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Auraiya News: जर्जर सड़क पर फिर चली प्रेसर मशीन
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुरुगंज। कस्बा से हरचंदपुर की पांच किलोमीटर जर्जर सड़क बनने के 15 दिन के अंदर ही उखड़ने लगी थी। मामला संज्ञान में आने पर इस खबर को प्रमुखता से दो फरवरी के अंक में प्रकाशित कर सड़क की हकीकत उजागर की गई। अधिकारियों ने संज्ञान लेकर अब इस सड़क पर दोबारा से काम शुरू कराया है।
रुरुगंज क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को ककोर मुख्यालय जाने के लिए हरचंदपुर मार्ग से होकर जाना होता है। इस मार्ग पर वर्ष 2015 में पहली बार मरम्मतीकरण कराते हुए गड्ढों के जख्म खत्म कराए गए। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग ने मार्ग से नजर हटा ली। आलम यह बना कि पिछले पांच साल से यह सड़क सुविधा के बजाय वाहन चालकों के लिए हिचकोले मारने की समस्या बढ़ा रही थी।
जर्जर सड़क की हालत को अमर उजाला ने 21 दिसंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से 50 लाख रुपये की लागत से पांच किमी सड़क का डामरीकरण शुरू कराया गया। जनवरी माह में हुए कार्य के दौरान बारिश व ठंड ज्यादा होने की वजह से डामर व गिट्टी का शील कोड टिक न सका। ग्रामीणों की ओर से इसे लेकर ऐतराज जताया गया।
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नवनिर्मित सड़क की उखड़ती गिट्टी की समस्या उठाते हुए अमर उजाला ने दो फरवरी के अंक में प्रमुखता से निर्माण कार्य पर सवाल खड़े किए। जिसका संज्ञान लेकर अब दोबारा से शीलकोड डलवाया जाना शुरू किया गया है। शनिवार को इस मार्ग पर शीलकोड डलवाते हुए लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने दोबारा से काम शुरू कराया है।
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रुरुगंज से हरचंदपुर के बीच पांच किमी सड़क का पहले चरण में जनवरी माह में 50 लाख रुपये की लागत से काम शुरू कराया गया था। बारिश व ठंड की अधिकता के चलते सड़क का शीलकोड टिक नहीं सका था। गिट्टी उखड़ रही थी। ऐसे में अब दोबारा से शील कोड डलवाया जा रहा है। अब सड़क टिकाऊ होगी। - विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड
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रुरुगंज। कस्बा से हरचंदपुर की पांच किलोमीटर जर्जर सड़क बनने के 15 दिन के अंदर ही उखड़ने लगी थी। मामला संज्ञान में आने पर इस खबर को प्रमुखता से दो फरवरी के अंक में प्रकाशित कर सड़क की हकीकत उजागर की गई। अधिकारियों ने संज्ञान लेकर अब इस सड़क पर दोबारा से काम शुरू कराया है।
रुरुगंज क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को ककोर मुख्यालय जाने के लिए हरचंदपुर मार्ग से होकर जाना होता है। इस मार्ग पर वर्ष 2015 में पहली बार मरम्मतीकरण कराते हुए गड्ढों के जख्म खत्म कराए गए। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग ने मार्ग से नजर हटा ली। आलम यह बना कि पिछले पांच साल से यह सड़क सुविधा के बजाय वाहन चालकों के लिए हिचकोले मारने की समस्या बढ़ा रही थी।
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जर्जर सड़क की हालत को अमर उजाला ने 21 दिसंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से 50 लाख रुपये की लागत से पांच किमी सड़क का डामरीकरण शुरू कराया गया। जनवरी माह में हुए कार्य के दौरान बारिश व ठंड ज्यादा होने की वजह से डामर व गिट्टी का शील कोड टिक न सका। ग्रामीणों की ओर से इसे लेकर ऐतराज जताया गया।
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नवनिर्मित सड़क की उखड़ती गिट्टी की समस्या उठाते हुए अमर उजाला ने दो फरवरी के अंक में प्रमुखता से निर्माण कार्य पर सवाल खड़े किए। जिसका संज्ञान लेकर अब दोबारा से शीलकोड डलवाया जाना शुरू किया गया है। शनिवार को इस मार्ग पर शीलकोड डलवाते हुए लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने दोबारा से काम शुरू कराया है।
रुरुगंज से हरचंदपुर के बीच पांच किमी सड़क का पहले चरण में जनवरी माह में 50 लाख रुपये की लागत से काम शुरू कराया गया था। बारिश व ठंड की अधिकता के चलते सड़क का शीलकोड टिक नहीं सका था। गिट्टी उखड़ रही थी। ऐसे में अब दोबारा से शील कोड डलवाया जा रहा है। अब सड़क टिकाऊ होगी। - विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड