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Auraiya News: बूंदाबांदी से पांच डिग्री गिरा पारा

Mon, 20 Jul 2026 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Mon, 20 Jul 2026 12:21 AM IST
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Mercury drops by five degrees due to light rain.
फोटो-12- खेत में धान रोपाई करते किसान। संवाद
बिधूना। मौसम का मिजाज रविवार को अचानक बदल गया। पूरे दिन बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई।
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इससे तापमान में पांच डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में किसानों की उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया और खेतों में पानी की कमी की समस्या बनी हुई है।
कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. रामपलट सिंह ने बताया कि रविवार को अधिकतम तापमान में पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। इससे अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान एक डिग्री गिरावट के साथ 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति लगभग छह किलोमीटर प्रति घंटा रही।
उन्होंने बताया कि अगले 24 घंटे के भीतर लगभग 1.5 मिमी बारिश होने के आसार हैं। रविवार को दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। इससे धूप न निकलने से मौसम सुहावना रहा। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले एक-दो दिनों में मौसम सक्रिय रहने की संभावना है।
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धान रोपाई पर संकट, रजबहों में पानी छोड़ने की मांग
बिधूना। तहसील क्षेत्र में रविवार सुबह आसमान में उमड़े घने काले बादलों ने अच्छी बारिश की उम्मीद तो जगाई लेकिन दोपहर तक बिना बरसे ही लौट गए।
सुबह करीब 11 बजे कुछ इलाकों में सिर्फ हल्की बूंदाबांदी होकर रह गई। इससे धान की रोपाई पर संकट छाया है। रजबहों में पानी छोड़ने की मांग की गई है।
जुलाई में कम बारिश के इस हालात ने धान की खेती करने वाले किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। पानी के अभाव में क्षेत्र के अधिकांश किसान सबमर्सिबल, ट्यूबवेल और डीजल इंजन जैसे निजी संसाधनों के भरोसे महंगे दामों पर धान की रोपाई करने को मजबूर हैं। किसानों का दर्द है कि मानसून की बेरुखी से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
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सिंचाई के लिए डीजल, बिजली और भारी मजदूरी के अतिरिक्त खर्च ने धान की खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। क्षेत्र के किसान सतेंद्र सिंह, सुदीप सिंह, मनोज कुमार और रामवीर सिंह आदि ने बताया कि पानी की कमी से धान की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इस समय न तो प्रकृति साथ दे रही है और न ही गांगासी रजबहा, रतनपुर समायन माइनर, कुर्सी, बदनपुर कैथावा व बिकूपुर माइनर जैसी नहरों में पर्याप्त पानी है। नहरें सूखी होने से खेतों तक पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है।

छोटे और सीमांत किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। क्षेत्र के किसानों ने शासन-प्रशासन से रजबहों में तुरंत पानी छोड़े जाने और सिंचाई के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। (संवाद)
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