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माया में पड़ा व्यक्ति कभी शांत नहीं रहता
ब्यूरो अमर उजाला, औरैया
Updated Mon, 05 Oct 2015 12:07 AM IST
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श्रीमद भागवत कथा एवं श्रीराम कथा की दिव्य अमृत वर्षा महोत्सव में प्रवचन करते हुए पं.संतोष शुक्ला ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान ने मानवीय चीजों का अनुकरण करते हुए बाल लीलाओं का दिव्य करते हुए मानव को धर्म पर चलने का संदेश दिया।
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पुराना बरधायी स्थित नृसिंह वाटिका गेस्ट हाऊस में चल रही 11 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन करते हुए प. संतोष शुक्ला ने चीरहरण प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य के मन पर जब माया का आवरण पड़ जाता है तो उसे वह जप तप नहीं करने देता।
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कहा कि हम सभी लोग गोपियों की तरह जप तप करें तो हमारे मन पर पड़े माया के आवरण रूपी चीर का भगवान हरण कर लेंगे।
उन्होंने गोवर्धन पूजन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान ने कर्म की प्रधानता को साबित कर इंद्र भगवान का अभिमान तोड़ा। कहा कि परम परमात्मा ईश्वर के अंदर सभी भाव है।
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भागवताचार्य प. संतोष शुक्ला ने कहा कि सभी प्रणियों को समान समझने वाला किसी भी प्रकार के भेदभाव से मुक्त समदर्शी ही सच्चा ज्ञानी है। कथा के अंत में आरती कर प्रसाद वितरण किया गया।