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Auraiya News: आंखों का संक्रमण बढ़ा, नेत्र परीक्षण अधिकारियों की कमी से नहीं लग रहे शिविर
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संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। जिले में आई फ्लू का कहर लोगों पर बदस्तूर जारी है। प्रतिदिन तीन से चार नए गांवों में कंजक्टिवाटिस (आंखों का संक्रमण) फैलने की जानकारी मिल रही है। बीमारी की चपेट में आए बहुत से मरीज गांवों में स्वास्थ्य स्वास्थ्य शिविर की आस में बैठे हैं। जबकि हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग के पास जिले के सभी विजन सेंटरों को एक साथ संचालन करने के लिए नेत्र परीक्षण अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं।
बिधूना, ऐरवाकटरा, औरैया ब्लॉक के बाद अब अछल्दा, भाग्यनगर, साहर व अजीतमल में भी इसका हमला तेज हो गया है। भाग्यनगर ब्लॉक के खानपुर, बिलराई, मुरैना, पसईपुर, फफूंद कस्बा, कोठीपुर, सल्लापुर समेत 50 गांवों में मरीजों में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। जिससे जिले के सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों तक मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्र में बहुत से लोग शिविर लगने पर डॉक्टरों से जांच करवाने की आस में मेडिकल स्टोर से दवा लेकर इंतजार में लगे हैं। जबकि हालात यह हैं कि जिले में दोनों जिला अस्पतालों व सातों सीएचसी को जोड़कर नौ विजन सेंटर संचालित हैं। इनमें से अछल्दा, सहार व ऐरवाकटरा सीएचसी पर नेत्र परीक्षण अधिकारियों की तैनाती ही नहीं हो सकी है। जिससे स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को ही फ्लू का उपचार करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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डिप्टी सीएमओ जयकिशन सोनकर ने बताया कि तीन खाली पड़े विजन सेंटरों पर अन्य सीएचसी के नेत्र परीक्षण अधिकारियों से रोस्टर के हिसाब से तीन-तीन दिन काम लिया जा रहा है। जिससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का उपचार समय से हो सके। स्वास्थ्य कर्मियों व डॉक्टरों की कमी के चलते गांव-गांव कैंप नहीं लगाए जा रहे हैं।
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जिले में आंखों के संक्रमण के मरीजों में इजाफा हो रहा है। इन मरीजों में आंखों का लाल होना, आंखों में गढऩ, चुभन, खुजली, पानी आना व चिपचिपापन रहना मुख्य लक्षण हैं। बताया कि बरसात के मौसम में घरों के आसपास पड़ा कूड़ा-करकट पानी के भराव से सड़ जाता है। जिससे वातावरण प्रदूषित हो जाता है। इससे महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यदि किसी की भी आंखों में समस्या आए तो वह तुरंत ही अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचकर डॉक्टर से परामर्श लें। - डॉ. सुनील कुमार वर्मा, सीएमओ
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औरैया। जिले में आई फ्लू का कहर लोगों पर बदस्तूर जारी है। प्रतिदिन तीन से चार नए गांवों में कंजक्टिवाटिस (आंखों का संक्रमण) फैलने की जानकारी मिल रही है। बीमारी की चपेट में आए बहुत से मरीज गांवों में स्वास्थ्य स्वास्थ्य शिविर की आस में बैठे हैं। जबकि हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग के पास जिले के सभी विजन सेंटरों को एक साथ संचालन करने के लिए नेत्र परीक्षण अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं।
बिधूना, ऐरवाकटरा, औरैया ब्लॉक के बाद अब अछल्दा, भाग्यनगर, साहर व अजीतमल में भी इसका हमला तेज हो गया है। भाग्यनगर ब्लॉक के खानपुर, बिलराई, मुरैना, पसईपुर, फफूंद कस्बा, कोठीपुर, सल्लापुर समेत 50 गांवों में मरीजों में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। जिससे जिले के सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों तक मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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ग्रामीण क्षेत्र में बहुत से लोग शिविर लगने पर डॉक्टरों से जांच करवाने की आस में मेडिकल स्टोर से दवा लेकर इंतजार में लगे हैं। जबकि हालात यह हैं कि जिले में दोनों जिला अस्पतालों व सातों सीएचसी को जोड़कर नौ विजन सेंटर संचालित हैं। इनमें से अछल्दा, सहार व ऐरवाकटरा सीएचसी पर नेत्र परीक्षण अधिकारियों की तैनाती ही नहीं हो सकी है। जिससे स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को ही फ्लू का उपचार करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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डिप्टी सीएमओ जयकिशन सोनकर ने बताया कि तीन खाली पड़े विजन सेंटरों पर अन्य सीएचसी के नेत्र परीक्षण अधिकारियों से रोस्टर के हिसाब से तीन-तीन दिन काम लिया जा रहा है। जिससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का उपचार समय से हो सके। स्वास्थ्य कर्मियों व डॉक्टरों की कमी के चलते गांव-गांव कैंप नहीं लगाए जा रहे हैं।
जिले में आंखों के संक्रमण के मरीजों में इजाफा हो रहा है। इन मरीजों में आंखों का लाल होना, आंखों में गढऩ, चुभन, खुजली, पानी आना व चिपचिपापन रहना मुख्य लक्षण हैं। बताया कि बरसात के मौसम में घरों के आसपास पड़ा कूड़ा-करकट पानी के भराव से सड़ जाता है। जिससे वातावरण प्रदूषित हो जाता है। इससे महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यदि किसी की भी आंखों में समस्या आए तो वह तुरंत ही अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचकर डॉक्टर से परामर्श लें। - डॉ. सुनील कुमार वर्मा, सीएमओ