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औरैयाः सोलर संयंत्र से पर्यावरण को नहीं होगा नुकसान
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एनटीपीसी स्थित जलाशय के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में लगाए गए सोलर पैनल। संवाद
- फोटो : AURAIYA
दिबियापुर (औरैया)। एनटीपीसी में प्रदेश का पहला जलाशय पर तैरता सोलर संयंत्र पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना काम करेगा। कोयला बिजली प्लांट से प्रतिवर्ष होने वाला 46 हजार टन कार्बन उत्सर्जन भी नहीं होगा।
एनटीपीसी अधिकारियों के अनुसार दिबियापुर एनटीपीसी में लगे फ्लोटिंग सोलर संयंत्र की क्षमता के समान कोयला आधारित बिजली उत्पादन संयंत्र से प्रतिवर्ष 46 हजार टन कार्बन उत्सर्जन होता है। सोलर संयंत्र से कार्बन उत्सर्जन न होने से पर्यावरण साफ रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जमीन पर लगाए जाने वाले सोलर संयंत्र और अन्य प्रकार के बिजली उत्पादन संयंत्र लगाने के लिए पेड़ पौधे काटने पड़ते हैं, लेकिन फ्लोटिंग सोलर संयंत्र के लिए कोई पेड़ भी नहीं काटना पड़ा।
इससे भी पर्यावरण को फायदा ही होगा। 90 एकड़ में फैले एनटीपीसी के जलाशय में से लगभग 60 फीसदी जलाशय को सोलर प्लेटों से ढक दिया गया है। इस लिए जलाशय के पानी का वाष्पीकरण भी कम होगा। इससे जलाशय के पानी का अधिक समय तक उपयोग किया जा सकेगा। इस प्रकार से बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए तैयार हुआ सोलर प्लांट अब अगले कई वर्षों तक पर्यावरण के अनुकूल काम करता रहेगा।
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एनटीपीसी एजीएम संजय बाल्यान के अनुसार फ्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए कोई पेड़ पौधा नहीं काटना पड़ा। यहां बता दें कि 15 सितंबर की रात 12 बजे से फ्लोटिंग सोलर संयंत्र से व्यावसायिक बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है और ग्रिड को आपूर्ति भी शुरू की जा चुकी है। 18 सितंबर को क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक उत्तरी क्षेत्र देवाशीष सेन द्वारा इस प्लांट का औपचारिक उद्घाटन किया जा चुका है।
रोजाना 0.12 मिलियन यूनिट बिजली का होगा उत्पादन
एनटीपीसी में तैयार फ्लोटिंग सोलर प्लांट से दिन के समय ही सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिजली उत्पादित होगी। 20 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 0.12 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। एजीएम संजय बाल्यान के अनुसार सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली अन्य संयंत्रों की अपेक्षा काफी सस्ती तीन रुपए दो पैसे प्रति यूनिट पड़ती है।
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एनटीपीसी अधिकारियों के अनुसार दिबियापुर एनटीपीसी में लगे फ्लोटिंग सोलर संयंत्र की क्षमता के समान कोयला आधारित बिजली उत्पादन संयंत्र से प्रतिवर्ष 46 हजार टन कार्बन उत्सर्जन होता है। सोलर संयंत्र से कार्बन उत्सर्जन न होने से पर्यावरण साफ रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जमीन पर लगाए जाने वाले सोलर संयंत्र और अन्य प्रकार के बिजली उत्पादन संयंत्र लगाने के लिए पेड़ पौधे काटने पड़ते हैं, लेकिन फ्लोटिंग सोलर संयंत्र के लिए कोई पेड़ भी नहीं काटना पड़ा।
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इससे भी पर्यावरण को फायदा ही होगा। 90 एकड़ में फैले एनटीपीसी के जलाशय में से लगभग 60 फीसदी जलाशय को सोलर प्लेटों से ढक दिया गया है। इस लिए जलाशय के पानी का वाष्पीकरण भी कम होगा। इससे जलाशय के पानी का अधिक समय तक उपयोग किया जा सकेगा। इस प्रकार से बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए तैयार हुआ सोलर प्लांट अब अगले कई वर्षों तक पर्यावरण के अनुकूल काम करता रहेगा।
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एनटीपीसी एजीएम संजय बाल्यान के अनुसार फ्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए कोई पेड़ पौधा नहीं काटना पड़ा। यहां बता दें कि 15 सितंबर की रात 12 बजे से फ्लोटिंग सोलर संयंत्र से व्यावसायिक बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है और ग्रिड को आपूर्ति भी शुरू की जा चुकी है। 18 सितंबर को क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक उत्तरी क्षेत्र देवाशीष सेन द्वारा इस प्लांट का औपचारिक उद्घाटन किया जा चुका है।
रोजाना 0.12 मिलियन यूनिट बिजली का होगा उत्पादन
एनटीपीसी में तैयार फ्लोटिंग सोलर प्लांट से दिन के समय ही सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिजली उत्पादित होगी। 20 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 0.12 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। एजीएम संजय बाल्यान के अनुसार सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली अन्य संयंत्रों की अपेक्षा काफी सस्ती तीन रुपए दो पैसे प्रति यूनिट पड़ती है।