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प्री-प्राइमरी स्कूल की तर्ज पर चलेंगे आंगनबाड़ी केंद्र
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औरैया। नई शिक्षा नीति के तहत जिले भर की आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को अब पुष्टाहार ही नहीं बल्कि उन्हें शिक्षा भी दी जाएगी। अब इन केंद्रों पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन कराया जाएगा। बच्चों को यूनिफार्म से लेकर पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने के साथ-साथ मिड-डे मील का वितरण कराया जाएगा। इसकी व्यवस्था बेसिक शिक्षा विभाग कराएगा।
जिले में 1327 आंगनबाड़ी केंद्र और 462 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें लगभग 2638 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्यरत हैं। प्री-प्राइमरी की पढ़ाई के लिए इसी माह प्रशिक्षण शुरू होगा। दसवीं पास कार्यकर्ता को ही प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा। हालांकि अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं है कि जिले में कुल कितनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। विभाग की मानें तो पहले ब्लाक स्तर पर लोग चुने जाएंगे, जो प्रशिक्षण लेने के बाद बीआरसी पर प्रशिक्षण देंगे।
इनमें दो मुख्य सेविका और एक-एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक एआरपी शामिल होगा। इसमें वही कार्यकर्ता चुनी जाएंगी जो दसवीं पास हो और स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करना जानती हो, विभाग के कार्यक्रमों में सक्रिय रहती हों। 20-20 लोगों के समूह में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में केंद्र की साज सज्जा से लेकर पढ़ाने के तरीके तक पर जोर दिया जाएगा। बीएसए व डीपीआरओ प्रशिक्षण की निगरानी करेंगे।
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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को तनाव मुक्त रखने और खेल-खेल में रोचक ढंग से पढ़ाई कराने पर जोर दिया जाएगा। प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों के लिए हफ्ते में एक दिन नो- बैग डे होगा। उस दिन विद्यार्थी बिना बस्ता लिए स्कूल आएंगे और खेल-खेल में मनोरंजन के माध्यम से सबक सीखेंगे।
प्री प्राइमरी की पढ़ाई आंगनबाड़ी में कराई जाएगी। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर रिसोर्स पर्सन चुने जाएंगे, जो प्रशिक्षण लेने के बाद बीआरसी पर प्रशिक्षण देंगे।
-चंदना राम इकबाल, बीएसए
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जिले में 1327 आंगनबाड़ी केंद्र और 462 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें लगभग 2638 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्यरत हैं। प्री-प्राइमरी की पढ़ाई के लिए इसी माह प्रशिक्षण शुरू होगा। दसवीं पास कार्यकर्ता को ही प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा। हालांकि अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं है कि जिले में कुल कितनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। विभाग की मानें तो पहले ब्लाक स्तर पर लोग चुने जाएंगे, जो प्रशिक्षण लेने के बाद बीआरसी पर प्रशिक्षण देंगे।
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इनमें दो मुख्य सेविका और एक-एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक एआरपी शामिल होगा। इसमें वही कार्यकर्ता चुनी जाएंगी जो दसवीं पास हो और स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करना जानती हो, विभाग के कार्यक्रमों में सक्रिय रहती हों। 20-20 लोगों के समूह में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में केंद्र की साज सज्जा से लेकर पढ़ाने के तरीके तक पर जोर दिया जाएगा। बीएसए व डीपीआरओ प्रशिक्षण की निगरानी करेंगे।
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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को तनाव मुक्त रखने और खेल-खेल में रोचक ढंग से पढ़ाई कराने पर जोर दिया जाएगा। प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों के लिए हफ्ते में एक दिन नो- बैग डे होगा। उस दिन विद्यार्थी बिना बस्ता लिए स्कूल आएंगे और खेल-खेल में मनोरंजन के माध्यम से सबक सीखेंगे।
प्री प्राइमरी की पढ़ाई आंगनबाड़ी में कराई जाएगी। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर रिसोर्स पर्सन चुने जाएंगे, जो प्रशिक्षण लेने के बाद बीआरसी पर प्रशिक्षण देंगे।
-चंदना राम इकबाल, बीएसए