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निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल योजना के रोल मॉडल बने डीएम

अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Tue, 17 Apr 2018 10:56 PM IST
सीएम को गोवंश का प्रतीक भेंट करते ललितपुर के डीएम मानवेंद्र सिंह।
सीएम को गोवंश का प्रतीक भेंट करते ललितपुर के डीएम मानवेंद्र सिंह। - फोटो : amarujala
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बिधूना (औरैया)। प्रदेश भर में आवारा जानवरों की समस्या से जूझ रहे किसानों को अब राहत मिलेगी। यह कारनामा जिले के बिधूना निवासी और ललितपुर के डीएम आईएएस मानवेंद्र सिंह ने कर दिखाया है। ललितपुर के कल्यानपुरा में जनसहयोग से गोवंश आश्रय स्थल खोला गया है। प्रदेश सरकार ने इस योजना को प्रदेशभर में लागू करने का निर्णय लिया है। इसका शासनादेश भी जारी कर दिया है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और बिधूना से पांच बार विधायक रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय गजेंद्र सिंह के पुत्र आईएएस मानवेन्द्र सिंह ने एक नई पहल के तहत ललितपुर के कल्यानपुरा में गोवंश आश्रय स्थल खोला है। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। 

पिछले हफ्ते  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं ललितपुर पहुंचकर कल्यानपुरा में बने गोवंश आश्रय स्थल का लोकार्पण किया था। इस सराहनीय कार्य के लिए डीएम मानवेंद्र सिंह की पीठ भी थपथपाई। इसके बाद डीएम ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया। इस पर मुख्यमंत्री ने अपनी सहमति प्रदान कर दी। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में इसे लागू करने का शासनादेश जारी कर दिया।

कार्य योजना एक नजर में  
 आवारा जानवर खासकर गोवंश से किसानों के साथ-साथ आमजन को दिक्कतें उठानी पड़ रही थीं। इस पर डीएम मानवेंद्र सिंह ने ललितपुर के बड़े चरागाह स्थलों को चिह्नित कराया। जिनकी संख्या 109 है। इसके बाद कल्यानपुरा स्थित 59.00 हेक्टेयर के चरागाह मेें जनसहयोग से निराश्रित गोवंश स्थल का निर्माण कराने का निर्णय लिया। इस योजना में राज्य सरकार से सीधे कोई धनराशि नहीं ली गई। इसका निर्माण जनसहयोग के साथ-साथ मनरेगा व अन्य योजनाओं के सहयोग से पूरा किया गया। जनसहयोग के लिए एक सोसाइटी का गठन किया गया। जिसका बैंक में खाता खुलवाया गया और सभी सदस्यों से चेक के द्वारा 11000 रुपये सहयोग राशि लेने का निर्णय लिया गया। सोसाइटी के 750 सदस्य बन चुके हैं। 75 लाख रुपये की धनराशि खाते में जमा हो चुकी है। इसमें एक हजार सदस्य बनाने का लक्ष्य हैै। डीएम मानवेंद्र सिंह ने बताया कि इस काम में क्षेत्रीय सांसद व केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती का भी योगदान रहा है। उन्होंने अपनी सांसद निधि से 25 लाख रुपये देने की स्वीकृति प्रदान की है। इतनी ही धनराशि बजाज पावर प्लांट द्वारा सीएसआर फंड के माध्यम से दी जाएगी।

निर्माण कार्य में लिया जन सहयोग
सबसे पहले कल्यानपुरा में एक चारागाह स्थल का चयन किया गया। जिसका क्षेत्रफ ल 59 हेक्टेयर है। जनता से निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल के निर्माण में सहयोग की अपील की गई। साथ ही मनरेगा व अन्य योजनाओं से चारागाह के रकबा की चर (खाई) के निर्माण के द्वारा सुरक्षित किया गया। परिसर में गोवंश को पानी पीने के लिए एक चरही का भी निर्माण कराया गया। परिसर में गायों के रखने व बैठने के लिए टिन शेड आदि का निर्माण कराने के साथ पौधे लगाकर उन्हें विकसित किया गया। शुद्ध पेयजल के लिए एक पंप हाउस, बोरिंग, जेनरेटर व पानी के लिए सबमर्सिबल पंप लगाया गया। गायों के भूसा (चारा) आदि रखने के लिए एक 51 फीट व 22 फीट चौड़ी गोदाम का निर्माण कराया गया।

भोजन सामग्री फेंके नहीं, बल्कि आश्रय स्थल को सूचना दें
स्थानीय लोगों के यहां कोई आयोजन होता है और यदि भोजन सामग्री बचती है तो उसे फेंकने के बजाय गोवंश आश्रय स्थल पर सूचना दें। यहां के लोग बचे भोजन को मंगवाकर गायों को खिलायेंगे। इससे गायों को पौष्टिक भोजन भी मिलता रहेगा। चारागाह के पास में एक झील है। जिसमें वर्ष के दस माह पानी भरा रहता है। चारागाह की भूमि पर तालाब खुदवाकर जल संरक्षण किया जाएगा। जिससे गोवंश लगभग 8 से 10 माह तक इस तालाब से पानी पी सकेंगे।

चारागाह में लगेगी की मानसून की घास
गोवंश आश्रय के लिए चिह्नित चारागाह के दो तिहाई हिस्से में मानसूनी अन्जनी, धामन, दीनानाथ आदि घास लगाई जाएगी। बुंदेलखंड में अधिकांश गायें देशी हैं। जो एक या दो लीटर से अधिक दूध नहीं देतीं। जिस कारण गो पालक इन्हें अपने घर में नहीं रखते। उनका प्रयास है कि पशुपालन विभाग द्वारा इन आश्रय स्थलों में उन्नत प्रजाति के सांड़ जैसे एचएफ  सायवाल, थारपारकर आदि को लाकर देशी गायों के मध्य रखा जाएगा। जिससे इनकी नस्लें बदलेगी। गांव के लोग इन्हें छोड़ने के बजाय इनका पालन करेंगे। इन आश्रय स्थलों के लिए गांव के लोगों से चारे का सहयोग लिया जाएगा।

ललितपुर में 50 हजार आवारा गोवंश
ललितपुर जिले में लगभग 50 हजार आवारा गोवंश हैं। जिन्हें अलग-अलग आश्रय स्थल बनवाकर उनमें रखा जाएगा। सोसाइटी के माध्यम से जो पैसा जमा हुआ है। उसके ब्याज से जो धनराशि मिलेगी उसका 25 प्रतिशत तुरंत उसी खाते में जमा कर दिया जाएगा। शेष 75 प्रतिशत धनराशि को आश्रय स्थल के संचालन पर खर्च किया जाएगा।

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