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Auraiya News: गर्मी व सिंचाई के अभाव में जहरीली हो रही ज्वार की फसल
Sat, 14 Jun 2025 11:59 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 14 Jun 2025 11:59 PM IST
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खेत में बोई चरी की फसल।
अजीतमल। हरा चारा पशुओं के लिए वरदान है, लेकिन मौजूदा समय में भीषण गर्मी व सिंचाई के अभाव में वह जहरीला हो रहा है। गर्मी के कारण ज्वार की फसल में हाइड्रोसायनिक एसिड की मात्रा बढ़ने से यह पशुओं के लिए जानलेवा हो सकता है।
ज्वार की फसल को ग्रामीण भाषा में चरी कहा जाता है। अधिकांश पशुपालक अपने पशुओं को यही चारा खिलाते हैं। वहीं, अधिक गर्मी और पानी न मिलने पर यही ज्वार की फसल जब एक से डेढ़ फीट की हो जाती है तो इसके ऊपरी भाग में जहर का असर हो जाता है। इसे खाने से पशु की मौत भी हो सकती है।
किसान रामप्रकाश ने बताया कि इस मौसम में पशुओं का चराना बहुत ही कठिन होता है। अगर पशु चरी खा लेता है तो खतरा हो सकता है। संतोष तिवारी ने बताया कि अधिक गर्मी पड़ने पर पशुओं को चरी खाने से खतरा होता है।
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जनता महाविद्यालय के पशुपालन एवं दुग्ध विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेश भदौरिया ने बताया कि ज्वार की फसल को पानी न मिलने पर फसल एक से डेढ़ फीट की होने तक ऊपरी भाग में हाइड्रोसायनिक बन जाता है। जो जहर का कार्य करता है ।
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ज्वार की फसल को ग्रामीण भाषा में चरी कहा जाता है। अधिकांश पशुपालक अपने पशुओं को यही चारा खिलाते हैं। वहीं, अधिक गर्मी और पानी न मिलने पर यही ज्वार की फसल जब एक से डेढ़ फीट की हो जाती है तो इसके ऊपरी भाग में जहर का असर हो जाता है। इसे खाने से पशु की मौत भी हो सकती है।
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किसान रामप्रकाश ने बताया कि इस मौसम में पशुओं का चराना बहुत ही कठिन होता है। अगर पशु चरी खा लेता है तो खतरा हो सकता है। संतोष तिवारी ने बताया कि अधिक गर्मी पड़ने पर पशुओं को चरी खाने से खतरा होता है।
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जनता महाविद्यालय के पशुपालन एवं दुग्ध विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेश भदौरिया ने बताया कि ज्वार की फसल को पानी न मिलने पर फसल एक से डेढ़ फीट की होने तक ऊपरी भाग में हाइड्रोसायनिक बन जाता है। जो जहर का कार्य करता है ।