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मोक्षदायिनी मंदिर में पूरी होती हैं मुरादें
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Fri, 14 Aug 2015 12:02 AM IST
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कस्बा मुरादगंज से एक किलोमीटर दूर अयाना रोड स्थित यह शिव मंदिर मोक्ष दायिनी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। कहते हैं कि सावन के सोमवार को मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर भोले बाबा को गंगाजल व दूध से अभिषेक करने वाले भक्त को मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती है।
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इसके चलते सावन के सोमवार में इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। भोले बाबा के दरबार में मुरादगंज, बीजलपुर, अयाना, नवादा ही नहीं बल्कि आगरा, दिल्ली, कानपुर, भिंड व ग्वालियर से लोग सावन के सोमवार को आते हैं।
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रोशनगंज के रामदत्त द्विवेदी बताते हैं कि मंदिर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मुराद अवश्य पूरी होती है।
राजा परीक्षित ने खोजा था शिवलिंग- मुरादगंज। भगवान शिव के इस मोक्षदायिनी मंदिर में भक्तों की आस्था यूं ही नहीं बढ़ी है। भागवताचार्य पंडित रामनरेश पांडेय बताते हैं कि द्वापर युग में जनमेजय नगरी में सर्प की प्रजातियों को नष्ट होने से बचाने के लिए सर्प यज्ञ हुआ था।
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इसी दौरान इंद्र भगवान के कहने पर तक्षक नाग को अभयदान दिया गया था। तब राजा परीक्षित को ज्ञान प्राप्त हुआ और उन्होंने शिवलिंग की स्थापना कराई थी।
150 वर्ष पूर्व हुआ था मंदिर का जीर्णोद्धार- मुरादगंज। राजा परीक्षित की ओर से बनवाया गया भगवान शिव का यह मंदिर समय के साथ जर्जर होता चला गया, लेकिन भक्तों की आस्था मंदिर में लगातार बढ़ती रही।
कस्बे के डा. देवेंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि लगभग 150 वर्ष पूर्व तुलसा कुंवर ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। तभी से यह मंदिर अपने भव्य स्वरूप को दर्शा रहा है।
वेद व्यास ने पढ़ी थी भागवत कथा- मुरादगंज। अयाना रोड स्थित यह शिव मंदिर पौराणिक विरासतों का खजाना रहा है।
पंडित रामनरेश पांडेय बताते हैं कि ग्रंथों में ऐसे साक्ष्य हैं कि महर्षि वेद व्यास ने राजा परीक्षित को इसी स्थान पर बैठकर भागवत कथा सुनाई थी। इस कथा को सुनने के बाद से राजा परीक्षित पूर्ण रूप से भक्ति भाव में लीन हो गए थे। ऐसे पावन स्थल पर मात्र सिर झुका लेने से सभी मुरादें पूरी हो जाती है।