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Auraiya News: बांग्लादेशी ने किया था गुमराह, आगरा में नहीं रहती कोई बेटी
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फोटो-20एयूआरपी36- पुलिस हिरासत में इस्लाम। स्रोत:पुलिस
औरैया। सहार क्षेत्र में पकड़े गए बांग्लादेशी इस्लाम ने पूछताछ में पुलिस को गुमराह किया था। आगरा में उसकी कोई बेटी नहीं रहती है। यह सच तब सामने आया जब सहार पुलिस जांच करने उसके बताए पते पर आगरा पहुंची। पुलिस के अनुसार जांच में पता चला कि बांग्लादेशी यहां एक कबाड़ दुकान में काम करता था। कबाड़ बीनने के दौरान कई लोग एक साथ रहते थे। वहां रहने वाली महिला को वह बेटी कहकर बुलाता था। उसने बेटी मानने वाली महिला को रुपये भी ट्रांसफर नहीं किए थे। ऐसे में बांग्लादेशी पुलिस के शक के घेरे में आ गया है। अब पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर दोबारा पूछताछ भी कर सकती है।
सहार के पुरवा रावत में गांव के लाेगों ने 17 सितंबर को एक कबाड़ दुकान में काम करने वाले बांग्लादेशी इस्लाम को पकड़कर पुलिस को दिया था। पूछताछ में इस्लाम ने सहार के गांव पटना स्थित जनसेवा केंद्र से आगरा में रहने वाली विवाहित बेटी को पांच हजार रुपये भेजने की बात स्वीकार की थी। इसकी जांच करने दो दिन पहले सहार थाना पुलिस आगरा पहुंची। जिस जगह बांग्लादेशी कबाड़ बीनता था, वहां उसके साथ यही काम करने वाले साथियों से बात की।
जांच में सामने आया कि उसने रुपये बेटी को नहीं बल्कि आगरा में जिस कबाड़ दुकान में काम करता था, उसके मालिक को भेजे थे। आगरा में रहने के दौरान चार माह पहले इस्लाम आगरा में बीमार हो गया था। उसका इलाज कबाड़ मालिक ने कराया था। करीब 10 हजार रुपये खर्च आया था। पांच हजार रुपये मालिक ने उसकी मजदूरी से काट लिए थे। इसके बाद इस्लाम सहार आ गया। यहां कुछ दिन काम करने के बाद उसे रुपये मिले, जिसे जनसेवा केंद्र से आगरा में मालिक को भेजा था।
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पुलिस के मुताबिक इस्लाम की पत्नी की काफी समय पहले मौत हो चुकी थी। उसके दो बेटे बांग्लादेश जनपद खुलना तहसील फुलथला के गांव दामोदर में रहते हैं। जांच में सामने आया कि इस्लाम एक वर्ष पहले नहीं, करीब चार से पांच साल पहले पश्चिम बंगाल के रास्ते अवैध रूप से देश में घुसा था। वहां पहले कोलकाता रुका। इसके बाद उसने दो साल राजस्थान में रहकर कबाड़ बीना। बाद में वह भरतपुर सीमा से आगरा पहुंच गया। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। पुलिस ने आइबी व अन्य एजेंसी को भी जांच के लिए डिटेल साझा की है।
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बांग्लादेशी पकड़े जाने के मामले में उसका पूरा नेटवर्क खंगाला जा रहा है। उच्च एजेंसियों को भी इसके पकड़े जाने संबंधित ब्योरा भेजा गया है।
- पी पुनीत मिश्रा, सीओ बिधूना
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सहार के पुरवा रावत में गांव के लाेगों ने 17 सितंबर को एक कबाड़ दुकान में काम करने वाले बांग्लादेशी इस्लाम को पकड़कर पुलिस को दिया था। पूछताछ में इस्लाम ने सहार के गांव पटना स्थित जनसेवा केंद्र से आगरा में रहने वाली विवाहित बेटी को पांच हजार रुपये भेजने की बात स्वीकार की थी। इसकी जांच करने दो दिन पहले सहार थाना पुलिस आगरा पहुंची। जिस जगह बांग्लादेशी कबाड़ बीनता था, वहां उसके साथ यही काम करने वाले साथियों से बात की।
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जांच में सामने आया कि उसने रुपये बेटी को नहीं बल्कि आगरा में जिस कबाड़ दुकान में काम करता था, उसके मालिक को भेजे थे। आगरा में रहने के दौरान चार माह पहले इस्लाम आगरा में बीमार हो गया था। उसका इलाज कबाड़ मालिक ने कराया था। करीब 10 हजार रुपये खर्च आया था। पांच हजार रुपये मालिक ने उसकी मजदूरी से काट लिए थे। इसके बाद इस्लाम सहार आ गया। यहां कुछ दिन काम करने के बाद उसे रुपये मिले, जिसे जनसेवा केंद्र से आगरा में मालिक को भेजा था।
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पुलिस के मुताबिक इस्लाम की पत्नी की काफी समय पहले मौत हो चुकी थी। उसके दो बेटे बांग्लादेश जनपद खुलना तहसील फुलथला के गांव दामोदर में रहते हैं। जांच में सामने आया कि इस्लाम एक वर्ष पहले नहीं, करीब चार से पांच साल पहले पश्चिम बंगाल के रास्ते अवैध रूप से देश में घुसा था। वहां पहले कोलकाता रुका। इसके बाद उसने दो साल राजस्थान में रहकर कबाड़ बीना। बाद में वह भरतपुर सीमा से आगरा पहुंच गया। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। पुलिस ने आइबी व अन्य एजेंसी को भी जांच के लिए डिटेल साझा की है।
बांग्लादेशी पकड़े जाने के मामले में उसका पूरा नेटवर्क खंगाला जा रहा है। उच्च एजेंसियों को भी इसके पकड़े जाने संबंधित ब्योरा भेजा गया है।
- पी पुनीत मिश्रा, सीओ बिधूना

फोटो-20एयूआरपी36- पुलिस हिरासत में इस्लाम। स्रोत:पुलिस