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Auraiya News: ट्रैवल एजेंसी और शस्त्र की दुकान से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार
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फोटो-35-कमलकांत वर्मा का पेट्रोल पंप और पीछे बना बहुमंजिला आवास।
- दो दशक में ही बड़े कारोबारियों में शुमार हो गया कमलकांत वर्मा का नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। तीन दशक पहले तक कारोबारी कमलकांत वर्मा का परिवार ट्रेवल एजेंसी पर निर्भर था। इसके बाद शस्त्र लाइसेंस की दुकान शुरू की। ये दोनों ही कारोबार कमलकांत के पिता महेश वर्मा के थे। पिता की मौत के बाद पिछले दो दशक में कमलकांत ने करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया। देखते ही देखते उनका नाम बड़े कारोबारियों और करोड़पतियों में शुमार हो गया।
कमलकांत के पिता शहर में ट्रैवल एजेंसी संचालित करते थे। काफी सालों तक ये काम करने के बाद उन्होंने होमगंज बाजार में एक शस्त्र की दुकान खोली। बस यहीं से परिवार के दिन बदलने शुरू हो गए। महेश वर्मा की मौत के बाद कमलकांत के भाई अजयकांत उर्फ शशि ने सराफा कारोबार शुरू किया।
दूसरी तरफ कमलकांत ने पेट्रोल पंप से लेकर जमीन व अन्य कारोबार शुरू कर दिए। देखते ही देखते पेट्रोल पंप की संख्या बढ़ती गई और कमलकांत की गिनती बड़े धनपतियों में होने लगी। इसके बाद कमलकांत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पैसे के दम पर उसे राजनीति और अफसरशाही दोनों ही जगह से संरक्षण भी मिला। सरकार के अनुसार उसकी गाड़ियों पर लगे झंडे भी बदलते रहे। बृहस्पतिवार को जांच के दौरान उसकी गाड़ियों पर भाजपा के झंडे लगे नजर आए।
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कमलकांत के घर पर न मिलने की रही चर्चा
कार्रवाई के दौरान कारोबारी कमलकांत एनआईए टीम को घर पर नहीं मिला। आसपास के लोगों के अनुसार रात तक वह पेट्रोल पंप पर ही मौजूद था। ऐसे में इस बात की चर्चा रही आखिरकार रातों-रात कमलकांत कहां चला गया। कहीं उसे टीम के आने की भनक तो नहीं लग गई थी।
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- दो दशक में ही बड़े कारोबारियों में शुमार हो गया कमलकांत वर्मा का नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। तीन दशक पहले तक कारोबारी कमलकांत वर्मा का परिवार ट्रेवल एजेंसी पर निर्भर था। इसके बाद शस्त्र लाइसेंस की दुकान शुरू की। ये दोनों ही कारोबार कमलकांत के पिता महेश वर्मा के थे। पिता की मौत के बाद पिछले दो दशक में कमलकांत ने करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया। देखते ही देखते उनका नाम बड़े कारोबारियों और करोड़पतियों में शुमार हो गया।
कमलकांत के पिता शहर में ट्रैवल एजेंसी संचालित करते थे। काफी सालों तक ये काम करने के बाद उन्होंने होमगंज बाजार में एक शस्त्र की दुकान खोली। बस यहीं से परिवार के दिन बदलने शुरू हो गए। महेश वर्मा की मौत के बाद कमलकांत के भाई अजयकांत उर्फ शशि ने सराफा कारोबार शुरू किया।
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दूसरी तरफ कमलकांत ने पेट्रोल पंप से लेकर जमीन व अन्य कारोबार शुरू कर दिए। देखते ही देखते पेट्रोल पंप की संख्या बढ़ती गई और कमलकांत की गिनती बड़े धनपतियों में होने लगी। इसके बाद कमलकांत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पैसे के दम पर उसे राजनीति और अफसरशाही दोनों ही जगह से संरक्षण भी मिला। सरकार के अनुसार उसकी गाड़ियों पर लगे झंडे भी बदलते रहे। बृहस्पतिवार को जांच के दौरान उसकी गाड़ियों पर भाजपा के झंडे लगे नजर आए।
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कमलकांत के घर पर न मिलने की रही चर्चा
कार्रवाई के दौरान कारोबारी कमलकांत एनआईए टीम को घर पर नहीं मिला। आसपास के लोगों के अनुसार रात तक वह पेट्रोल पंप पर ही मौजूद था। ऐसे में इस बात की चर्चा रही आखिरकार रातों-रात कमलकांत कहां चला गया। कहीं उसे टीम के आने की भनक तो नहीं लग गई थी।