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Auraiya News: ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे... ये आलम है कुछ नेताओं का
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औरैया। लोकसभा चुनाव में पार्टी से लेकर प्रत्याशी व कार्यकर्ता तपती धूप में अपनी जीत के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। वहीं कुछ नेता स्वयं के खत्म हुए रसूख को लोकसभा चुनाव के जरिए जिंदा करने के प्रयास में जुटे हैं।
चोरी छिपे जातिगत चोला ओढ़े इन नेताओं ने बिरादरी में स्वयं से संपर्क करना शुरू किया है। पार्टी के बड़े नेताओं को इस बगावत की भनक ना लगे और काम 35 हो जाए, इस मंशा को भुनाया जा रहा है। इसे लेकर गांव का एक मुहावरा इन दिनों खूब चर्चा में है। ग्रामीण कह रहे हैं ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे...।
कन्नौज लोकसभा सीट के दायरे में बिधूना विधानसभा का दायरा अच्छा खासा है। यहां सांसदी चुनाव को लेकर कुछ नेताओं ने भविष्य के विधानसभा चुनाव का सपना देखते हुए स्वयं से चोरी छिपे जनसंपर्क की मेहनत करना शुरू किया है। पूर्व में ऊंचे ओहदे पर रहे, लेकिन इन दिनों रसूख के लिए तरस रहे इन नेताओं ने सांसदी चुनाव में विधानसभा चुनाव की गोटियां बिछाना शुरू किया है।
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अपनी बिरादरी के गांवों व कस्बों में चोरी छिपे दस्तक दे रहे हैं। पार्टी चाहे जो हो, लेकिन बड़े नेताओं के कान तक भनक न पड़े इस लिए कुछ लोगों के साथ ही संपर्क कर रहे हैं। जनसभा व मंचों से दूरी बनाकर स्वयं के पत्ते छिपा लिए हैं। मतदाताओं को इन नेताओं का जनसंपर्क गले नहीं उतर रहा है। उनका मानना है कि इन नेताओं ने जिस पार्टी में रसूख पाया और खो भी दिया। अब उस रसूख को पाने के लिए पार्टी की खिलाफत कर रहे हैं।
इसमें चौकाने वाली बात यह है कि खुलकर सामने रहने की हिम्मत तक नहीं पैदा कर पा रहे। चुनावी जानकार इन नेताओं के जनसंपर्क के महत्व को महज खुद की जमीन को तैयार करने को लेकर देख रहे हैं। चुनावी माहौल में कुछ खास असर न पड़ने का अंदेशा भी जता रहे हैं। वहीं इन दिनों बिधूना क्षेत्र के गांवों का चुनावी माहौल इन भितरघाती नेताओं की हंसी ठिठोली कर रहा हैं। बस एक मुहावरे में इन नेताओं को समेटा जा रहा है। ग्रामीण कह रहे हैं कि ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे...।
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चोरी छिपे जातिगत चोला ओढ़े इन नेताओं ने बिरादरी में स्वयं से संपर्क करना शुरू किया है। पार्टी के बड़े नेताओं को इस बगावत की भनक ना लगे और काम 35 हो जाए, इस मंशा को भुनाया जा रहा है। इसे लेकर गांव का एक मुहावरा इन दिनों खूब चर्चा में है। ग्रामीण कह रहे हैं ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे...।
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कन्नौज लोकसभा सीट के दायरे में बिधूना विधानसभा का दायरा अच्छा खासा है। यहां सांसदी चुनाव को लेकर कुछ नेताओं ने भविष्य के विधानसभा चुनाव का सपना देखते हुए स्वयं से चोरी छिपे जनसंपर्क की मेहनत करना शुरू किया है। पूर्व में ऊंचे ओहदे पर रहे, लेकिन इन दिनों रसूख के लिए तरस रहे इन नेताओं ने सांसदी चुनाव में विधानसभा चुनाव की गोटियां बिछाना शुरू किया है।
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अपनी बिरादरी के गांवों व कस्बों में चोरी छिपे दस्तक दे रहे हैं। पार्टी चाहे जो हो, लेकिन बड़े नेताओं के कान तक भनक न पड़े इस लिए कुछ लोगों के साथ ही संपर्क कर रहे हैं। जनसभा व मंचों से दूरी बनाकर स्वयं के पत्ते छिपा लिए हैं। मतदाताओं को इन नेताओं का जनसंपर्क गले नहीं उतर रहा है। उनका मानना है कि इन नेताओं ने जिस पार्टी में रसूख पाया और खो भी दिया। अब उस रसूख को पाने के लिए पार्टी की खिलाफत कर रहे हैं।
इसमें चौकाने वाली बात यह है कि खुलकर सामने रहने की हिम्मत तक नहीं पैदा कर पा रहे। चुनावी जानकार इन नेताओं के जनसंपर्क के महत्व को महज खुद की जमीन को तैयार करने को लेकर देख रहे हैं। चुनावी माहौल में कुछ खास असर न पड़ने का अंदेशा भी जता रहे हैं। वहीं इन दिनों बिधूना क्षेत्र के गांवों का चुनावी माहौल इन भितरघाती नेताओं की हंसी ठिठोली कर रहा हैं। बस एक मुहावरे में इन नेताओं को समेटा जा रहा है। ग्रामीण कह रहे हैं कि ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे...।