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Auraiya News: माइनर में खरपतवार से 25 गांवों में सिंचाई का संकट
Sun, 29 Jun 2025 11:47 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 29 Jun 2025 11:47 PM IST
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खोजाफूल माइनर में उगी घास-फूस व गंदगी।
- फोटो : खोजाफूल माइनर में उगी घास-फूस व गंदगी।
औरैया। शहर के किनारे से निकले खोजाफूल माइनर की सफाई नहीं कराई गई। इसमें खरपतवार जमी है। सफाई के अभाव में करीब 25 गांवों के किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी का संकट खड़ा हो गया है।
इससे धान की फसल बोने के लिए तैयार बैठे किसानों को बाजरा, मक्का व ज्वार की फसल बोने की मजबूरी खड़ी हो गई है। भोगनीपुर निचली गंग नहर से संबद्ध खोजाफूल माइनर दूधियाखेरा से निकली है। इसका दायरा कानपुर देहात के खोजाफूल गांव तक है।
इससे यहां के हजारों किसानों की खेतों के लिए यही माइनर सिंचाई का प्रमुख व अकेला साधन है। पिछले कुछ सालों से शहर की सीमा में होने से लोग इसमें कूड़ा-कचरा फेंकने लगे हैं। इससे दिबियापुर रोड से सुरान पुलिया तक इसमें अक्सर कूड़ा जाम रहता है, लेकिन सिंचाई विभाग ने भी मुंह फेर लिया।
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इसकी सिल्ट सफाई तक नहीं कराई गई। इससे पूरी माइनर में खरपतवार ने कब्जा जमा लिया है। दूधियाखेरा से ही कई-कई फुट लंबी झाड़ी व खरपतवार से माइनर पूरी तरह पट गई है। इस कारण से नहर से पानी छोड़े जाने पर आगे नहीं बढ़ पाता है। इससे नहर में पानी आने के बावजूद यह माइनर सूखी पड़ी है।
धौरेरा के संजीव राजपूत, अरविंद, ज्ञानसिंह, जैतापुर के आनंद कुमार, अरविंद, भाऊपुर के आयुष, पुरवारहट के लज्जाराम ने बताया कि करीब 10 साल से खोजाफूल माइनर में आखिर तक पानी नहीं पहुंचा।
जगह-जगह गंदगी, कूड़े के ढेर व सिल्ट जमा होने से पानी की बूंद तक नहीं आती है। इससे सैकड़ों बीघा खेतों में पानी का संकट है। कई बार अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन इस माइनर की सफाई नहीं हुई।
इन गांवों के किसान करते सिंचाई
दूधिया खेरा, नरोत्तमपुर, सुरान, राहतपुर, जैतापुर, धौरेरा, भड़ारीपुर, गाजीपुर, भैरोंपुर, भाऊपुर, नंदगांव, पुरवारहट, बंजारनडेरा, सहनीपुर, तुतुवापुर, खोजाफूल आदि।
नहर में कुलावा और नलकूपों का सहारा
सालों से माइनर में पर्याप्त पानी न आने से सिंचाई के लिए परेशान किसान संकट में हैं। ऐसे में आजीविका चलाने के लिए किसानों ने कुछ स्थानों पर नहर में कुलावे बना लिए हैं। इन कुलावों से नहर का पानी माइनर के जरिए नालियों से होकर खेत तक ले जाते हैं।
इससे पहले खेत की सिंचाई करने को लेकर अक्सर आपसी विवाद भी खड़े हो जाते हैं। कई बार तो मारपीट की नौबत आ जाती है। इसके अलावा कुछ संपन्न किसानों ने नलकूप भी लगवा रखे हैं। इससे वह अपनी सिंचाई के साथ भाड़ा लेकर दूसरे किसानों को भी पानी बेचते हैं।
खोजाफूल माइनर की सफाई क्यों नहीं हुई। इसकी जानकारी नहीं है। मेरे पास इस प्रखंड की जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन वह संबंधित विभागीय लोगों को इसकी जानकारी लेकर समस्या खत्म कराने का प्रयास करेंगे। -उमेश गुप्ता, जेई सिंचाई विभाग।
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इससे धान की फसल बोने के लिए तैयार बैठे किसानों को बाजरा, मक्का व ज्वार की फसल बोने की मजबूरी खड़ी हो गई है। भोगनीपुर निचली गंग नहर से संबद्ध खोजाफूल माइनर दूधियाखेरा से निकली है। इसका दायरा कानपुर देहात के खोजाफूल गांव तक है।
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इससे यहां के हजारों किसानों की खेतों के लिए यही माइनर सिंचाई का प्रमुख व अकेला साधन है। पिछले कुछ सालों से शहर की सीमा में होने से लोग इसमें कूड़ा-कचरा फेंकने लगे हैं। इससे दिबियापुर रोड से सुरान पुलिया तक इसमें अक्सर कूड़ा जाम रहता है, लेकिन सिंचाई विभाग ने भी मुंह फेर लिया।
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इसकी सिल्ट सफाई तक नहीं कराई गई। इससे पूरी माइनर में खरपतवार ने कब्जा जमा लिया है। दूधियाखेरा से ही कई-कई फुट लंबी झाड़ी व खरपतवार से माइनर पूरी तरह पट गई है। इस कारण से नहर से पानी छोड़े जाने पर आगे नहीं बढ़ पाता है। इससे नहर में पानी आने के बावजूद यह माइनर सूखी पड़ी है।
धौरेरा के संजीव राजपूत, अरविंद, ज्ञानसिंह, जैतापुर के आनंद कुमार, अरविंद, भाऊपुर के आयुष, पुरवारहट के लज्जाराम ने बताया कि करीब 10 साल से खोजाफूल माइनर में आखिर तक पानी नहीं पहुंचा।
जगह-जगह गंदगी, कूड़े के ढेर व सिल्ट जमा होने से पानी की बूंद तक नहीं आती है। इससे सैकड़ों बीघा खेतों में पानी का संकट है। कई बार अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन इस माइनर की सफाई नहीं हुई।
इन गांवों के किसान करते सिंचाई
दूधिया खेरा, नरोत्तमपुर, सुरान, राहतपुर, जैतापुर, धौरेरा, भड़ारीपुर, गाजीपुर, भैरोंपुर, भाऊपुर, नंदगांव, पुरवारहट, बंजारनडेरा, सहनीपुर, तुतुवापुर, खोजाफूल आदि।
नहर में कुलावा और नलकूपों का सहारा
सालों से माइनर में पर्याप्त पानी न आने से सिंचाई के लिए परेशान किसान संकट में हैं। ऐसे में आजीविका चलाने के लिए किसानों ने कुछ स्थानों पर नहर में कुलावे बना लिए हैं। इन कुलावों से नहर का पानी माइनर के जरिए नालियों से होकर खेत तक ले जाते हैं।
इससे पहले खेत की सिंचाई करने को लेकर अक्सर आपसी विवाद भी खड़े हो जाते हैं। कई बार तो मारपीट की नौबत आ जाती है। इसके अलावा कुछ संपन्न किसानों ने नलकूप भी लगवा रखे हैं। इससे वह अपनी सिंचाई के साथ भाड़ा लेकर दूसरे किसानों को भी पानी बेचते हैं।
खोजाफूल माइनर की सफाई क्यों नहीं हुई। इसकी जानकारी नहीं है। मेरे पास इस प्रखंड की जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन वह संबंधित विभागीय लोगों को इसकी जानकारी लेकर समस्या खत्म कराने का प्रयास करेंगे। -उमेश गुप्ता, जेई सिंचाई विभाग।