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ाष्ट्रीय क्षय रोग अन्मूलन कार्यक्रम के तहत हुई बैठक
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औरैया। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर बुधवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके राय की मौजूदगी में बैठक हुई। इस दौरान क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाने की रूपरेखा बनाई गई।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके राय ने बताया कि भारत को क्षय रोग मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर भारत सरकार ने इससे जुड़े कार्यक्रम पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया है।
इस कार्यक्रम के तहत शासन ने निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम व पैथालॉजी द्वारा खोजे गए व उपचारित किए जा रहे टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन किया जाना जरूरी है। नोटिफिकेशन के मामले में निजी अस्पताल, नर्सिग होम व पैथालॉजी द्वारा लापरवाही करने पर उसका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
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बताया कि अब निजी अस्पताल, नर्सिग होम, पैथालॉजी का नवीनीकरण करते समय टीबी मरीजों का नोटीफिकेशन पर भी फोकस किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उपचारित टीबी मरीजों का नोटीफिकेशन न किए जाने पर कार्रवाई होगी। बताया कि प्रत्येक टीबी मरीज के नोटीफिकेशन के लिए रुपया 500 रुपये, उसके उपचार परिणाम की रिपोर्टिंग के लिए 500 रुपये प्रोत्साहन धनराशि भी डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जा रही है। निजी अस्पतालों में इलाज ले रहे क्षय रोगियों को भी नि:क्षय पोषण योजना के तहत इलाज के दौरान 500 रुपये डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.नवीन कुमार ने बताया कि क्षय रोग के लक्षण जिसमें दो सप्ताह से अधिक खासी, वजन कम होना, बुखार आना, थूक के साथ खून आना, भूख न लगना आदि है। इस प्रकार के लक्षण किसी भी व्यक्ति में यदि हो तो उसकी जांच एवं उपचार जनपद के समस्त सरकारी अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध हैं।
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बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके राय ने बताया कि भारत को क्षय रोग मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर भारत सरकार ने इससे जुड़े कार्यक्रम पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया है।
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इस कार्यक्रम के तहत शासन ने निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम व पैथालॉजी द्वारा खोजे गए व उपचारित किए जा रहे टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन किया जाना जरूरी है। नोटिफिकेशन के मामले में निजी अस्पताल, नर्सिग होम व पैथालॉजी द्वारा लापरवाही करने पर उसका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
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बताया कि अब निजी अस्पताल, नर्सिग होम, पैथालॉजी का नवीनीकरण करते समय टीबी मरीजों का नोटीफिकेशन पर भी फोकस किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उपचारित टीबी मरीजों का नोटीफिकेशन न किए जाने पर कार्रवाई होगी। बताया कि प्रत्येक टीबी मरीज के नोटीफिकेशन के लिए रुपया 500 रुपये, उसके उपचार परिणाम की रिपोर्टिंग के लिए 500 रुपये प्रोत्साहन धनराशि भी डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जा रही है। निजी अस्पतालों में इलाज ले रहे क्षय रोगियों को भी नि:क्षय पोषण योजना के तहत इलाज के दौरान 500 रुपये डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.नवीन कुमार ने बताया कि क्षय रोग के लक्षण जिसमें दो सप्ताह से अधिक खासी, वजन कम होना, बुखार आना, थूक के साथ खून आना, भूख न लगना आदि है। इस प्रकार के लक्षण किसी भी व्यक्ति में यदि हो तो उसकी जांच एवं उपचार जनपद के समस्त सरकारी अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध हैं।