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Auraiya News: कान में कीड़ा नहीं, नसों की कमजोरी से होती सनसनाहट
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औरैया। गली-मोहल्लों और गांवों में कान की सफाई करने वाले लोग कान में कीड़ा होने का भ्रम फैला रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में मरीजों की काउंसिलिंग के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं। मरीज कान में सनसनाहट या कुछ रेंगने जैसा महसूस होने पर इन सफाई वालों के पास पहुंचते हैं। उन्हें बताया जाता है कि उनके कान से कीड़ा निकला है। जबकि मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान कान का पर्दा सामान्य पाया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, कई मामलों में इसका कारण कान की नसों की कमजोरी होती है। टिनाइटस के लक्षण भी ऐसी समस्याओं की वजह हो सकते हैं।
ईएनटी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक अमित कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब 150 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें से 30 से 40 मरीज कान में रेंगने या सनसनाहट की शिकायत लेकर आते हैं। काउंसिलिंग में कई मरीज बताते हैं कि गांव में उन्हें कान से कीड़ा निकलने की बात कही गई थी। जांच करने पर उनका कान का पर्दा स्पष्ट और सामान्य मिलता है। ऐसे मरीजों को लक्षणों के आधार पर उपचार और उचित काउंसिलिंग दी जा रही है।
कंचौसी क्षेत्र के अहमद ने बताया कि तीन दिन पहले कान साफ कराया तो कीड़ा निकलने की बात कही गई। मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद डॉक्टरों ने कान की नस से जुड़ी समस्या बताई। डॉक्टर से सही से इलाज कराने के लिए कहा है।
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निकला औरैया के बुमरीपुर निवासी संतोष सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव में दो बार कान साफ कराया। दोनों बार उन्हें कान से कीड़ा निकलने की बात बताई गई। मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद कान के अंदर नस से जुड़ी कमजोरी सामने आई। डॉक्टर ने दवा देकर सात दिन बाद दोबारा जांच के लिए बुलाया है।
बहरेपन की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीपीसीडी) के तहत 27 सितंबर तक जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में डॉ. अमित कुमार ने 20 मरीजों की जांच की। मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार उपचार और जरूरी सलाह दी गई।
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ईएनटी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक अमित कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब 150 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें से 30 से 40 मरीज कान में रेंगने या सनसनाहट की शिकायत लेकर आते हैं। काउंसिलिंग में कई मरीज बताते हैं कि गांव में उन्हें कान से कीड़ा निकलने की बात कही गई थी। जांच करने पर उनका कान का पर्दा स्पष्ट और सामान्य मिलता है। ऐसे मरीजों को लक्षणों के आधार पर उपचार और उचित काउंसिलिंग दी जा रही है।
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कंचौसी क्षेत्र के अहमद ने बताया कि तीन दिन पहले कान साफ कराया तो कीड़ा निकलने की बात कही गई। मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद डॉक्टरों ने कान की नस से जुड़ी समस्या बताई। डॉक्टर से सही से इलाज कराने के लिए कहा है।
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निकला औरैया के बुमरीपुर निवासी संतोष सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव में दो बार कान साफ कराया। दोनों बार उन्हें कान से कीड़ा निकलने की बात बताई गई। मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद कान के अंदर नस से जुड़ी कमजोरी सामने आई। डॉक्टर ने दवा देकर सात दिन बाद दोबारा जांच के लिए बुलाया है।
बहरेपन की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीपीसीडी) के तहत 27 सितंबर तक जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में डॉ. अमित कुमार ने 20 मरीजों की जांच की। मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार उपचार और जरूरी सलाह दी गई।