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Auraiya News: भीगे धान से निकलने लगे पौधे, दाना सड़ने की कगार पर
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फफूंद। अरमानों की फसल को बाजार लेकर आढ़त पहुंचे किसानों की मेहनत इस कदर भीगी कि उसमें अंकुर फूट पड़े। क्षेत्र के गांव भैंसोल के दो किसानों की मेहनत बिक्री के इंतजार में बर्बाद हो गई। किसानों का करीब 80 क्विंटल धान बारिश से भीग गया। धान के ढेर से पौधे निकलने लगे और दाना सड़ने लगा है। शुक्रवार को जब किसान आढ़त पहुंचे तो अपनी फसल की हालत देखकर उनकी आंखों से आंसू छलक उठे।
गांव निवासी किसान सिंटू दीक्षित और गोपाल जी ने बताया कि पूरी लागत लगाकर धान की फसल तैयार की थी। वह लोग रविवार से आढ़त पर धान बेचने की कोशिश कर रहे थे लेकिन खरीदारी न होने के कारण धान अछल्दा की एक निजी आढ़त पर पड़ा रहा। बारिश के बाद भीगे धान में काले दाग पड़ गए और पौधे निकलने के साथ ही दाने सड़ने के कगार पर हैं। शुक्रवार को काफी प्रयास के बावजूद धान न बिक पाने पर किसानों के आंसू छलक पड़े। अंत में वह धान को भरकर घर ले गए। किसानों ने बताया कि धान बेचकर उधार चुकाने और रबी की फसल की तैयारी करनी थी लेकिन अब सब संकट में पड़ गया है। अव्यवस्था और देरी के चलते कई किसान मजबूर होकर अपनी फसल खुले में रखने के लिए विवश हैं। खराब मौसम से अन्य किसानों की उपज भी नुकसान की चपेट में आ सकती है। किसानों ने जिला प्रशासन से खराब धान का उचित मुआवजा दिलाने और खरीदी व्यवस्था को सुचारु कराने की मांग की है।
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गांव निवासी किसान सिंटू दीक्षित और गोपाल जी ने बताया कि पूरी लागत लगाकर धान की फसल तैयार की थी। वह लोग रविवार से आढ़त पर धान बेचने की कोशिश कर रहे थे लेकिन खरीदारी न होने के कारण धान अछल्दा की एक निजी आढ़त पर पड़ा रहा। बारिश के बाद भीगे धान में काले दाग पड़ गए और पौधे निकलने के साथ ही दाने सड़ने के कगार पर हैं। शुक्रवार को काफी प्रयास के बावजूद धान न बिक पाने पर किसानों के आंसू छलक पड़े। अंत में वह धान को भरकर घर ले गए। किसानों ने बताया कि धान बेचकर उधार चुकाने और रबी की फसल की तैयारी करनी थी लेकिन अब सब संकट में पड़ गया है। अव्यवस्था और देरी के चलते कई किसान मजबूर होकर अपनी फसल खुले में रखने के लिए विवश हैं। खराब मौसम से अन्य किसानों की उपज भी नुकसान की चपेट में आ सकती है। किसानों ने जिला प्रशासन से खराब धान का उचित मुआवजा दिलाने और खरीदी व्यवस्था को सुचारु कराने की मांग की है।
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