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Auraiya News: छठ पूजा की धूम, दूसरे दिन खरना पर हुई भगवान भास्कर की आराधना
Sun, 26 Oct 2025 10:42 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 26 Oct 2025 10:42 PM IST
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औरैया। लोक आस्था के महापर्व छठ को धूमधाम से मनाया जा रहा है। रविवार को पर्व के दूसरे दिन खरना पर श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से भगवान भास्कर और माता षष्ठी की पूजा-अर्चना की। घरों और घाटों पर भक्ति का माहौल देखने को मिला। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को सूर्य अस्त के बाद खरना का प्रसाद चखा।
सुबह से ही घरों में साफ-सफाई और पूजा की तैयारी में लोग जुटे रहे। मिट्टी के चूल्हे पर गुड़, दूध और चावल से रसीली खीर बनाई गई। जिसे केले और ठेकुआ के साथ प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। शहर कस्बों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में व्रतियों ने श्रद्धा के साथ खरना का पारंपरिक अनुष्ठान किया। दिबियापुर स्थित गेल, पाता समेत अयाना, सहार, बिधूना और कंचौसी क्षेत्रों में घरों के आंगनों व तालाबों तक छठ के गीत गूंजते रहे।
महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजीं। परिवार के सदस्यों संग पूजा की तैयारी में व्यस्त रहीं। शाम होते-होते कई परिवारों ने स्थानीय जलाशयों और तालाबों पर जाकर अर्घ्य दिया। प्रशासन की ओर से घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सोमवार को तीसरे दिन व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा जबकि मंगलवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होगा।
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सुबह से ही घरों में साफ-सफाई और पूजा की तैयारी में लोग जुटे रहे। मिट्टी के चूल्हे पर गुड़, दूध और चावल से रसीली खीर बनाई गई। जिसे केले और ठेकुआ के साथ प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। शहर कस्बों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में व्रतियों ने श्रद्धा के साथ खरना का पारंपरिक अनुष्ठान किया। दिबियापुर स्थित गेल, पाता समेत अयाना, सहार, बिधूना और कंचौसी क्षेत्रों में घरों के आंगनों व तालाबों तक छठ के गीत गूंजते रहे।
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महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजीं। परिवार के सदस्यों संग पूजा की तैयारी में व्यस्त रहीं। शाम होते-होते कई परिवारों ने स्थानीय जलाशयों और तालाबों पर जाकर अर्घ्य दिया। प्रशासन की ओर से घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सोमवार को तीसरे दिन व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा जबकि मंगलवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होगा।
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