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दो बजे से पहले बंद हो जाती 100 शय्या की ओपीडी
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औरैया। जिले में डेंगू और वायरल का प्रकोप है। निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लग रही है। सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों के सुबह आठ बजे पहुंचने और दो बजे तक ओपीडी में रहने के निर्देश है। इसके बावजूद 100 शय्या अस्पताल में डाक्टर व स्टाफ दो बजे से पहले ही नदारद हो रहे हैं। इससे अस्पताल आने वाले ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को भटकना पड़ रहा है।
मंगलवार को 100 शय्या जिला अस्पताल में एक बजकर 50 मिनट पर ही डाक्टरों के कमरे खाली नजर आए। ओपीडी में सिर्फ दो कमरे ही खुले थे। एक में सामान्य चिकित्सक के नाम के साथ आयुष चिकित्सक के बैठने की पट्टिका लगी थी। जबकि एक अन्य डाक्टर का कमरा खुला नजर आया, लेकिन कमरों से डाक्टर नदारद थे। वहीं अधिकांश स्टाफ भी गायब मिला। सीटी स्कैन कक्ष में महिला व एक अन्य कर्मी कुछ मरीजों के सीटी स्कैन करते नजर आए।
ओपीडी में तुर्कीपुर की सावित्री देवी अपने बेटे को तेज बुखार में लेकर अस्पताल आई थीं, लेकिन डाक्टर न होने से वह कुछ देर रुकी और फिर 50 शय्या जाने की बात कह चली गई। इसी तरह रफीक निवासी अजीतमल भी पेट दर्द की शिकायत पर पहुंचे, लेकिन उन्हें भी डाक्टर नहीं मिले। इसी तरह कई और मरीज ऐसे थे जो डाक्टरों के न मिलने पर वापस चले गए। अस्पताल में डाक्टर और स्टाफ कहां मिलेंगे, यह बताने वाला कोई नहीं था।
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ये तो रोज का ढर्रा है
अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी ने बताया कि सुबह देर से आना और जल्दी चले जाने यहां के अधिकारियों व कर्मचारियों का रोज का ढर्रा है। एक बजते ही अस्पताल से लोग जाने लगते है। अस्पताल आने वाले मरीजों के पर्चे भी एक बजे के पहले बनने बंद हो जाते हैं। इस दौरान जो मरीज आते भी हैं, उन्हें इमरजेंसी भेज दिया जाता है।
सभी को दो बजे तक बैठने की सख्त हिदायत दी गई है। वह स्वयं ओपीडी में मरीजों को देखते हैं। पर्चे न बनने की शिकायत थी, जिसे सुधारा गया है। यदि चिकित्सक जल्दी जा रहे हैं तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. कुलदीप कुमार यादव, सीएमएस
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मंगलवार को 100 शय्या जिला अस्पताल में एक बजकर 50 मिनट पर ही डाक्टरों के कमरे खाली नजर आए। ओपीडी में सिर्फ दो कमरे ही खुले थे। एक में सामान्य चिकित्सक के नाम के साथ आयुष चिकित्सक के बैठने की पट्टिका लगी थी। जबकि एक अन्य डाक्टर का कमरा खुला नजर आया, लेकिन कमरों से डाक्टर नदारद थे। वहीं अधिकांश स्टाफ भी गायब मिला। सीटी स्कैन कक्ष में महिला व एक अन्य कर्मी कुछ मरीजों के सीटी स्कैन करते नजर आए।
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ओपीडी में तुर्कीपुर की सावित्री देवी अपने बेटे को तेज बुखार में लेकर अस्पताल आई थीं, लेकिन डाक्टर न होने से वह कुछ देर रुकी और फिर 50 शय्या जाने की बात कह चली गई। इसी तरह रफीक निवासी अजीतमल भी पेट दर्द की शिकायत पर पहुंचे, लेकिन उन्हें भी डाक्टर नहीं मिले। इसी तरह कई और मरीज ऐसे थे जो डाक्टरों के न मिलने पर वापस चले गए। अस्पताल में डाक्टर और स्टाफ कहां मिलेंगे, यह बताने वाला कोई नहीं था।
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ये तो रोज का ढर्रा है
अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी ने बताया कि सुबह देर से आना और जल्दी चले जाने यहां के अधिकारियों व कर्मचारियों का रोज का ढर्रा है। एक बजते ही अस्पताल से लोग जाने लगते है। अस्पताल आने वाले मरीजों के पर्चे भी एक बजे के पहले बनने बंद हो जाते हैं। इस दौरान जो मरीज आते भी हैं, उन्हें इमरजेंसी भेज दिया जाता है।
सभी को दो बजे तक बैठने की सख्त हिदायत दी गई है। वह स्वयं ओपीडी में मरीजों को देखते हैं। पर्चे न बनने की शिकायत थी, जिसे सुधारा गया है। यदि चिकित्सक जल्दी जा रहे हैं तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. कुलदीप कुमार यादव, सीएमएस