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सिपाही पर हमला करने में आजीवन कारावास
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:01 AM IST
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कोर्ट
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने हत्या व बलात्कार के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे ग्राम चिरकुंआ थाना बिधूना निवासी कुलदीप की ओर से कोर्ट में पेशी के दौरान लॉकअप के एक सिपाही पर हमला करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई। इस काम में सहयोग करने वाले उसके पिता मूलचंद्र को पांच साल के कठोर कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से भी दंडित किया।
आरोपी कुलदीप को 12 नवंबर 2011 को बिधूना थाना क्षेत्र में हुए एक घटना के मामले में धारा 396 व 302 की धाराओं के तहत पुलिस वाले पेशी पर लाए थे। पेशी के बाद जब पुलिस वाले उसे वापस हवालात ले जा रहे थे। तभी उसका पिता मूलचंद्र उसे खाने का सामान देने लगा। पुलिस वालों ने मना किया तो उसके पिता मूलचंद्र के कहने पर कुलदीप ने नीचे पड़ा नुकीला पत्थर उठाकर कांस्टेबिल रामविलास (पुलिस लाइन औरैया) की कनपटी पर कई वार किए। इससे वह घायल हो गया। इस पर कुलदीप व उसके पिता के खिलाफ कोतवाली औरैया में मामला दर्ज हुआ। विवेचना के बाद यह मुकदमा एडीजे कोर्ट में चला। अभियोजन की ओर से एडीजीसी लालजी दोहरे ने कैदी की ओर से किए गए इस कृत्य पर मृत्यु दंड की मांग की।
एडीजे लल्लू सिंह ने आदेश में लिखा कि कोई व्यक्ति जो आजीवन कारावास के दंडादेश के अधीन हो वह यदि पुन: वहीं काम करता है तो उसके लिए मृत्यु दंड से दंडित किए जाने की व्यवस्था है। कोर्ट ने कुलदीप को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। वहीं उसके पिता मूलचंद्र को पांच साल के कठोर कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा इस प्रकरण में दोष सिंह अपराधीगण की पूर्व में बिताई गई कारावास की अवधि को इस दंड की मात्रा में समायोजित किया जाएगा।
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आरोपी कुलदीप को 12 नवंबर 2011 को बिधूना थाना क्षेत्र में हुए एक घटना के मामले में धारा 396 व 302 की धाराओं के तहत पुलिस वाले पेशी पर लाए थे। पेशी के बाद जब पुलिस वाले उसे वापस हवालात ले जा रहे थे। तभी उसका पिता मूलचंद्र उसे खाने का सामान देने लगा। पुलिस वालों ने मना किया तो उसके पिता मूलचंद्र के कहने पर कुलदीप ने नीचे पड़ा नुकीला पत्थर उठाकर कांस्टेबिल रामविलास (पुलिस लाइन औरैया) की कनपटी पर कई वार किए। इससे वह घायल हो गया। इस पर कुलदीप व उसके पिता के खिलाफ कोतवाली औरैया में मामला दर्ज हुआ। विवेचना के बाद यह मुकदमा एडीजे कोर्ट में चला। अभियोजन की ओर से एडीजीसी लालजी दोहरे ने कैदी की ओर से किए गए इस कृत्य पर मृत्यु दंड की मांग की।
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एडीजे लल्लू सिंह ने आदेश में लिखा कि कोई व्यक्ति जो आजीवन कारावास के दंडादेश के अधीन हो वह यदि पुन: वहीं काम करता है तो उसके लिए मृत्यु दंड से दंडित किए जाने की व्यवस्था है। कोर्ट ने कुलदीप को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। वहीं उसके पिता मूलचंद्र को पांच साल के कठोर कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा इस प्रकरण में दोष सिंह अपराधीगण की पूर्व में बिताई गई कारावास की अवधि को इस दंड की मात्रा में समायोजित किया जाएगा।
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