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भागवत कथा की आरती, पापियों के पाप है तारती
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Mon, 08 Jun 2015 12:26 AM IST
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ब्लॉक भाग्यनगर के ग्राम चिरैयापुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भरत के चरित्र का वर्णन किया गया है, जिसमें भगवान राम के जाने पर भरत ने अयोध्या की गद्दी पर बैठने से मना कर दिया और एकांत में जाकर तप करने लगे।
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ग्राम चिरैयापुर में खचाखच भरे कथा पंडाल में संत पूज्य आचार्य स्वामी भगवतानद सरस्वती परमार्थ हरिद्वार के शिष्य एवं आनंद वृंदावन मथुरा के आचार्य पंडित सतीश अवस्थी सरस ने कहा कि साधक के जीवन में अनेक कष्ट होते हैं और साधक को भगवान पर भरोसा होता है।
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साधक और साधू को एक स्थान पर नहीं रहना चाहिए, इनका जीवन तो साधना के लिए समर्पित होता है। आचार्य ने कहा कि राजा दशरथ ने अपने जीवन में हर प्राणी को सुख दिया। मगर जब भगवान राम को 14 वर्ष के लिए वनवास दिया तो उनके जीवन में दुख उमड़ पड़ा।
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राम के वन जाने के बाद भरत को अयोध्या का राजा बनाने के लिए तैयारियां की जाने लगीं। भरत को जब पता चला कि हमारा राज्य तिलक होने जा रहा है तो उन्होंने गद्दी पर बैठने से मना कर दिया।
कहा कि भरत अपने साथ अयोध्या की जनता को लेकर वन में भगवान राम से मिले और वापस अयोध्या चलने के लिए निवेदन करने लगे। जब उन्होंने देखा प्रभु राम वापस नहीं जाएंगे तो उनके चरण पादुका लेकर वापस आ गए और उनको गद्दी पर रख दिया और राज्य छोड़कर एकांत में जाकर पूजा अर्चना करने लगे।
परीक्षित योगेंद्र नारायण दुवे दरोगा जीे व उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी दुवे ने भागवत प्रेमियों से कथा का रसपान करने की अपील की है। श्रीमद् भागवत कथा का पूर्ण विराम 10 जून होगा। 11 जून को गीता पाठ एवं हवन ंएवं विशाल भंडारा का कार्यक्रम होगा।
प्रात: नौ से दोपहर 12 बजे तक और शाम को तीन से छह बजे तक श्रोताओं कथा सुनाई जा रही है। कार्यक्रम आयोजक विवेक दुबे व नीनू दुबे ने क्षेत्रीय जनता से परिवार सहित कथा का रसपान करने की अपील की है।