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Auraiya News: धोखाधड़ी से यूपीडा को बेची जमीन, साढ़े 12 लाख हड़पे
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- 2009 को पहले किसान को बेची जमीन, 14 अक्तूबर 2014 को यूपीडा को भी बेच कर ले लिया मुआवजा
- एसडीएम के आदेश पर लेखपाल ने किसान के खिलाफ दर्ज कराई रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिधूना। किसान ने अपनी करीब पांच बीघा जमीन पहले शर्तिया बैनामा के तहत एक व्यक्ति को बेच दी। पांच साल बाद इसी जमीन को यूपीडा को भी बेच दिया। इसके एवज में करीब साढ़े 12 लाख का मुआवजा भी ले लिया। जमीन की दोहरी बिक्री के मामले में फर्जीवाड़े का पता चलने पर एसडीएम के आदेश पर क्षेत्रीय लेखपाल की तहरीर पर पुलिस ने किसान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। मामला बिधूना तहसील क्षेत्र के हरनागरपुर का है।
दर्ज रिपोर्ट के अनुसार गांव हरनागरपुर निवासी सुखदेवी उर्फ पार्वती के नाम गाटा संख्या 377 में क्षेत्रफल 0.987 हेक्टेयर दर्ज थी। वर्ष 2009 में उसने इस जमीन को दो हिस्सों में अलग-अलग दो लोगों को बेच दिया था। जिसमें 0.486 हेक्टेयर मिथलेश कुमारी व 0.501 (करीब पांच बीघा) हेक्टेयर अतर सिंह के हिस्से में आई थी।
बाद में हरनागरपुर निवासी अतर सिंह ने 19 दिसंबर 2009 को अपनी जमीन कमल सिंह को शर्तिया बैनामा पर दे दिया, लेकिन नामांतरण की प्रक्रिया नहीं कराई। कागजों में जमीन अभी तक सुखदेवी के नाम चढ़ी है। इधर साल 2014 में यूपीडा ने यहां जमीन का अधिग्रहण शुरू किया तो गांव के अतर सिंह ने धोखाधड़ी कर पहले बिक्री की जा चुकी जमीन को फिर से यूपीडा के नाम 14 अक्तूबर 2014 को जमीन बैनामा का बैनामा कर दिया।
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एक ही जमीन को दो बार बेचकर न अतर सिंह ने न केवल कमल सिंह बल्कि यूपीडा से भी धोखाधड़ी की। मामला संज्ञान में आने के बाद राजस्व विभाग ने जांच बैठाई तो जमीन का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जिस पर एसडीएम ने लेखपाल को अतर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए। जिसके बाद एरवाकटरा थाने में उमरैन के लेखपाल प्रमोद कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
मुआवजे की धनराशि आरोपी से वसूली जाएगी-एसडीएम
एसडीएम बिधूना गरिमा सोनकिया ने बताया कि एक ही व्यक्ति ने शर्तिया बैनामा के तहत साल 2009 में दूसरे को अपनी जमीन बेची थी। दाखिल खारिज होता इससे पहले ही उसने यह जमीन यूपीडा को भी बेच दी। करीब पांच बीघा जमीन का यह मामला है। जमीन अधिग्रहण के जरिए करोड़ों का मुआवजा भी ले लिया है। रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही अब तहसील प्रशासन यूपीडा से लिए गए मुआवजे की धनराशि को आरोपी से वसूलेगा।
पांच साल तक जमीन के कागजों में नहीं चढ़े नाम
हरनागरपुर में एक ही जमीन को दो पक्षों को बिक्री किए जाने का मामला काफी कुछ बयां कर रहा है। यहां पर पांच साल बाद तक जमीन को कागजों में मालिक के नाम चढ़ाया ही नहीं गया। इसमें विक्रेता का नाम ही चढ़ा रहा। खास बात तो यह है कि दर्ज रिपोर्ट के अनुसार अभी भी पुराना नाम खतौनी में चढ़ा हुआ है। इसके बावजूद जमीन यूपीडा को बिक्री कर दी गई। पांच साल के अंतराल के बावजूद खतौनी में मालिकों के नाम नहीं चढ़ पाए। ये लंबा अंतराल ही इस फर्जीवाड़े की वजह बन गया।
पहले तहसील फिर यूपीडा ने जारी किए थे नोटिस
हरनागरपुर से निकले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए साल 2014 में जमीन अधिग्रहण हुआ था। साल 2017 में जमीन फर्जीवाड़े का यह मामला पहली बार प्रकाश में आया था। इस पर पहले तहसील स्तर से नोटिस जारी किया गया था। यूपीडा ने भी आरोपी अतर सिंह को नोटिस दिया था। लेकिन जवाब देने से अतर सिंह ने किनारा कर लिया था। जमीन अधिग्रहण के शुरुआती दौर में हरनागरपुर में कई किसानों की जमीन यूपीडा के नाम अधिग्रहित कराई गई थी। इस कड़ी में अतर सिंह ने भी अपनी जमीन का बैनामा कर दिया था। तहसील के बाद यूपीडा के कार्यकारी अधिकारी अवनीश अवस्थी ने 29 सितंबर 2020 को भी अतर सिंह को नोटिस भेजा गया था। फर्जीवाड़े को लेकर मुआवजे की रकम वापस करने की चेतावनी दी गई थी। सरकारी मशीनरी के संज्ञान में आया मामला शनिवार को रिपोर्ट में बदला। जब क्षेत्रीय लेखपाल