{"_id":"6adfa282e42e62fde9044ab6","slug":"husbands-plea-for-access-to-wifes-mobile-phone-rejected-auraiya-news-c-211-1-aur1009-153839-2026-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: पत्नी का मोबाइल देने की पति की अर्जी खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: पत्नी का मोबाइल देने की पति की अर्जी खारिज
विज्ञापन
औरैया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मृतका ज्योति के पति प्रभात सिंह उर्फ गोपाल की अर्जी खारिज कर दी। इस अर्जी में मोबाइल फोन और सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर रिलीज करने की मांग की गई थी।
अदालत ने मोबाइल में मौजूद डेटा से छेड़छाड़ या उसे नष्ट किए जाने की आशंका जताई है। यह मामला थाना औरैया में राज्य बनाम प्रभात सिंह उर्फ गोपाल एवं अन्य के तहत चल रहा है। आरोपी पति ने दावा किया था कि मोबाइल में घटना से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग और कॉल डिटेल मौजूद हैं। मृतका के पिता ने बताया कि उन्होंने सात अगस्त 2019 को 27,999 रुपये में मोबाइल खरीदकर बेटी को दिया था। उन्होंने खरीद की रसीद और डिब्बे की छायाप्रतियां भी अदालत में पेश की थीं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची। अदालत ने माना कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल मृतका ज्योति करती थी। मोबाइल में मौजूद डेटा मामले के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। डेटा से किसी भी तरह की छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए। अदालत ने इसे आरोपी को सौंपना उचित नहीं समझा।
विज्ञापन
इससे पहले, 14 दिसंबर 2023 को निचली अदालत ने मोबाइल पति को देने का आदेश दिया था। इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2024 को निचली अदालत के आदेश को रद कर दिया। उच्च न्यायालय ने पाया कि आदेश दोनों पक्षों को सुने बिना पारित किया गया था। इसके बाद, मामले की नए सिरे से सुनवाई के निर्देश जारी किए गए थे।
विज्ञापन
अदालत ने मोबाइल में मौजूद डेटा से छेड़छाड़ या उसे नष्ट किए जाने की आशंका जताई है। यह मामला थाना औरैया में राज्य बनाम प्रभात सिंह उर्फ गोपाल एवं अन्य के तहत चल रहा है। आरोपी पति ने दावा किया था कि मोबाइल में घटना से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग और कॉल डिटेल मौजूद हैं। मृतका के पिता ने बताया कि उन्होंने सात अगस्त 2019 को 27,999 रुपये में मोबाइल खरीदकर बेटी को दिया था। उन्होंने खरीद की रसीद और डिब्बे की छायाप्रतियां भी अदालत में पेश की थीं।
विज्ञापन
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची। अदालत ने माना कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल मृतका ज्योति करती थी। मोबाइल में मौजूद डेटा मामले के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। डेटा से किसी भी तरह की छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए। अदालत ने इसे आरोपी को सौंपना उचित नहीं समझा।
विज्ञापन
इससे पहले, 14 दिसंबर 2023 को निचली अदालत ने मोबाइल पति को देने का आदेश दिया था। इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2024 को निचली अदालत के आदेश को रद कर दिया। उच्च न्यायालय ने पाया कि आदेश दोनों पक्षों को सुने बिना पारित किया गया था। इसके बाद, मामले की नए सिरे से सुनवाई के निर्देश जारी किए गए थे।