{"_id":"57ee9af14f1c1bf045574578","slug":"professional-jmantgiron-sent-to-jail","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेशेवर जमानतगीरों को भेजा जेल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पेशेवर जमानतगीरों को भेजा जेल
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Fri, 30 Sep 2016 10:33 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोर्ट में हत्या और अपहरण जैसे संगीन मामले में अभियुक्त की जमानत लेने आए पेशेवर दो जमानतगीर को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने जेल भेज दिया। न्यायालय ने इस कार्य में संलिप्त दो अन्य लोगों को भी नोटिस भेजकर छह अक्टूबर को तलब किया है।
थाना अजीतमल में दर्ज एक मामले में अभियुक्त कप्तान सिंह की जमानत लेने आए दो जमानतगीर विपिन कुमार पुत्र राम आसरे निवासी जगजीवनपुर और होतीलाल पुत्र श्रीराम निवासी गोपालपुर एडीजे लल्लू सिंह के समक्ष पेश हुए। कोर्ट ने दोनों से पूछताछ की तो दोनो यह बताने में असमर्थ रहे कि वह किसकी जमानत ले रहे हैं। एडीजे कुछ और पूछते कि वह दोनों भाग खड़े हुए। दोनों को कचहरी परिसर में पुलिस ने पकड़ लिया।
इन दोनों ने इस काम में शामिल एके दुबे व अवधेश पांडेय का नाम लेते हुए बताया कि जमानत लेने पर उन्हें 10 से 15 हजार रुपये मिल जाते हैं। इसके बाद वह कह देते हैं कि उन्होंने जमानत नहीं ली। कोर्ट ने लिखा कि दोनों जमानतगीर पैसा लेकर जमानत देते हैं। उन्होंने न्यायालय के समक्ष असत्य शपथपत्र दिया है। इसलिए दोनों पर प्रकीर्ण वाद धारा 340 सीआरपीसी दर्ज हुआ। दोनों को जिला कारागार इटावा भेजने के आदेश जारी किए गए। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि फर्जी जमानतों के कारण मुकदमों के विचारण के समय अभियुक्त हाजिर नहीं होते और जमानतगीर उन्हें प्रस्तुत भी नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि तमाम ऐसे मामलों में अभियुक्तों के हाजिर न होने से मुकदमों की सुनवाई नहीं बढ़ पाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
थाना अजीतमल में दर्ज एक मामले में अभियुक्त कप्तान सिंह की जमानत लेने आए दो जमानतगीर विपिन कुमार पुत्र राम आसरे निवासी जगजीवनपुर और होतीलाल पुत्र श्रीराम निवासी गोपालपुर एडीजे लल्लू सिंह के समक्ष पेश हुए। कोर्ट ने दोनों से पूछताछ की तो दोनो यह बताने में असमर्थ रहे कि वह किसकी जमानत ले रहे हैं। एडीजे कुछ और पूछते कि वह दोनों भाग खड़े हुए। दोनों को कचहरी परिसर में पुलिस ने पकड़ लिया।
विज्ञापन
इन दोनों ने इस काम में शामिल एके दुबे व अवधेश पांडेय का नाम लेते हुए बताया कि जमानत लेने पर उन्हें 10 से 15 हजार रुपये मिल जाते हैं। इसके बाद वह कह देते हैं कि उन्होंने जमानत नहीं ली। कोर्ट ने लिखा कि दोनों जमानतगीर पैसा लेकर जमानत देते हैं। उन्होंने न्यायालय के समक्ष असत्य शपथपत्र दिया है। इसलिए दोनों पर प्रकीर्ण वाद धारा 340 सीआरपीसी दर्ज हुआ। दोनों को जिला कारागार इटावा भेजने के आदेश जारी किए गए। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि फर्जी जमानतों के कारण मुकदमों के विचारण के समय अभियुक्त हाजिर नहीं होते और जमानतगीर उन्हें प्रस्तुत भी नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि तमाम ऐसे मामलों में अभियुक्तों के हाजिर न होने से मुकदमों की सुनवाई नहीं बढ़ पाती।
विज्ञापन