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Auraiya News: भारतीय नारियों में रहती है त्याग व संघर्ष की भावना
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संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। शहर के गोपाल वाटिका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य मनोज अवस्थी ने भक्ति ज्ञान व वैराग्य की कथा सुनाई। उन्होंने द्रौपदी के चरित्र का वर्णन करते हुए भारतीय नारियों की विशेषताएं बताईं। साथ ही बच्चों को अच्छे आचरण सिखाने पर भी जोर दिया।
आचार्य ने दुर्योधन के मृत्यु की कथा सुनाते हुए कहा कि दुर्योधन भी जब मरा तब उसे परिवार की ही याद आई। कहा कि खून के रिश्तों में कितनी भी दूरियां आ जाए पर वो कभी अलग नहीं किए जा सकते। दूसरी तरफ अश्वत्थामा के द्वारा द्रौपदी के पांच बच्चों की हत्या कर दी गई फिर भी द्रौपदी ने अश्वत्थामा को क्षमा कर दिया। क्यों कि भारत नारी सदा से ही त्याग और संघर्ष की पराकाष्ठा रही है।
माता को कभी अपने बच्चों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। यदि बालक कुछ गलत करता है तो इसकी सूचना तुरंत पिता को देनी चाहिए और बालक को रोकना चाहिए। अगर माता-पिता बच्चों को संस्कार नहीं देंगे तो वह भी बड़े होकर दुर्योधन बन जाएगा। दुर्योधन के पिता धृतराष्ट्र व माता गांधारी ने उसे बढ़ावा दिया तो इसके परिणाम स्वरूप भारत में महाभारत हो गया।
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इस मौके पर कथा के आयोजक मोहन लाल गुप्ता, नितिन गुप्ता, रमन पोरवाल आदि मौजूद रहे।
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औरैया। शहर के गोपाल वाटिका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य मनोज अवस्थी ने भक्ति ज्ञान व वैराग्य की कथा सुनाई। उन्होंने द्रौपदी के चरित्र का वर्णन करते हुए भारतीय नारियों की विशेषताएं बताईं। साथ ही बच्चों को अच्छे आचरण सिखाने पर भी जोर दिया।
आचार्य ने दुर्योधन के मृत्यु की कथा सुनाते हुए कहा कि दुर्योधन भी जब मरा तब उसे परिवार की ही याद आई। कहा कि खून के रिश्तों में कितनी भी दूरियां आ जाए पर वो कभी अलग नहीं किए जा सकते। दूसरी तरफ अश्वत्थामा के द्वारा द्रौपदी के पांच बच्चों की हत्या कर दी गई फिर भी द्रौपदी ने अश्वत्थामा को क्षमा कर दिया। क्यों कि भारत नारी सदा से ही त्याग और संघर्ष की पराकाष्ठा रही है।
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माता को कभी अपने बच्चों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। यदि बालक कुछ गलत करता है तो इसकी सूचना तुरंत पिता को देनी चाहिए और बालक को रोकना चाहिए। अगर माता-पिता बच्चों को संस्कार नहीं देंगे तो वह भी बड़े होकर दुर्योधन बन जाएगा। दुर्योधन के पिता धृतराष्ट्र व माता गांधारी ने उसे बढ़ावा दिया तो इसके परिणाम स्वरूप भारत में महाभारत हो गया।
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इस मौके पर कथा के आयोजक मोहन लाल गुप्ता, नितिन गुप्ता, रमन पोरवाल आदि मौजूद रहे।