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Auraiya News: मुआवजे के विवाद में अटका ओवरब्रिज, सात साल में बने महज सात पिलर

Tue, 29 Sep 2026 12:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 12:05 AM IST
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Overbridge project stalled due to compensation dispute; only seven pillars built in seven years.
कंचौसी। कस्बे की रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज का काम बीते सात वर्षों से अधूरा है। सेतु निगम, कानपुर और किसानों के बीच मुआवजे का विवाद नहीं सुलझ पाने से निर्माण कार्य ठप है।
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वर्ष 2019 में 6.09 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 900 मीटर लंबा ओवरब्रिज बनना शुरू हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि निर्माण के बाद उन्हें रोजाना के जाम से निजात मिलेगी। विभागीय उदासीनता और भूमि अधिग्रहण का पेच फंसने से सात सालों में ओवरब्रिज के महज सात पिलर ही खड़े हो सके हैं। विवाद की मुख्य वजह किसानों का सर्किल रेट से चार गुना मुआवजे की मांग पर अड़े होना है। विभागीय प्रक्रिया और बजट के चलते सेतु निगम सहमति नहीं दे पा रहा है। इस मार्ग से औरैया जिला मुख्यालय, जालौन, कानपुर, रसूलाबाद, कानपुर देहात, कन्नौज और फर्रुखाबाद के लिए यात्री आते-जाते हैं।
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रेलवे क्रॉसिंग बंद होने पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। राहगीरों को रोजाना घंटों जाम में जूझना पड़ता है। फाटक खुलने के बाद भी यातायात सामान्य होने में समय लगता है। रोजमर्रा के काम के लिए निकलने वाले लोगों का आधा समय जाम में बर्बाद होता है। अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कई बार अफसरों और किसानों के साथ बैठकें कर बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया, लेकिन सभी वार्ताएं बेनतीजा रहीं। क्षेत्रीय धर्मेंद्र गुप्ता और चंद्रकांत शुक्ला ने इस समस्या पर चिंता जताई। चंद्रकांत शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2019 से हम ओवरब्रिज बनने का इंतजार कर रहे हैं। जब तक ओवरब्रिज पूरी तरह चालू नहीं होता, जाम की समस्या खत्म नहीं होगी।
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एंबुलेंस हो या स्कूल बस, सभी को इस क्रॉसिंग पर घंटों इंतजार करना पड़ता है। इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों की जान पर बन आती है। प्रशासन को जल्द से जल्द मुआवजा विवाद सुलझाना चाहिए। - सनी गौर
अगर शासन-प्रशासन और सेतु निगम किसानों के साथ सकारात्मक रुख अपनाकर मुआवजे का समाधान निकालें, तो रुका हुआ काम दोबारा शुरू हो सकता है। जनहित में इसका निर्माण पूरा होना बेहद जरूरी है। - श्यामजी मिश्रा

वर्जन
सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक सुरेंद्र सुमन ने बताया कि स्थानीय लोग वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन कमेटी ने हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा तय किया था। मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
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