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Banda News: छह फार्मासिस्ट, 11 पशु चिकित्साधिकारी, आठ दिन में 56,700 मवेशियों को लगा दिया टीका
Fri, 31 Jul 2026 11:19 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:19 PM IST
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खैराडा में मवेशी को टीका लगाते कर्मचारी। संवाद
बांदा/अतर्रा/नरैनी/तिंदवारी। जनपद में पशु चिकित्सा विभाग में स्टाफ की भारी कमी है। विभाग में महज छह फार्मासिस्ट, 11 पशु चिकित्साधिकारी, चार उप चिकित्साधिकारी और सात पशुधन प्रसार अधिकारी ही हैं।
ऐसे में 22 जुलाई से 29 जुलाई के बीच महज आठ दिन में जनपद में विभाग 56,700 मवेशियों का टीकाकरण करने का दावा कर रहा है। आठ सितंबर तक चलने वाले एफएमडी अभियान में विभाग की यह आंकड़ेबाजी पशु पालकों के गले नहीं उतर रही है।
जनपद में वर्तमान में करीब 19 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। मानक के अनुसार फार्मासिस्ट की संख्या 19 और पशुधन प्रसार अधिकारी की संख्या 22 होनी चाहिए लेकिन स्टाफ इससे काफी कम है। उधर, जनपद में गाय और भैंसों की संख्या 4,49,734 है। पशु चिकित्सा विभाग को शासन से मवेशियों की संख्या के सापेक्ष 4,27,250 टीके मिले हैं।
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यह आंकड़ा तब है जब विभाग के पास न तो स्टाफ है और न ही पैरावेट्स। जनपद में पैरावेट्स की संख्या 137 के करीब है। इसमें विभाग केवल 45 को ही सक्रिय मानता है। पिछले कई दिनों से पैरावेट्स अपने मानदेय को लेकर हड़ताल पर हैं और विभाग का सहयोग नहीं कर रहे हैं।
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टीकाकरण पर एक नजर
गौर करने वाली बात यह है कि आठ ब्लॉकों के इस जनपद में बड़ोखर बुजुर्ग ब्लॉक में करीब 12,000 और नरैनी विकास खंड में 12,530 मवेशियों का टीकाकरण हो चुका है। तिंदवारी ब्लॉक में टीकाकरण के लिए 62,888 पशुओं में शुक्रवार तक 10,650 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। यानी तीन ब्लॉकों में अब तक करीब 35 हजार मवेशियों को टीका लग चुका है। ऐसे में आठ ब्लॉकों का औसत निकाले तो यह आंकड़ा एक लाख के करीब होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं है। विभाग के इन आंकड़ों पर पशु पालक सवाल उठ रहे हैं।
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ये है टीकाकरण की स्थिति
-तहसील अतर्रा के सुलक थोक निवासी शिवम तिवारी के पास दो भैंसें थीं। पिछले साल उनके एक मवेशी को मुंहपका यानी एफएमडी का टीका नहीं लगा था। उपचार के बाद भी भैंस की मौत हो गई थी। इस साल भी वह टीकाकरण के इंतजार में हैं।
-महोतरा निवासी पशुपालक दिवाकर पांडेय के पास दो भैंसें हैं। इनका अभी तक टीकाकरण नहीं हो सका है। उनका कहना है कि उनके गांव में टीम का इंतजार किया जा रहा है। -
अतर्रा के पशुपालक सीताराम ने प्राइवेट डॉक्टर को बुलाकर मवेशी का इलाज कराया। उन्होंने कहा कि मवेशी बीमार हो गया था। टीम की तरफ से अभी तक टीकाकरण के बारे में नहीं बताया गया।
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पशु चिकित्सा विभाग के अपने दावे
पशु चिकित्सा विभाग का दावा है कि एफएमडी अभियान को लेकर रोजाना सुबह-सुबह अस्पताल में मौजूद स्टाफ टीम बनाकर गांवों में निकल जा रहे हैं। किस-किस गांव में कौन सी टीम जाएगी, इसका पूरा रोस्टर पहले से तैयार किया जा चुका है और टीमें सुबह समय पर गांव पहुंचकर पशुपालकों से मिलकर उन्हें बीमारी के प्रति जागरूक करते हुए मवेशियों का टीकाकरण कर रही हैं।
चार महीने से कम उम्र वाले और आठ महीने के गर्भित पशुओं को टीका नहीं लगाया जाता है। अगर किसी पशु को मुंहपका बीमारी लग जाती है तो उसका नियमानुसार इलाज किया जाता है। बीमार पशुओं को टीका नहीं लगता है। विभाग का दावा है कि 45 दिन चलने वाले इस अभियान में सभी पशुओं को टीका लगा दिया जाएगा।
अगर किसी पशुपालक के मवेशी को टीका नहीं लग सका है तो वह नजदीक के अस्पताल जाकर टीका लगवा सकता है और अभियान के बाद भी मवेशियों को सूचना देने पर टीका लगाया जाएगा।
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वर्जन
