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Auraiya News: वन विभाग की फाइलों में हरियाली, जमीन पर नहीं बचा एक भी पौधा
Sat, 06 Jun 2026 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 06 Jun 2026 12:10 AM IST
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फोटो-45 - पुरवा पीताराम में शमशान की जमीन पर खड़ा लोडर। संवाद
- फोटो : बंदरों के झुंड के चलते गिरी महिला का ट्रामा सेंटर में होता उपचार। संवाद
औरैया। दिबियापुर में वन विभाग का जनपद स्तरीय कार्यालय है। उसी के पास विभाग की करीब 20 एकड़ जमीन पिछले दो दशकों से पौधरोपण की प्रयोगशाला बनी हुई है।
हर साल पौधरोपण से वन विभाग की फाइलों में यहां ग्रीन बेल्ट बन गई। हालांकि हर साल लगाए पौधे बरसात में बगल से गुजरे नाले के कारण जलभराव से सड़ गए यह किसी ने नहीं देखा। इसके चलते यहां एक भी पौधा पेड़ नहीं बन सका है। वर्तमान में सूखी जमीन पर धूल उड़ रही है।
हर साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण होता है। हजारों पौधे लगाए जाते हैं लेकिन उनकी सलामती की चिंता किसी को नहीं है। सालों से रोपे जा रहे पौधों से कागजों पर तो हरियाली हुई लेकिन हकीकत में पौधरोपण की जगह पर कहीं कूड़ा पड़ रहा तो कहीं ग्रामीण जमीन का प्रयोग कर रहे हैं।
पौधरोपण की प्रयोगशाला की बात करें तो पिछले दो दशकों में 20 एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण हुआ। हर साल 70-80 पौधे रोपे जाते रहे हैं। विभाग के अनुसार हर साल पौधरोपण से पहले चारों ओर चेन की फेंसिंग कराई गई ताकि मवेशी न घुसें। इसके बावजूद जमीन के पास से गुजरे नाले को साल दर साल नजर अंदाज किया जाता रहा। इसके चलते यहां की स्थिति उजाड़ है।
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जमीन पर जगह-जगह पौधों के ठूंठ पड़े दिखते हैं। हर साल जलभराव वाली जगह पर पौधे क्यों लगाए जाते रहे, यह अनदेखी किस स्तर पर हुई इसका जवाब विभाग के पास नहीं है। हालांकि इस साल विभाग ने इस जमीन पर पौधरोपण नहीं किया है जबकि नाले को ओवरफ्लो होने से रोकने के लिए इसका निर्माण करा दिया गया है।
सीन-1
जहां पौधे रोपे, वहां डाल रहे कूड़ा
शहर के बीच चड्ढा टॉकीज के सामने तालाब किनारे भी यही स्थिति है। तीन साल पहले यहां मियावाकी पद्धति से पौधरोपण हुआ था। इसका उद्देश्य शहर में हरियाली बढ़ाना था। देखरेख के अभाव में यहां हरियाली पनप नहीं सकी। अब इस जगह पर कूड़ा डाला जा रहा है।
सीन-2
हरियाली खत्म, ग्रामीण उपयोग कर रहे जमीन
कुछ ऐसा ही हाल बिधूना क्षेत्र की ग्राम पंचायत पुरवा पीताराम में श्मशान की जमीन पर देखने को मिलता है। इस जमीन को दो साल पहले कब्जामुक्त कराकर तत्कालीन एसडीएम लवनीत कौर के नेतृत्व में पौधे रोपे गए थे। आज यहां पर इस जमीन को ग्रामीण अपने प्रयोग में ले रहे हैं। हरियाली का खत्म हो गई है।
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अबकी 4.69 लाख पौधे रोपे गए
इस पर पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिलेभर में 4.69 लाख पौधे रोपे गए हैं। वन विभाग के 69 हजार, ग्राम विकास विभाग के 2.49 लाख, पंचायतीराज विभाग के 17 हजार, नगर विकास के तीन हजार, कृषि विभाग के 63 हजार, उद्यान विभाग के 41 हजार सहित अन्य विभागों की ओर से पौधे रोपे गए हैं।
