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कैसे होगी खाद की व्यवस्था
औरैया
Updated Wed, 23 Nov 2016 11:16 PM IST
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सहकारी समिति पर उपलब्ध खाद की बोरियां दिखाता कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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समय सुबह 10 बजे। स्थान: साधन सहकारी समिति लिमिटेड खानपुर गोहना। यहां किसान खाद की खरीदारी के लिए आए हैं। किसानों के पास पुराने पांच सौ और हजार के नोट हैं। केंद्र संचालक इन नोटाें से खाद देने के लिए तैयार नहीं हैं। वह नए नोट मांग रहे हैं। इसी केंद्र पर बीज भी मिलता है। सहकारी केंद्रों पर बीज भी देने से मना किया गया। केंद्र पर जैतपुर के बुजुर्ग गंगाराम थके हारे बैठे दिखाई दिए। यह चार दिन से बैरंग लौट रहे हैं। इनके माथे पर सिलवटें थीं तो आंखों में गुस्सा।
साधन सहकारी केंद्र खानपुर गोहना पर खाद लेने पहुंचे सरैया निवासी विजय सिंह भी परेशान दिखे। कई दिन से चक्कर काटने के बाद भी 16.5 बीघा खेत में बुवाई के लिए खाद की व्यवस्था न होने से इनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। इन्हें घंटों लाइन में लगने के बाद बैंक से मात्र दो हजार ही मिल पाए। फसल बुवाई पर संकट से यह खासे परेशान दिखाई दिए।
पिछले साल बरसात की मार से पीड़ित जैतपुर निवासी रामसेवक इस बार अपने खेतों में फसल उगाने में दिलचस्पी लेते नहीं दिखे। इन्होंने दो बीघा जमीन बटाई पर ली है। इसमें खाद के लिए यह केंद्र पर पहुंचे थे। खाद न मिलने से यह मायूस नजर आए।
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पानी की मार से बुरी तरह से आहत केशराम अपनी ही जमीन को साझेदार के साथ मिलकर बटाई पर देने को मजबूर दिखे। इनका कहना था कि नोटबंदी ने हालत खराब कर दी है। पांच सौ व एक हजार के नोटों से साधन सहकारी समिति पर खाद न मिलने से यह हैरान थे।
ग्राम जैतापुर साधन सहकारी समिति पर साइकिल से खाद लेने पहुंचे किसान जय प्रकाश के पास खाद खरीदने के लिए सौ-सौ के नोट नहीं थे। इससे इन्हें भी खाद नहीं मिल पाई। रुपये खुले न होने से इन्हें बैरंग लौटना पड़ा। इनका कहना था कि बैंक नोट नहीं दे रहे हैं।
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साधन सहकारी केंद्र खानपुर गोहना पर खाद लेने पहुंचे सरैया निवासी विजय सिंह भी परेशान दिखे। कई दिन से चक्कर काटने के बाद भी 16.5 बीघा खेत में बुवाई के लिए खाद की व्यवस्था न होने से इनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। इन्हें घंटों लाइन में लगने के बाद बैंक से मात्र दो हजार ही मिल पाए। फसल बुवाई पर संकट से यह खासे परेशान दिखाई दिए।
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पिछले साल बरसात की मार से पीड़ित जैतपुर निवासी रामसेवक इस बार अपने खेतों में फसल उगाने में दिलचस्पी लेते नहीं दिखे। इन्होंने दो बीघा जमीन बटाई पर ली है। इसमें खाद के लिए यह केंद्र पर पहुंचे थे। खाद न मिलने से यह मायूस नजर आए।
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पानी की मार से बुरी तरह से आहत केशराम अपनी ही जमीन को साझेदार के साथ मिलकर बटाई पर देने को मजबूर दिखे। इनका कहना था कि नोटबंदी ने हालत खराब कर दी है। पांच सौ व एक हजार के नोटों से साधन सहकारी समिति पर खाद न मिलने से यह हैरान थे।
ग्राम जैतापुर साधन सहकारी समिति पर साइकिल से खाद लेने पहुंचे किसान जय प्रकाश के पास खाद खरीदने के लिए सौ-सौ के नोट नहीं थे। इससे इन्हें भी खाद नहीं मिल पाई। रुपये खुले न होने से इन्हें बैरंग लौटना पड़ा। इनका कहना था कि बैंक नोट नहीं दे रहे हैं।