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छह सालों में सबसे अधिक गर्म रही 21 फरवरी
अमर उजाला ब्यूरो औरैया।
Updated Tue, 21 Feb 2017 11:24 PM IST
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तेज धूप से खुद को बचाती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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होली से पहले गर्मी का खासा असर देखने को मिल रहा है। दिन की तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो पिछले छह सालों में 21 फरवरी का दिन सबसे अधिक गर्म रहा। न्यूनतम और अधिकतम दोनों तापमानों में तेजी देखने को मिली। अगले दो दिनों में तापमान में और बढ़ोत्तरी के आसार हैं। यह तापमान फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार छह सालों में 21 फरवरी को सबसे अधिक तापमान रिकार्ड किया गया। अधिकतम तापमान 30.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस रहा। हवाओं की गति चार से पांच किलो मीटर प्रति घंटा रिकार्ड की गई।
अधिक तापमान से लोगों को दिन में परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कों पर धूप से बचने के लिए युवतियों ने दुपट्टे का सहारा लिया। लोगों का कहना है कि अभी से मार्च व अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो बढ़ता तापमान फसलों के लिए हानिकारक है। किसानों ने फसलों की देखभाल में लापरवाही बरती तो नुकसान उठाना पड़ेगा।
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फसलों कोे होगा नुकसान
कृषि विशेषज्ञ डा. संदीप ने बताया कि तापमान में तेजी से फसलों की परिपक्वता अवधि घटती है। इससे फसलों में उत्पादन गिरेगा। भूसा और दाना भी कम होगा। बीज में भी 10 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आएगी। किसान दाने को देखते हुए फसल की सिंचाई करें। गेहूं और जौ को अधिक तापमान में नुकसान से बचाने के लिए 30 किलो यूरिया का प्रति हेक्टेयर में प्रयोग करें। इससे राहत मिल सकती है।
वर्ष 21 फरवरी (अधिकतम) 21 फरवरी (न्यूनतम)
2010 26.4 12.0
2011 24.0 12.3
2012 29.8 8.6
2013 24.6 10.8
2014 22.2 9.0
2015 29.2 15.0
2016 26.2 17.6
2017 30.1 19.6
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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार छह सालों में 21 फरवरी को सबसे अधिक तापमान रिकार्ड किया गया। अधिकतम तापमान 30.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस रहा। हवाओं की गति चार से पांच किलो मीटर प्रति घंटा रिकार्ड की गई।
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अधिक तापमान से लोगों को दिन में परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कों पर धूप से बचने के लिए युवतियों ने दुपट्टे का सहारा लिया। लोगों का कहना है कि अभी से मार्च व अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो बढ़ता तापमान फसलों के लिए हानिकारक है। किसानों ने फसलों की देखभाल में लापरवाही बरती तो नुकसान उठाना पड़ेगा।
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फसलों कोे होगा नुकसान
कृषि विशेषज्ञ डा. संदीप ने बताया कि तापमान में तेजी से फसलों की परिपक्वता अवधि घटती है। इससे फसलों में उत्पादन गिरेगा। भूसा और दाना भी कम होगा। बीज में भी 10 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आएगी। किसान दाने को देखते हुए फसल की सिंचाई करें। गेहूं और जौ को अधिक तापमान में नुकसान से बचाने के लिए 30 किलो यूरिया का प्रति हेक्टेयर में प्रयोग करें। इससे राहत मिल सकती है।
वर्ष 21 फरवरी (अधिकतम) 21 फरवरी (न्यूनतम)
2010 26.4 12.0
2011 24.0 12.3
2012 29.8 8.6
2013 24.6 10.8
2014 22.2 9.0
2015 29.2 15.0
2016 26.2 17.6
2017 30.1 19.6