स्टाफ कम है और पैरावेट्स भी काम नहीं कर रहे हैं। यह बात ठीक है लेकिन विभाग पूरी ताकत से टीकाकरण अभियान में लगा है। स्टाफ के सभी लोगों से सहयोग लेकर टीमें गांव-गांव जाकर टीकाकरण कर रही हैं। आंकड़ों में किसी तरह की गलती नहीं है। विभागीय कर्मचारियों की संख्या कम है इसलिए अभियान की गति जरूर कम है। 45 दिनों में लक्ष्य प्राप्त करने का पूरा प्रयास होगा।
-डॉ. निर्मल गुप्ता, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बांदा
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ऐसे में 22 जुलाई से 29 जुलाई के बीच महज आठ दिन में जनपद में विभाग 56,700 मवेशियों का टीकाकरण करने का दावा कर रहा है। आठ सितंबर तक चलने वाले एफएमडी अभियान में विभाग की यह आंकड़ेबाजी पशु पालकों के गले नहीं उतर रही है।
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जनपद में वर्तमान में करीब 19 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। मानक के अनुसार फार्मासिस्ट की संख्या 19 और पशुधन प्रसार अधिकारी की संख्या 22 होनी चाहिए लेकिन स्टाफ इससे काफी कम है। उधर, जनपद में गाय और भैंसों की संख्या 4,49,734 है। पशु चिकित्सा विभाग को शासन से मवेशियों की संख्या के सापेक्ष 4,27,250 टीके मिले हैं।
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यह आंकड़ा तब है जब विभाग के पास न तो स्टाफ है और न ही पैरावेट्स। जनपद में पैरावेट्स की संख्या 137 के करीब है। इसमें विभाग केवल 45 को ही सक्रिय मानता है। पिछले कई दिनों से पैरावेट्स अपने मानदेय को लेकर हड़ताल पर हैं और विभाग का सहयोग नहीं कर रहे हैं।
टीकाकरण पर एक नजर
गौर करने वाली बात यह है कि आठ ब्लॉकों के इस जनपद में बड़ोखर बुजुर्ग ब्लॉक में करीब 12,000 और नरैनी विकास खंड में 12,530 मवेशियों का टीकाकरण हो चुका है। तिंदवारी ब्लॉक में टीकाकरण के लिए 62,888 पशुओं में शुक्रवार तक 10,650 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। यानी तीन ब्लॉकों में अब तक करीब 35 हजार मवेशियों को टीका लग चुका है। ऐसे में आठ ब्लॉकों का औसत निकाले तो यह आंकड़ा एक लाख के करीब होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं है। विभाग के इन आंकड़ों पर पशु पालक सवाल उठ रहे हैं।
ये है टीकाकरण की स्थिति
-तहसील अतर्रा के सुलक थोक निवासी शिवम तिवारी के पास दो भैंसें थीं। पिछले साल उनके एक मवेशी को मुंहपका यानी एफएमडी का टीका नहीं लगा था। उपचार के बाद भी भैंस की मौत हो गई थी। इस साल भी वह टीकाकरण के इंतजार में हैं।
-महोतरा निवासी पशुपालक दिवाकर पांडेय के पास दो भैंसें हैं। इनका अभी तक टीकाकरण नहीं हो सका है। उनका कहना है कि उनके गांव में टीम का इंतजार किया जा रहा है। -
अतर्रा के पशुपालक सीताराम ने प्राइवेट डॉक्टर को बुलाकर मवेशी का इलाज कराया। उन्होंने कहा कि मवेशी बीमार हो गया था। टीम की तरफ से अभी तक टीकाकरण के बारे में नहीं बताया गया।
पशु चिकित्सा विभाग के अपने दावे
पशु चिकित्सा विभाग का दावा है कि एफएमडी अभियान को लेकर रोजाना सुबह-सुबह अस्पताल में मौजूद स्टाफ टीम बनाकर गांवों में निकल जा रहे हैं। किस-किस गांव में कौन सी टीम जाएगी, इसका पूरा रोस्टर पहले से तैयार किया जा चुका है और टीमें सुबह समय पर गांव पहुंचकर पशुपालकों से मिलकर उन्हें बीमारी के प्रति जागरूक करते हुए मवेशियों का टीकाकरण कर रही हैं।
चार महीने से कम उम्र वाले और आठ महीने के गर्भित पशुओं को टीका नहीं लगाया जाता है। अगर किसी पशु को मुंहपका बीमारी लग जाती है तो उसका नियमानुसार इलाज किया जाता है। बीमार पशुओं को टीका नहीं लगता है। विभाग का दावा है कि 45 दिन चलने वाले इस अभियान में सभी पशुओं को टीका लगा दिया जाएगा।
अगर किसी पशुपालक के मवेशी को टीका नहीं लग सका है तो वह नजदीक के अस्पताल जाकर टीका लगवा सकता है और अभियान के बाद भी मवेशियों को सूचना देने पर टीका लगाया जाएगा।
वर्जन
स्टाफ कम है और पैरावेट्स भी काम नहीं कर रहे हैं। यह बात ठीक है लेकिन विभाग पूरी ताकत से टीकाकरण अभियान में लगा है। स्टाफ के सभी लोगों से सहयोग लेकर टीमें गांव-गांव जाकर टीकाकरण कर रही हैं। आंकड़ों में किसी तरह की गलती नहीं है। विभागीय कर्मचारियों की संख्या कम है इसलिए अभियान की गति जरूर कम है। 45 दिनों में लक्ष्य प्राप्त करने का पूरा प्रयास होगा।
-डॉ. निर्मल गुप्ता, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बांदा