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Auraiya News: सर्दी में बढ़ा नसों का दर्द, इलाज के लिए कानपुर की दौड़
Mon, 02 Feb 2026 11:33 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 02 Feb 2026 11:33 PM IST
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फाेटो-11-मेडिकल कॉलेज में मौजूद मरीज। संवाद
औरैया। सर्द मौसम के साथ ही जिले में साइटिका (नसों के दर्द) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है।
यह असहनीय दर्द बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है, लेकिन जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज में न तो एमआरआई जांच की सुविधा है और न ही न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरो सर्जरी विभाग है। मजबूरन मरीजों को इलाज और जांच के लिए कानपुर व अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 20 से 30 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो कमर, कूल्हे और पैर में झनझनाहट, सुन्नपन और तेज दर्द की शिकायत लेकर आते हैं। डॉक्टर प्राथमिक जांच के बाद एमआरआई कराने की सलाह देते हैं, लेकिन यहां यह सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को 100 किलोमीटर दूर कानपुर जाना पड़ता है। कई मरीज आर्थिक तंगी और बार-बार सफर की परेशानी से इलाज अधूरा छोड़ने को मजबूर हैं।
युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा
चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करना, ठंड में शरीर को गर्म न रखना, अचानक वजन उठाना और कम शारीरिक गतिविधि साइटिका को बढ़ावा दे रहे हैं। पहले जहां यह बीमारी 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती थी, अब 25 से 40 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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सुविधाओं का अभाव बना बाधा
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण सही समय पर सटीक इलाज नहीं हो पा रहा। न्यूरोलॉजी व न्यूरो सर्जरी विभाग ही नहीं है। हड्डी रोग विशेषज्ञ ही शुरुआती इलाज करते हैं। बाहर से एमआरआई जांच कराने पर सात से दस हजार रुपये का खर्च आता है।
मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन मशीन है। एमआरआई मशीन लगवाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द एमआरआई मशीन मिल जाएगी।
- डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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यह असहनीय दर्द बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है, लेकिन जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज में न तो एमआरआई जांच की सुविधा है और न ही न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरो सर्जरी विभाग है। मजबूरन मरीजों को इलाज और जांच के लिए कानपुर व अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 20 से 30 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो कमर, कूल्हे और पैर में झनझनाहट, सुन्नपन और तेज दर्द की शिकायत लेकर आते हैं। डॉक्टर प्राथमिक जांच के बाद एमआरआई कराने की सलाह देते हैं, लेकिन यहां यह सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को 100 किलोमीटर दूर कानपुर जाना पड़ता है। कई मरीज आर्थिक तंगी और बार-बार सफर की परेशानी से इलाज अधूरा छोड़ने को मजबूर हैं।
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युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा
चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करना, ठंड में शरीर को गर्म न रखना, अचानक वजन उठाना और कम शारीरिक गतिविधि साइटिका को बढ़ावा दे रहे हैं। पहले जहां यह बीमारी 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती थी, अब 25 से 40 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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सुविधाओं का अभाव बना बाधा
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण सही समय पर सटीक इलाज नहीं हो पा रहा। न्यूरोलॉजी व न्यूरो सर्जरी विभाग ही नहीं है। हड्डी रोग विशेषज्ञ ही शुरुआती इलाज करते हैं। बाहर से एमआरआई जांच कराने पर सात से दस हजार रुपये का खर्च आता है।
मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन मशीन है। एमआरआई मशीन लगवाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द एमआरआई मशीन मिल जाएगी।
- डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज