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Auraiya News: शहीदी दिवस पर राहगीरों को बांटा शर्बत, गुरुद्वारे में आयोजित हुए कार्यक्रम
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औरैया। सिखों के पांचवे गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी का 418वां शहीदी दिवस धूमधाम से मनाया। इस मौके पर गुरुद्वारे में जहां शबद कीर्तन के साथ जो बोले सो निहाल के जयकारे लगाए गए। तो वहीं दिबियापुर रोड पर राहगीरों को छबील शर्बत का वितरण किया गया।
शहीदी दिवस के मौके पर गुरुद्वारे में पिछले 40 दिनों से शबद कीर्तन आदि भक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था। इसमें समाज के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। जगदीप सिंह ने शहादत के रूप में स्मरण करने का संकल्प लेने वाला पर्व बताया। बताया कि हर सिख को उनकी शहीदी पर प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी शहादत को अपने जहन में रखना चाहिए।
उनकी शहादत को लासानी (अनोखी) शहादत कहा जाता है। सिख इतिहास में गुरु अर्जुन देव पहले सिख गुरु हुए। उनकी याद में ही छबील लगाई जाती है। जो जून की गर्मी में मानवता के नाते लोगों को शीतलता प्रदान करने की एक पहल है। उन्होंने सभी सिखों से अपील की है कि वह गुरु साहिब के इतिहास को जरूर पढ़े।
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यही असल में शहीदी गुरु पर्व मनाना होगा। इस मौके पर दिबियापुर रोड पर राहगीरों को शर्बत का वितरण किया गया। जिसे पीकर राहगीरों ने भीषण गर्मी से राहत पाई। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जगदीप सिंह, मंगी सिंह, रोमी बाबू, मोहिंदर सिंह, रेशू, अमरजीत, चम्पी, सुच्चे बाबू आदि ने सहयोग प्रदान किया।
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शहीदी दिवस के मौके पर गुरुद्वारे में पिछले 40 दिनों से शबद कीर्तन आदि भक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था। इसमें समाज के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। जगदीप सिंह ने शहादत के रूप में स्मरण करने का संकल्प लेने वाला पर्व बताया। बताया कि हर सिख को उनकी शहीदी पर प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी शहादत को अपने जहन में रखना चाहिए।
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उनकी शहादत को लासानी (अनोखी) शहादत कहा जाता है। सिख इतिहास में गुरु अर्जुन देव पहले सिख गुरु हुए। उनकी याद में ही छबील लगाई जाती है। जो जून की गर्मी में मानवता के नाते लोगों को शीतलता प्रदान करने की एक पहल है। उन्होंने सभी सिखों से अपील की है कि वह गुरु साहिब के इतिहास को जरूर पढ़े।
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यही असल में शहीदी गुरु पर्व मनाना होगा। इस मौके पर दिबियापुर रोड पर राहगीरों को शर्बत का वितरण किया गया। जिसे पीकर राहगीरों ने भीषण गर्मी से राहत पाई। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जगदीप सिंह, मंगी सिंह, रोमी बाबू, मोहिंदर सिंह, रेशू, अमरजीत, चम्पी, सुच्चे बाबू आदि ने सहयोग प्रदान किया।