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प्रसव के बाद नहीं मिलता भोजन, परेशान होतीं प्रसूताएं

Sat, 02 Jul 2022 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 11:48 PM IST
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Food is not available after delivery, pregnant women are worried
औरैया। सुरक्षित प्रसव और जननी सुरक्षा को लेकर जहां सरकार गंभीर है वहीं जिले के अफसर बेफिक्र हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाली महिलाओं को प्रसव के बाद कम से कम दो दिन भर्ती रखने का प्रावधान है। तब उन्हें दोनों वक्त का खाना मुहैया कराना होता है। मगर जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में ऐसा नहीं हो रहा है।
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वैसे अधिकारी दावा जरूर कर रहे हैं कि प्रसूताओं को खाना दिया जाता है। जबकि अस्पतालों में खाना मुहैया कराने के लिए न तो संस्था नामित हुई और न ही अभी तक नया टेंडर हुआ है। इसे लेकर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। कुछ प्रसूताओं ने पड़ताल में बताया कि वह अस्पताल की व्यवस्था देखकर प्रसव के बाद ही घर चली गईं।
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सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले वर्ष 70 रुपये में टेंडर हुआ था। अब महंगाई बढ़ने के बाद खाना दे पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इस लिए फल, चाय बिस्कुट मुहैया कराया जा रहा था। महंगाई को देखते हुए नए टेंडर के लिए जेम पोर्टल पर प्रक्रिया की गई है। 15 दिन में टेंडर कराकर समस्या दूर करा दी जाएगी।
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केस-1 दूसरे दिन की छुट्टी, नहीं मिला खाना
सहालय निवासी पूजा देवी पत्नी शिवम ने बताया कि 12 जून को प्रसव के लिए सहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हुईं थीं। शाम को सामान्य प्रसव होने के बाद दूसरे दिन सुबह छुट्टी कर दी गई। इस बीच अस्पताल से मिलने वाला नाश्ता व खाना नहीं दिया गया।
केस-2 खाना तो दूर चाय-नाश्ता भी नहीं दिया
नगला तेज निवासी सीमा पत्नी सुनील कुमार ने बताया कि 28 जून को अछल्दा स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव हुआ। इसके बाद दूसरे दिन वह छुट्टी कराकर घर चली गई। इस बीच किसी ने भी उन्हें खाना तो दूर चाय, नाश्ता तक नहीं दिया। बताया कि यह उनके साथ नहीं कई अन्य महिलाओं के साथ भी ऐसा ही हुआ।

प्रति माह हो रहे सैकड़ों प्रसव
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक जून से 30 जून तक अजीतमल सीएचसी में 171, अछल्दा में 111, सहार में 124, दिबियापुर में 265, बिधूना में 21 मई से 20 जून तक 222, ऐरवाकटरा में 85 प्रसव हुए हैं। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी भी प्रसूताओं को भोजन मुहैया कराने के लिए अलग-अलग तरह के जवाब देते नजर आए। किसी ने समस्या बताई तो किसी ने दावा किया कि भोजन दे रहे हैं।
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