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सरकारी विभागों पर बिजली बिल का करोड़ों बकाया

Sat, 19 Oct 2019 12:10 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 19 Oct 2019 12:10 AM IST
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Crores outstanding due to electricity bill on government departments
औरैया। विद्युत विभाग सरकारी महकमों पर बिजली बिल का बकाया करोड़ों रुपया वसूलने में उदासीनता बरत रही है। वहीं, घरेलू व कामर्शियल उपभोक्ताओं पर शिकंजा कसने में जुटी है। आम उपभोक्ताओं का एक महीने का बिल जमा न होने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई कर दी जाती है। यही नहीं बिल में गड़बड़ी होने पर तमाम मर्तबा विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं। मजबूरी में दलालों का सहारा लेकर काम कराना पड़ता है। इन विसंगतियों को लेकर उपभोक्ताओं में खासी नाराजगी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बकाया वसूली में सरकारी महकमे व आम लोगों के साथ समान कार्रवाई होनी चाहिए।
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औरैया डिवीजन में कुल 78 हजार 591 विद्युत उपभोक्ता हैं। इनमें 71 हजार 559 घरेलू और 3049 कामर्शियल तथा बाकी के पॉवर उपभोक्ता हैं। बकायेदारी की बात की जाए तो सितंबर 2019 तक अकेले बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग पर पांच करोड़ 20 लाख 72 हजार रुपये बकाया है। इसी तरह सीएमओ कार्यालय पर 47 लाख रुपये, खंड विकास अधिकारी औरैया व अजीतमल कार्यालय पर 41.85 लाख रुपये, मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय पर 26 लाख रुपये और जिला प्रशासन पर 15.71 लाख रुपया बकाया है। इन पांच विभागों के अलावा कई अन्य विभागों पर भी लाखों रुपया बकाया है। सूत्र बताते हैं कि इन विभागों को समय-समय पर नोटिस भी जारी की जाती है, पर बकाया नहीं जमा हो पा रहा है। वहीं, घरेलू व कामर्शियल उपभोक्ताओं पर विद्युत विभाग बराबर शिकंजा कसे रहता है। अभियान चलाकर बकाया वसूली व बिल जमा न होने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाती है। यहां तक कि एफआईआर तक दर्ज कराई जाती है। इससे विद्युत उपभोक्ताओं में खासी नाराजगी है।
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चेकिंग के नाम पर परेशान किया जाता है
उपभोक्ता राघवेंद्र सिंह का कहना है कि विभाग की ओर से आए दिन चेकिंग अभियान चलाकर घर-घर मीटरों की जांच करने के नाम पर परेशान किया जाता है। आम उपभोक्ता का यदि एक माह भी किसी कारणवश बिल बकाया हो जाता है तो कनेक्शन काट दिया जाता है। जबकि सरकारी विभागों पर कई-कई माह का बिल बकाया होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। अधिकारियों का यह दोहरा रवैया निंदनीय है।
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व्यापारी नेता विजय कांत का कहना है कि कामर्शियल उपभोक्ताओं को बिल की गड़बड़ी दूर कराने के लिए विभाग के तमाम चक्कर काटने पड़ते हैं। अधिकारी बिल की त्रुटि दूर करने में लग रहे समय के चलते पहले दिया गया बिल जमा करने का दबाव बनाते हैं। उपभोक्ता बिल जमा कर देता है तो उसे फिर बिल सही कराने के लिए भटकना पड़ता है। निराश होकर दलाल का सहारा लेकर बिल दुरुस्त कराना पड़ता है।

सीएमओ, जिला प्रशासन, विकास भवन आदि इमरजेंसी सेवाओं में आते हैं। बकाए की स्थिति में इन दफ्तरों के कनेक्शन नहीं काटे जा सकते हैं। घरेलू व कामर्शियल उपभोक्ताओं के साथ दोहरी नीति के तहत काम करने की बात गलत है, क्योंकि हम लोग सरकार के दिशा निर्देशों के आधार पर ही काम करते हैं।
नीतेश कुमार, एसडीओ, सदर
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