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Auraiya News: जिले के 598 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में बनेंगे लर्निंग कॉर्नर
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संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में लर्निंग कॉर्नर (सीखने का कोना) बनाया जाएगा। इसकी मदद से कक्षा में छात्रों को रोचक तरीके से पढ़ाया जाएगा। शासन से इसके लिए बजट जारी किया गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि खेल-खेल में बच्चों को पढ़ना सिखाने के लिए को-लोकेटेड केंद्रों में अब लर्निंग कॉर्नर बनाए जाएंगे। इसमें रीडिंग कॉर्नर, आर्ट कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर और फरमार्मेंस कॉर्नर होंगे। इसमें खेलकूद की सामग्री के साथ ही टीएलएम (टीर्चर लर्निंग मैटेरियल) भी उपलब्ध कराई जाएगी। इ
ससे खेल-खेल में बच्चे आसानी से पढ़ना सीख सकें। इसके लिए चयनित 598 केंद्रों के लिए प्रति केंद्र 8110 के हिसाब से 48,49,780 लाख की धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। बता दें कि जिले में 1265 परिषदीय स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से 598 जगह आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय स्कूलों के परिसर में संचालित हो रहे हैं। इन्हें को-लोकेटेड केंद्र कहा जाता है। अब यहां पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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गठित होगी समिति
जिला समन्वयक प्रशिक्षण गुंजन श्रीवास्तव ने बताया कि प्रत्येक को-लोकेटेड केंद्र में पांच सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया जाएगा। इसका अध्यक्ष विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष होंगे। साथ ही विद्यालय के प्रधानाध्यापक सदस्य सचिव, सबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सदस्य और नोडल अध्यापक प्री-प्राइमरी भी इसके सदस्य होंगे। आवंटित की गई धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में जाएगी। लर्निंग कॉर्नर तैयार करने के लिए शिक्षण सामग्री खरीदी जाएगी। बच्चों की रुचि बनाए रखने के लिए समय-समय पर लर्निंग कॉर्नर की सामग्री को बदला जाएगा। इससे छात्रों को खेलने और सीखने की सुविधा मिलेगी।
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औरैया। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में लर्निंग कॉर्नर (सीखने का कोना) बनाया जाएगा। इसकी मदद से कक्षा में छात्रों को रोचक तरीके से पढ़ाया जाएगा। शासन से इसके लिए बजट जारी किया गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि खेल-खेल में बच्चों को पढ़ना सिखाने के लिए को-लोकेटेड केंद्रों में अब लर्निंग कॉर्नर बनाए जाएंगे। इसमें रीडिंग कॉर्नर, आर्ट कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर और फरमार्मेंस कॉर्नर होंगे। इसमें खेलकूद की सामग्री के साथ ही टीएलएम (टीर्चर लर्निंग मैटेरियल) भी उपलब्ध कराई जाएगी। इ
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ससे खेल-खेल में बच्चे आसानी से पढ़ना सीख सकें। इसके लिए चयनित 598 केंद्रों के लिए प्रति केंद्र 8110 के हिसाब से 48,49,780 लाख की धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। बता दें कि जिले में 1265 परिषदीय स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से 598 जगह आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय स्कूलों के परिसर में संचालित हो रहे हैं। इन्हें को-लोकेटेड केंद्र कहा जाता है। अब यहां पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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गठित होगी समिति
जिला समन्वयक प्रशिक्षण गुंजन श्रीवास्तव ने बताया कि प्रत्येक को-लोकेटेड केंद्र में पांच सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया जाएगा। इसका अध्यक्ष विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष होंगे। साथ ही विद्यालय के प्रधानाध्यापक सदस्य सचिव, सबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सदस्य और नोडल अध्यापक प्री-प्राइमरी भी इसके सदस्य होंगे। आवंटित की गई धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में जाएगी। लर्निंग कॉर्नर तैयार करने के लिए शिक्षण सामग्री खरीदी जाएगी। बच्चों की रुचि बनाए रखने के लिए समय-समय पर लर्निंग कॉर्नर की सामग्री को बदला जाएगा। इससे छात्रों को खेलने और सीखने की सुविधा मिलेगी।