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गेहूं की कम कीमतों ने किसानों की बढ़ाई मुश्किलें
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औरैया। सरकारी केंद्रों पर गेहूं खरीद बंद होने के बाद अब मंडियों में किसान गेहूं बेचने पर मजबूर हैं। लेकिन उन्हें फसल का वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा है। आढ़तियों के यहां लगने वाली बोली से किसान मुनाफा तो दूर खेती की लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। आढ़तियों के यहां 1560-1590 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं बिक रहा है। जबकि सरकारी खरीद केंद्रों पर 1975 रुपये प्रति क्विंटल कीमत निर्धारित थी।
इस बार खरीद केंद्रों पर कहीं बारदाना तो कहीं टोकन न मिल पाने के कारण सैकड़ों किसान फसल नहीं बेच पाए। अब आढ़तियों के यहां गेहूं बेचना उनकी मजबूरी है। किसानों ने अब मंडियों की ओर रुख कर दिया है। शुक्रवार को कृषि उत्पादन मंडी समिति में आढ़तियों के यहां गेहूं के ढेर देखने को मिले। सुबह गेहूं का भाव 1560 रुपये था। दोपहर तक 1590 के करीब दाम पहुंचे। मंडी में कम कीमतों के चलते किसान परेशान हैं।
नहीं निकल पा रही लागत
युवा किसान हिमांशु पाल ने बताया कि किसानों का हमेशा ही शोषण किया जाता है। इस बार भी किसानों को मंडी में गेहूं की फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
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बढ़ रहीं मुश्किलें
किसान अशोक कुमार ने बताया कि इस बार गेहूं के दाम नहीं बढ़ रहे हैं। किसानों की मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। किसानों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन इन पर पानी फिर गया।
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इस बार खरीद केंद्रों पर कहीं बारदाना तो कहीं टोकन न मिल पाने के कारण सैकड़ों किसान फसल नहीं बेच पाए। अब आढ़तियों के यहां गेहूं बेचना उनकी मजबूरी है। किसानों ने अब मंडियों की ओर रुख कर दिया है। शुक्रवार को कृषि उत्पादन मंडी समिति में आढ़तियों के यहां गेहूं के ढेर देखने को मिले। सुबह गेहूं का भाव 1560 रुपये था। दोपहर तक 1590 के करीब दाम पहुंचे। मंडी में कम कीमतों के चलते किसान परेशान हैं।
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नहीं निकल पा रही लागत
युवा किसान हिमांशु पाल ने बताया कि किसानों का हमेशा ही शोषण किया जाता है। इस बार भी किसानों को मंडी में गेहूं की फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
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बढ़ रहीं मुश्किलें
किसान अशोक कुमार ने बताया कि इस बार गेहूं के दाम नहीं बढ़ रहे हैं। किसानों की मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। किसानों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन इन पर पानी फिर गया।