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Auraiya News: शिशु दुग्धपान कक्ष बनाए, लेकिन बंद पड़े
Sun, 03 Aug 2025 12:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 03 Aug 2025 12:04 AM IST
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सदर तहसील में स्तनपान कक्ष में लगी कुंडी।
- फोटो : अधिवेशन में रवाना होने से पहले जानकारी देते व्यापार मंडल के सदस्य।
औरैया। सरकारी दफ्तरों व सार्वजनिक स्थलों पर बच्चों को दुग्धपान कराने के लिए अलग कक्ष बनाने के आदेश हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दफ्तरों के बाहर परिसर में केबिन तो बनाए गए, लेकिन यह कक्ष खोले नहीं गए।
शनिवार को पड़ताल में यह बात सामने आई। स्थिति यह है कि इन कक्षों में बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं है। जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर रोजाना जनसुनवाई में काफी फरियादी पहुंचते हैं। इसमें महिलाओं की भी अच्छी खासी संख्या पहुंचती है। यहां पर स्तनपान कक्ष की कुंडी लगी रहती है। पूछने पर कुछ लोगों ने बताया कि स्तनपान कक्ष की कुंडी ही नहीं खुलती है। ये महज शोपीस है।
सदर तहसील में भी रोज कई फरियादी पहुंचते हैं। यहां भी स्तनपान कक्ष बना है, लेकिन यहां भी कुर्सी तक नहीं है। वहीं, जिला अस्पताल में फैंसी कुर्सी डालकर स्तनपान कक्ष को बंद ही कर दिया गया है। यहां पर कक्ष होने के बाद भी महिलाओं को अपने बच्चों को बाहर बैठकर दूध पिलाना पड़ रहा है।
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सीएमओ डॉ. सुरेंद्र कुमार का कहना है कि स्तनपान कक्ष की सुविधा को लेकर सभी को संवेदनशील रहना चाहिए। इसमें किसी तरह की अनदेखी न हो इसे लेकर सजग किया जा रहा है।
सार्वजनिक स्थल व कार्यालयों में होने चाहिए मातृत्व कक्ष
मातृ स्पर्श नाम की संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नवजात को स्तनपान कराने के लिए अलग से कमरा बनाने की मांग की थी। इसका संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सार्वजनिक स्थल व सरकारी कार्यालयों में यह कक्ष बनाने के लिए नोटिस जारी की थी। सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नवजात बच्चों को दुग्धपान कराने को मातृत्व कक्ष बनाने के निर्देश दिए थे। ताकि माता को किसी भी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े।
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शनिवार को पड़ताल में यह बात सामने आई। स्थिति यह है कि इन कक्षों में बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं है। जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर रोजाना जनसुनवाई में काफी फरियादी पहुंचते हैं। इसमें महिलाओं की भी अच्छी खासी संख्या पहुंचती है। यहां पर स्तनपान कक्ष की कुंडी लगी रहती है। पूछने पर कुछ लोगों ने बताया कि स्तनपान कक्ष की कुंडी ही नहीं खुलती है। ये महज शोपीस है।
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सदर तहसील में भी रोज कई फरियादी पहुंचते हैं। यहां भी स्तनपान कक्ष बना है, लेकिन यहां भी कुर्सी तक नहीं है। वहीं, जिला अस्पताल में फैंसी कुर्सी डालकर स्तनपान कक्ष को बंद ही कर दिया गया है। यहां पर कक्ष होने के बाद भी महिलाओं को अपने बच्चों को बाहर बैठकर दूध पिलाना पड़ रहा है।
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सीएमओ डॉ. सुरेंद्र कुमार का कहना है कि स्तनपान कक्ष की सुविधा को लेकर सभी को संवेदनशील रहना चाहिए। इसमें किसी तरह की अनदेखी न हो इसे लेकर सजग किया जा रहा है।
सार्वजनिक स्थल व कार्यालयों में होने चाहिए मातृत्व कक्ष
मातृ स्पर्श नाम की संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नवजात को स्तनपान कराने के लिए अलग से कमरा बनाने की मांग की थी। इसका संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सार्वजनिक स्थल व सरकारी कार्यालयों में यह कक्ष बनाने के लिए नोटिस जारी की थी। सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नवजात बच्चों को दुग्धपान कराने को मातृत्व कक्ष बनाने के निर्देश दिए थे। ताकि माता को किसी भी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े।