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Auraiya News: खेती से मिली निराशा, अंडे ने संवारा भविष्य
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फफूंद। खुद ही को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से ये पूछे बता तेरी रजा क्या है... कुछ ऐसा ही कर दिखाया है हसनपुर गांव के प्रधान मोहम्मद वसीम और उनके परिवार ने। खेती में लगातार नुकसान झेलने के बाद इस परिवार ने अंडा उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखकर नई पहचान बनाई है। आज वसीम परिवार आसपास के जिलों में प्रतिदिन 35 से 40 हजार अंडों की सप्लाई चेन संचालित कर रहे हैं।
साल 2014 में अछल्दा रोड स्थित गांव हसनपुर के प्रधान मोहम्मद वसीम ने खेती छोड़कर फूटाताल गांव के पास 10 बीघा भूमि पर पोल्ट्री फार्म शुरू किया। शुरूआत में 10 हजार मुर्गियों से रोजाना आठ से नौ हजार अंडों का उत्पादन हुआ। धीरे-धीरे व्यवसाय बढ़ता गया और करीब 20 स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने लगा। मगर कोरोना महामारी के दौरान बाजार ठप पड़ गया, बिक्री रुक गई और परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया।
इसी दौरान परिवार के युवा सदस्य राजा, तारिक, राजू, आरिफ, तनवीर और सरफराज आगे आए और खुद ही फार्म की सफाई, चारा डालने, वेक्सिनेशन, पैकिंग और सप्लाई की जिम्मेदारी संभाली। मेहनत और तकनीकी सुधार के बल पर फार्म ने फिर रफ्तार पकड़ी। वर्तमान में यहां 40 हजार मुर्गियां और 12 हजार चूजों का पालन हो रहा है। हर दिन हजारों अंडे जनपद और अन्य जनपदों में भेजे जा रहे हैं। प्रधान वसीम, नसीम और नसीर बताते हैं कि सरकारी योजनाओं और सब्सिडी ने संकट के समय बड़ी मदद की। आज यह परिवार न सिर्फ घाटे से उबर चुका है बल्कि अन्य किसानों और युवाओं को वैकल्पिक रोजगार अपनाने की प्रेरणा भी दे रहा है। पोल्ट्री फार्म से आसपास के गांवों की आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है ।स्थानीय किसान मुर्गियों के लिए दाने की आपूर्ति कर रहे हैं और मुर्गी की बीट से खेतों की उर्वरता बढ़ा रहे हैं।
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साल 2014 में अछल्दा रोड स्थित गांव हसनपुर के प्रधान मोहम्मद वसीम ने खेती छोड़कर फूटाताल गांव के पास 10 बीघा भूमि पर पोल्ट्री फार्म शुरू किया। शुरूआत में 10 हजार मुर्गियों से रोजाना आठ से नौ हजार अंडों का उत्पादन हुआ। धीरे-धीरे व्यवसाय बढ़ता गया और करीब 20 स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने लगा। मगर कोरोना महामारी के दौरान बाजार ठप पड़ गया, बिक्री रुक गई और परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया।
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इसी दौरान परिवार के युवा सदस्य राजा, तारिक, राजू, आरिफ, तनवीर और सरफराज आगे आए और खुद ही फार्म की सफाई, चारा डालने, वेक्सिनेशन, पैकिंग और सप्लाई की जिम्मेदारी संभाली। मेहनत और तकनीकी सुधार के बल पर फार्म ने फिर रफ्तार पकड़ी। वर्तमान में यहां 40 हजार मुर्गियां और 12 हजार चूजों का पालन हो रहा है। हर दिन हजारों अंडे जनपद और अन्य जनपदों में भेजे जा रहे हैं। प्रधान वसीम, नसीम और नसीर बताते हैं कि सरकारी योजनाओं और सब्सिडी ने संकट के समय बड़ी मदद की। आज यह परिवार न सिर्फ घाटे से उबर चुका है बल्कि अन्य किसानों और युवाओं को वैकल्पिक रोजगार अपनाने की प्रेरणा भी दे रहा है। पोल्ट्री फार्म से आसपास के गांवों की आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है ।स्थानीय किसान मुर्गियों के लिए दाने की आपूर्ति कर रहे हैं और मुर्गी की बीट से खेतों की उर्वरता बढ़ा रहे हैं।
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