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Auraiya News: छठी मां की पूजा कर संतानों के दीर्घायु की कामना

Mon, 20 Nov 2023 12:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Mon, 20 Nov 2023 12:47 AM IST
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Pray for the long life of children by worshiping Chhathi Maa.
दिबियापुर। दीपावली के ठीक छह दिन बाद मनाए जाने वाले छठ महापर्व पर रविवार शाम व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। संतानों के दीर्घायु एवं उनके कष्टों के निवारण के लिए रखे जाने वाले छठ पर्व पर व्रत का पारायण सोमवार की सुबह महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य देकर करेंगीं।
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काचि की बांस कै बहिंगी लचकत जाय, भरिहवा जै होउं कवनरम, भार घाटे पहुंचाय, बाटै जै पूछेले बटोहिया ई भार कैकरै घरै जाय आंख तोरे फूटै रे बटोहिया जंगरा लागै तोरे घूम, छठी मईया बड़ी पुण्यात्मा ई भार छठी घाटे जाय.. जैसे कई सोहर गाते हुए महिलाएं अपने परिजनों के साथ गेल गांव स्थित तरणताल पर पहुंचीं।
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दिबियापुर में नहर किनारे स्थित छठ मईया के स्थान पर भी अघ्र्य देने के लिए भीड़ उमड़ी। नहाय खाय एवं अगले दिन लोहंडा एवं खरना (छोटी छठ)के साथ प्रारंभ हुए छठ महापर्व के तीसरे दिन आज रविवार को डाला छठ पर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देने का विधान है। यहां पहले महिलाओं ने छठी मइया की पूजा की। इसके बाद पानी में घुटनों तक खड़े होकर डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया। सोमवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देकर महिलाएं अपना व्रत पूरा करेंगी। इस दौरान महिलाएं एक दूसरे को नाक से लेकर मांग तक सिंदूर भरतीं नजर आईं। माना जाता है कि सिंदूर जितना लंबा होता है, पति की उम्र उतनी ही अधिक होती है। किंवदंतियों के अनुसार छठ पूजा का प्रारंभ महाभारत काल में कुंती द्वारा सूर्य की आराधना व पुत्र कर्ण के जन्म के समय से हुआ था। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं। उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर (तालाब) के किनारे यह पूजा की जाती है। इस व्रत को कड़े नियम एवं निष्ठा से किया जाता है। इसमें तीन दिन के कठोर उपवास का विधान है।
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