12:14 AM IST
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फोटो-11एयूआरपी 15- स्वतंत्रता सेनानी विजय शंकर गुप्ता की फोटो देखतीं पत्नी सन्नो गुप्ता। संवाद
औरैया। अगस्त माह की 12 तारीख औरैया के लोगों के लिए गौरव का दिन है। इस दिन सदर तहसील पर लगे ब्रिटिश यूनियन जैक को उतारकर तिरंगा फहराया गया था।
इस दौरान फिरंगियों की गोली से छह क्रांतिकारी शहीद हुए थे। 50 से ज्यादा लोग घायल भी हो गए थे। इस आंदोलन की कमान छक्कीलाल दुबे, बल्दू पहलवान और हाफिज करीम ने संभाली थी।
दिबियापुर मार्ग पर ककराही पुलिया निवासी सौरभ बताते हैं कि उनके परबाबा बल्दू पहलवान ने स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान में 12 अगस्त 1942 को छह छात्रों व नौजवानों ने तहसील पर लगे ब्रिटिश यूनियन जैक को उतार दिया था। इस पर अंग्रेजी अफसरों ने क्रांतिकारियों की भीड़ पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। इसमें छह लोग शहीद हो गए थे।
इस घटना में गोली लगने से 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। औरैया में इस घटना के बाद आजादी का बिगुल बज गया था। घायलों में शामिल स्वतंत्रता सेनानी विजय शंकर गुप्ता की पत्नी सन्नो गुप्ता बताती हैं कि वह दिन बहुत ही भयावह था।
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अंग्रेजों भारत छोड़ो के आह्वान पर 12 अगस्त 1942 की दोपहर क्रांतिकारियों का एक जुलूस अंग्रेजों के खिलाफ नारेबाजी करता हुआ सदर तहसील पहुंचा था। इस बीच कुछ अंग्रेज अफसर तहसील भवन के अंदर चले गए और मुख्य गेट बंद कर लिया था। इसके बाद तहसील में ऊपर बनी खिड़की से सिपाहियों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी थी।
इसमें छह लोग बाबू रामजी, भूरेलाल, दर्शन लाल, सुल्तान खां, मंगली प्रसाद और कल्याण चंद्र शहीद हुए थे, लेकिन उन्होंने सदर तहसील में लगा ब्रिटिश यूनियन जैक उतार फेंका था और वहां तिरंगा फहरा दिया था। वहीं, देवकली मंदिर व तहसील में स्थित शहीद स्मारक में आज भी इसकी यादें ताजा हैं।
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इस दौरान फिरंगियों की गोली से छह क्रांतिकारी शहीद हुए थे। 50 से ज्यादा लोग घायल भी हो गए थे। इस आंदोलन की कमान छक्कीलाल दुबे, बल्दू पहलवान और हाफिज करीम ने संभाली थी।
दिबियापुर मार्ग पर ककराही पुलिया निवासी सौरभ बताते हैं कि उनके परबाबा बल्दू पहलवान ने स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान में 12 अगस्त 1942 को छह छात्रों व नौजवानों ने तहसील पर लगे ब्रिटिश यूनियन जैक को उतार दिया था। इस पर अंग्रेजी अफसरों ने क्रांतिकारियों की भीड़ पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। इसमें छह लोग शहीद हो गए थे।
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इस घटना में गोली लगने से 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। औरैया में इस घटना के बाद आजादी का बिगुल बज गया था। घायलों में शामिल स्वतंत्रता सेनानी विजय शंकर गुप्ता की पत्नी सन्नो गुप्ता बताती हैं कि वह दिन बहुत ही भयावह था।
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अंग्रेजों भारत छोड़ो के आह्वान पर 12 अगस्त 1942 की दोपहर क्रांतिकारियों का एक जुलूस अंग्रेजों के खिलाफ नारेबाजी करता हुआ सदर तहसील पहुंचा था। इस बीच कुछ अंग्रेज अफसर तहसील भवन के अंदर चले गए और मुख्य गेट बंद कर लिया था। इसके बाद तहसील में ऊपर बनी खिड़की से सिपाहियों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी थी।
इसमें छह लोग बाबू रामजी, भूरेलाल, दर्शन लाल, सुल्तान खां, मंगली प्रसाद और कल्याण चंद्र शहीद हुए थे, लेकिन उन्होंने सदर तहसील में लगा ब्रिटिश यूनियन जैक उतार फेंका था और वहां तिरंगा फहरा दिया था। वहीं, देवकली मंदिर व तहसील में स्थित शहीद स्मारक में आज भी इसकी यादें ताजा हैं।