प्रमोद कुमार ने एरवाकटरा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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- एसडीएम के आदेश पर लेखपाल ने किसान के खिलाफ दर्ज कराई रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिधूना। किसान ने अपनी करीब पांच बीघा जमीन पहले शर्तिया बैनामा के तहत एक व्यक्ति को बेच दी। पांच साल बाद इसी जमीन को यूपीडा को भी बेच दिया। इसके एवज में करीब साढ़े 12 लाख का मुआवजा भी ले लिया। जमीन की दोहरी बिक्री के मामले में फर्जीवाड़े का पता चलने पर एसडीएम के आदेश पर क्षेत्रीय लेखपाल की तहरीर पर पुलिस ने किसान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। मामला बिधूना तहसील क्षेत्र के हरनागरपुर का है।
दर्ज रिपोर्ट के अनुसार गांव हरनागरपुर निवासी सुखदेवी उर्फ पार्वती के नाम गाटा संख्या 377 में क्षेत्रफल 0.987 हेक्टेयर दर्ज थी। वर्ष 2009 में उसने इस जमीन को दो हिस्सों में अलग-अलग दो लोगों को बेच दिया था। जिसमें 0.486 हेक्टेयर मिथलेश कुमारी व 0.501 (करीब पांच बीघा) हेक्टेयर अतर सिंह के हिस्से में आई थी।
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बाद में हरनागरपुर निवासी अतर सिंह ने 19 दिसंबर 2009 को अपनी जमीन कमल सिंह को शर्तिया बैनामा पर दे दिया, लेकिन नामांतरण की प्रक्रिया नहीं कराई। कागजों में जमीन अभी तक सुखदेवी के नाम चढ़ी है। इधर साल 2014 में यूपीडा ने यहां जमीन का अधिग्रहण शुरू किया तो गांव के अतर सिंह ने धोखाधड़ी कर पहले बिक्री की जा चुकी जमीन को फिर से यूपीडा के नाम 14 अक्तूबर 2014 को जमीन बैनामा का बैनामा कर दिया।
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एक ही जमीन को दो बार बेचकर न अतर सिंह ने न केवल कमल सिंह बल्कि यूपीडा से भी धोखाधड़ी की। मामला संज्ञान में आने के बाद राजस्व विभाग ने जांच बैठाई तो जमीन का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जिस पर एसडीएम ने लेखपाल को अतर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए। जिसके बाद एरवाकटरा थाने में उमरैन के लेखपाल प्रमोद कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
मुआवजे की धनराशि आरोपी से वसूली जाएगी-एसडीएम
एसडीएम बिधूना गरिमा सोनकिया ने बताया कि एक ही व्यक्ति ने शर्तिया बैनामा के तहत साल 2009 में दूसरे को अपनी जमीन बेची थी। दाखिल खारिज होता इससे पहले ही उसने यह जमीन यूपीडा को भी बेच दी। करीब पांच बीघा जमीन का यह मामला है। जमीन अधिग्रहण के जरिए करोड़ों का मुआवजा भी ले लिया है। रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही अब तहसील प्रशासन यूपीडा से लिए गए मुआवजे की धनराशि को आरोपी से वसूलेगा।
पांच साल तक जमीन के कागजों में नहीं चढ़े नाम
हरनागरपुर में एक ही जमीन को दो पक्षों को बिक्री किए जाने का मामला काफी कुछ बयां कर रहा है। यहां पर पांच साल बाद तक जमीन को कागजों में मालिक के नाम चढ़ाया ही नहीं गया। इसमें विक्रेता का नाम ही चढ़ा रहा। खास बात तो यह है कि दर्ज रिपोर्ट के अनुसार अभी भी पुराना नाम खतौनी में चढ़ा हुआ है। इसके बावजूद जमीन यूपीडा को बिक्री कर दी गई। पांच साल के अंतराल के बावजूद खतौनी में मालिकों के नाम नहीं चढ़ पाए। ये लंबा अंतराल ही इस फर्जीवाड़े की वजह बन गया।
पहले तहसील फिर यूपीडा ने जारी किए थे नोटिस
हरनागरपुर से निकले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए साल 2014 में जमीन अधिग्रहण हुआ था। साल 2017 में जमीन फर्जीवाड़े का यह मामला पहली बार प्रकाश में आया था। इस पर पहले तहसील स्तर से नोटिस जारी किया गया था। यूपीडा ने भी आरोपी अतर सिंह को नोटिस दिया था। लेकिन जवाब देने से अतर सिंह ने किनारा कर लिया था। जमीन अधिग्रहण के शुरुआती दौर में हरनागरपुर में कई किसानों की जमीन यूपीडा के नाम अधिग्रहित कराई गई थी। इस कड़ी में अतर सिंह ने भी अपनी जमीन का बैनामा कर दिया था। तहसील के बाद यूपीडा के कार्यकारी अधिकारी अवनीश अवस्थी ने 29 सितंबर 2020 को भी अतर सिंह को नोटिस भेजा गया था। फर्जीवाड़े को लेकर मुआवजे की रकम वापस करने की चेतावनी दी गई थी। सरकारी मशीनरी के संज्ञान में आया मामला शनिवार को रिपोर्ट में बदला। जब क्षेत्रीय लेखपाल प्रमोद कुमार ने एरवाकटरा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई।