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Auraiya News: शासन में अटकी बजट की फाइल, जांच रिपोर्ट भी लटकी, पुल की मरम्मत अधर में, चालकों पर बोझ

Fri, 03 Jan 2025 11:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2025 11:38 PM IST
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Budget file stuck in government, investigation report also pending, repair of bridge in limbo, burden on drivers
यमुना पुल जाने वाले मार्ग पर लगे एंगल से होकर गुजरता बाइक सवार। - फोटो : यमुना पुल जाने वाले मार्ग पर लगे एंगल से होकर गुजरता बाइक सवार।
औरैया। बिलराया पनवाड़ी मार्ग पर पड़ने वाले यमुना नदी पुल पर पिछले लगभग एक साल से भारी वाहनों के चलने पर लगी पाबंदी अभी तक हट नहीं सकी है।
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अहम बात यह है कि पुल की जुलाई में बीएचयू के इंजीनियर की टीम की ओर से की गई जांच की फीस अभी तक विभाग जुटा नहीं पाया। इसके पीछे की वजह शासन स्तर से पीडब्ल्यूडी की फाइल का अटका होना बताया जा रहा है। बजट के अभाव में जांच रिपोर्ट अटक गई है। इसके न मिलने से पुल की मरम्मत नहीं हो पा रही है। ऐसे में भारी वाहनाें को उरई तक जाने में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के रास्ते 40 किमी. का आवागमन करना पड़ रहा है। इससे सामान व यात्रियों पर अतिरिक्त किराये का बोझ बढ़ा है।

शेरगढ़ घाट स्थित यमुना नदी पुल पर कंपन अधिक होने की जानकारी पर वर्ष 2022 के सितंबर माह में तत्कालीन एक्सईएन अभिषेक यादव के प्रयास से एक करोड़ 13 लाख रुपये के बजट से यमुना पुल की मरम्मत कराई गई थी। इस बजट से पुल के 30 ज्वाइंटर बदलने के साथ ही बेयरिंग में ग्रीश आदि कराई गई थी। अक्तूबर 2023 में इसका संचालन शुरू कराया गया, लेकिन पुल पर वाहनों का आवागमन शुरू होने के कुछ ही दिन के बाद कंपन की स्थिति उत्पन्न होने लगी।
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मामले में तत्कालीन एक्सईएन की रिपोर्ट पर तत्कालीन जिलाधिकारी नेहा प्रकाश ने पुल पर केवल 30 टन तक क्षमता वाले वाहनों को ही चलने की अनुमति दी, लेकिन यह आदेश भी ज्यादा दिनाें तक प्रभावी न रह सका। पुल की लोड क्षमता को लेकर सवाल खड़े होने पर लगभग एक माह बाद ही एंगल लगाकर सभी प्रकार के भारी वाहनों को पूर्णतया प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसमें विशेषज्ञ इंजीनियर से जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर वाहनों के संचालन का निर्णय अटक गया, जिसके चलते मौरंग, मिट्टी, गिट्टी के डंपर, ट्रकों के अलावा यात्री बसों को उरई की तरफ जाने के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के रास्ते आवागमन करना पड़ रहा है।
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इससे सीधा असर मौरंग, गिट्टी व मिट्टी की कीमतों पर पड़ रहा है। इसमें लगभग 1,500 से दो हजार रुपये की महंगाई देखने को मिली है। वहीं, यात्री किराये में उरई तक आने-जाने में 40 किमी. के चक्कर के साथ ही प्रति सवारी पर 92 के स्थान पर एक तरफ से 123 रुपये लग रहा है। इससे 31 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

जुलाई 2023 में बीएचयू से आई इंजीनियर की टीम ने पुल के खंभों की जांच की। इसके बाद टीम की ओर से रिपोर्ट तैयार की गई, लेकिन जांच टीम को तय की गई पांच लाख 14 हजार रुपये की फीस न दे पाने की वजह से वह रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को नहीं मिल सकी। तब से छह माह बीत चुके हैं और पीडब्ल्यूडी विभाग जांच टीम को दी जाने वाली फीस की धनराशि नहीं जुटा सका है।



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‘जांच टीम को फीस देने के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। जल्द से जल्द फीस की धनराशि की व्यवस्था होने की उम्मीद है।’-अमर सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी

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सूत्रों के मुताबिक जांच टीम की फीस जुटाने के लिए खनन विभाग से सहयोग लिए जाने के प्रयास भी किए गए हैं। अब देखना यह है कि यह प्रयास कितने कारगर साबित होते हैं। ऐसे में फिलहाल अभी भारी वाहनों का यमुना पुल से आवागमन शुरू हो पाना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।
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