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पहले दिन 4.69 लाख पौधों का रोपण किया गया है। इनकी सलामती के लिए विभागों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। पौधरोपण की जियो टैगिंग की गई है। पौधों को पेड़ बनाने का पूरा प्रयास रहेगा।
सीपी सिंह, प्रभागीय वन अधिकारी
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हर साल पौधरोपण से वन विभाग की फाइलों में यहां ग्रीन बेल्ट बन गई। हालांकि हर साल लगाए पौधे बरसात में बगल से गुजरे नाले के कारण जलभराव से सड़ गए यह किसी ने नहीं देखा। इसके चलते यहां एक भी पौधा पेड़ नहीं बन सका है। वर्तमान में सूखी जमीन पर धूल उड़ रही है।
हर साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण होता है। हजारों पौधे लगाए जाते हैं लेकिन उनकी सलामती की चिंता किसी को नहीं है। सालों से रोपे जा रहे पौधों से कागजों पर तो हरियाली हुई लेकिन हकीकत में पौधरोपण की जगह पर कहीं कूड़ा पड़ रहा तो कहीं ग्रामीण जमीन का प्रयोग कर रहे हैं।
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पौधरोपण की प्रयोगशाला की बात करें तो पिछले दो दशकों में 20 एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण हुआ। हर साल 70-80 पौधे रोपे जाते रहे हैं। विभाग के अनुसार हर साल पौधरोपण से पहले चारों ओर चेन की फेंसिंग कराई गई ताकि मवेशी न घुसें। इसके बावजूद जमीन के पास से गुजरे नाले को साल दर साल नजर अंदाज किया जाता रहा। इसके चलते यहां की स्थिति उजाड़ है।
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जमीन पर जगह-जगह पौधों के ठूंठ पड़े दिखते हैं। हर साल जलभराव वाली जगह पर पौधे क्यों लगाए जाते रहे, यह अनदेखी किस स्तर पर हुई इसका जवाब विभाग के पास नहीं है। हालांकि इस साल विभाग ने इस जमीन पर पौधरोपण नहीं किया है जबकि नाले को ओवरफ्लो होने से रोकने के लिए इसका निर्माण करा दिया गया है।
सीन-1
जहां पौधे रोपे, वहां डाल रहे कूड़ा
शहर के बीच चड्ढा टॉकीज के सामने तालाब किनारे भी यही स्थिति है। तीन साल पहले यहां मियावाकी पद्धति से पौधरोपण हुआ था। इसका उद्देश्य शहर में हरियाली बढ़ाना था। देखरेख के अभाव में यहां हरियाली पनप नहीं सकी। अब इस जगह पर कूड़ा डाला जा रहा है।
सीन-2
हरियाली खत्म, ग्रामीण उपयोग कर रहे जमीन
कुछ ऐसा ही हाल बिधूना क्षेत्र की ग्राम पंचायत पुरवा पीताराम में श्मशान की जमीन पर देखने को मिलता है। इस जमीन को दो साल पहले कब्जामुक्त कराकर तत्कालीन एसडीएम लवनीत कौर के नेतृत्व में पौधे रोपे गए थे। आज यहां पर इस जमीन को ग्रामीण अपने प्रयोग में ले रहे हैं। हरियाली का खत्म हो गई है।
अबकी 4.69 लाख पौधे रोपे गए
इस पर पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिलेभर में 4.69 लाख पौधे रोपे गए हैं। वन विभाग के 69 हजार, ग्राम विकास विभाग के 2.49 लाख, पंचायतीराज विभाग के 17 हजार, नगर विकास के तीन हजार, कृषि विभाग के 63 हजार, उद्यान विभाग के 41 हजार सहित अन्य विभागों की ओर से पौधे रोपे गए हैं।
पहले दिन 4.69 लाख पौधों का रोपण किया गया है। इनकी सलामती के लिए विभागों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। पौधरोपण की जियो टैगिंग की गई है। पौधों को पेड़ बनाने का पूरा प्रयास रहेगा।
सीपी सिंह, प्रभागीय वन अधिकारी