फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   Educational institute built by taking land fraudulently

Auraiya News: फर्जी तरीके से जमीन लेकर बनाया शिक्षण संस्थान

Wed, 21 Aug 2024 12:13 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2024 12:13 AM IST
विज्ञापन
Educational institute built by taking land fraudulently
औरैया। दिबियापुर के इर्द-गिर्द कीमती जमीनों पर सालों पहले फर्जी तरीके से काबिज हुए लोगों की हकीकत सामने आने का दौर जारी है।
विज्ञापन


अब इस कड़ी में सेहुद ग्राम पंचायत के मजरा देवराय का पुर्वा में एक 10 एकड़ से ज्यादा बेशकीमती जमीन का फर्जीवाड़ा खुला है। यहां साल 1971-72 में चंद्रमणि बाजपेई चकबंदी से पहले फर्जी जमीन आवंटन दर्शाकर 10 एकड़ से ज्यादा जमीन पर काबिज हो जाते हैं। यहां जनता माध्यमिक विद्यालय नाम से एक शिक्षण संस्थान शुरू किया जाता है, जिसे अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय की मान्यता भी मिल गई।

52 साल बाद हुई शिकायत के बाद जमीन के कागजात खंगाले गए। वाद दर्ज हुआ और खतौनी में दर्ज हुई फर्जी प्रविष्टि में सुधार करते हुए दोबारा से जमीन को ग्राम सभा में दर्ज कराने का आदेश सदर एसडीएम कोर्ट से किया गया है। इस जमीन की कीमत करोड़ों में हैं।
विज्ञापन


बिधूना के देवरांव गांव निवासी चंद्रमणि बाजपेई अपनी सूझबूझ का परिचय जमीन के फर्जीवाड़े में देते हैं। सेहुद ग्राम पंचायत के मजरा देवराय का पुर्वा में इनकी नजर जाती है। बिधूना में अपने मूल गांव देवरांव व सेहुद के मजरा देवराय का पुर्वा का मिलाजुला नाम इनके काम आया।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी तहसील के निवासी होते हुए फसली जमीन पर साल 1971-72 में 10 एकड़ का फर्जी आवंटन पा लिया, जबकि जमीन आवंटन पाने की पात्रता में एक युवक को 3.125 एकड़ से ज्यादा जमीन आवंटित नहीं की जा सकती है।

नियमावली के तहत युवक उसी ग्राम पंचायत का निवासी होना चाहिए। बावजूद इसके मानकों को किनारे रख दिया गया। यहां तक कि फर्जी कागजात के सहारे जमीन को अपने नाम खतौनी में दर्ज करा लिया।

उसके बाद इस जमीन पर बिल्डिंग बनवाते हुए शिक्षण संस्थान खोला गया। पद प्रतिष्ठा व वैभव तीनों को एक साथ पाते हुए चंद्रमणि बाजपेई प्रबंधक के तौर पर काबिज रहे। साल बीते और शिक्षण संस्थान जनता माध्यमिक विद्यालय को अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय की मान्यता मिल गई। फिर क्या था। जमीन के फर्जीवाड़े से शुरू हुआ इनका दौर तेजी से बढ़ा।

बिल्डिंग के एक हिस्से में जनता महाविद्यालय नाम से भी शिक्षण संस्थान शुरू कर दिया। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़कर यश भी पा लिया।

सूत्रों की माने तो अकूत बढ़ती दौलत के साथ घर में विवादों का दौर भी शुरू हुआ। इस सब के बीच एक कहावत सार्थक हुई। घर का भेदी लंका ढाए। कमिश्नरी से लेकर तहसील व जिला प्रशासन में पिछले दिनों शिकायत हुई।

जांच बैठी तो जमीन का फर्जीवाड़ा 52 साल बाद उखड़कर सामने आ गया। सदर एसडीएम कोर्ट में वाद दर्ज कराया। कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए जनता माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक चंद्रमणि बाजपेई को आवंटित हुई जमीन को गलत पाते हुए खतौनी में प्रविष्टि सुधार करते हुए चिह्नित जमीन को दोबारा से ग्राम सभा में दर्ज करने का आदेश दिया है।


सूत्राें की माने तो जल्द ही इस शिक्षण संस्थान पर बुल्डोजर चल सकता है। 52 साल पहले हुए बेशकीमती जमीन के फर्जीवाड़े का राज अब खुला है।

हालांकि, परिवार का रसूख शिक्षण संस्थान की बिनाह पर काफी दबदबे वाला हो गया है। सदर एसडीएम राकेश कुमार ने बताया कि जनता माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक चंद्रमणि बाजपेई के नाम से दर्ज जमीन को दोबारा से ग्राम सभा में दर्ज करने का आदेश दिया
गया है। बेदखली की कार्रवाई करने के लिए तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed