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बारिश से किसानों के खिले चेहरे, गर्मी की मिली राहत
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24एयूआरपी24 - झमाझमा हुई बारिश, भीगते हुए निकले लोग।
- फोटो : AURAIYA
जिलेभर में बुधवार को हुई झमाझम बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली। साथ ही किसानों के चेहरे खिल उठे।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बादल पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी दिशा की तरफ से आ रहे हैं। तापमान व नमी भी मानसून के आगमन के लिए अनुकूल है।
मंगलवार से ही शहर मेें छिटपुट बारिश शुरू हो गई थी। बुधवार को लगभग दो घंटे की बारिश से लोगों ने राहत महसूस की।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार सिंह का कहना है कि बुधवार को अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री दर्ज किया गया। अद्रता 48 दर्ज की गई। उड़द, मूंग, मक्का, अरहर की बुवाई पर कोई असर नहीं है। धान की नर्सरी फिलहाल प्रभावित हो रही है। 29 जून से झमाझम बारिश संभावना है।
कृृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक आईपी सिंह का कहना है कि खरीफ का सीजन शुरू हो गया है। बरसाती प्याज अगेती (एग्रेफाउड डाइग्रेड) में एक हेक्टेयटर में दस किलो ग्राम है।
नर्सरी दस से 50 दिन में तैयार हो जाती है। प्याज की बुवाई का उचित समय 20 जून से लेकर 10 जुलाई तक होता है। क्यारी की लंबाई सात से आठ मीटर और चौड़ाई एक मीटर होनी चाहिए।
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औरैया। अनाज भंडारण में होने वाली क्षति रोकने के लिए साफ-सुथरा कर धूप में सूखा लेना चाहिए। इससे दाने में दस प्रतिशत से अधिक नमी न रहने पाए।
कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा दिबियापुर के प्रभारी अनंत कुमार ने बताया कि अनाज में ज्यादा नमी रहने से फफूंद व कीटों का प्रकोप अधिक रहता है।
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मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बादल पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी दिशा की तरफ से आ रहे हैं। तापमान व नमी भी मानसून के आगमन के लिए अनुकूल है।
मंगलवार से ही शहर मेें छिटपुट बारिश शुरू हो गई थी। बुधवार को लगभग दो घंटे की बारिश से लोगों ने राहत महसूस की।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार सिंह का कहना है कि बुधवार को अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री दर्ज किया गया। अद्रता 48 दर्ज की गई। उड़द, मूंग, मक्का, अरहर की बुवाई पर कोई असर नहीं है। धान की नर्सरी फिलहाल प्रभावित हो रही है। 29 जून से झमाझम बारिश संभावना है।
कृृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक आईपी सिंह का कहना है कि खरीफ का सीजन शुरू हो गया है। बरसाती प्याज अगेती (एग्रेफाउड डाइग्रेड) में एक हेक्टेयटर में दस किलो ग्राम है।
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नर्सरी दस से 50 दिन में तैयार हो जाती है। प्याज की बुवाई का उचित समय 20 जून से लेकर 10 जुलाई तक होता है। क्यारी की लंबाई सात से आठ मीटर और चौड़ाई एक मीटर होनी चाहिए।
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औरैया। अनाज भंडारण में होने वाली क्षति रोकने के लिए साफ-सुथरा कर धूप में सूखा लेना चाहिए। इससे दाने में दस प्रतिशत से अधिक नमी न रहने पाए।
कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा दिबियापुर के प्रभारी अनंत कुमार ने बताया कि अनाज में ज्यादा नमी रहने से फफूंद व कीटों का प्रकोप अधिक रहता है।