{"_id":"5d1cf8778ebc3e3cc71ef005","slug":"badhhl-auraiya-news-knp499495976","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़हल के पौधे की विलुप्त प्रजाति को बचाने को बीज बैंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़हल के पौधे की विलुप्त प्रजाति को बचाने को बीज बैंक
विज्ञापन
दिबियापुर (औरैया)। औषधीय गुणों से भरपूर बड़हल के विलुप्त हो रहे पौधों की प्रजाति बचाने का जिम्मा प्रभागीय वन अधिकारी सुंदरेशा ने उठाया है। उन्होंने इसके लिए दिबियापुर स्थित रेंज कार्यालय में पारंपरिक फल प्रजातियों के लिए बीज बैंक की स्थापना की है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है कि इस समय बड़हल के पौधों में लगने वाले फलों में निकलने वाले बीजों को सूखने से पहले या फिर फलों से निकलने के दो दिनों के अंदर वन विभाग के बीज बैंक में जमा करा दें। वन विभाग की नर्सरी में इसके पौधे तैयार कराए जा रहे हैं।
डीएफओ सुंदरेशा ने बताया कि बड़हल का फल औरैया जिले के पारंपरिक फलों में से एक है। बड़हल के पौधों की जिले में घटती संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने बताया कि जिले में बड़हल के पेड़ों की संख्या बमुश्किल सौ रह गई है। जबकि पहले गांव-गांव इसके पेड़ होते थे। इसके लिए दिबियापुर रेंज कार्यालय पर बीज बैंक की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि इस समय बड़हल के फल के पकने वाला मौसम है। इसका फल खाने के बाद बीज फेंके न बल्कि वन विभाग के बीज बैंक में जमा करा दें। वन विभाग की नर्सरी में वह अपनी देख रेख में इकट्ठा हुए बीजों से पौध तैयार कराएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि इस फल का बीज सूखने का बाद बेकार हो जाता है। इसलिए सूखने से पहले या फिर फल से निकलने के दो दिनों के अंदर इसे बो देना होगा। बताया कि इस पौधे में कभी किसी वर्ष तो फल ही नहीं होते। पर इस बार पौधों में फल आए हैं। बताया कि अभी तक लगभग दो किलोग्राम बीज इकट्ठा किया जा चुका है। मधुपुर स्थित वन विभाग की नर्सरी में लगे दो पौधों में लगे फलों के बीज इकट्ठा किए जा रहे हैं। वन विभाग की नर्सरी में लगभग डेढ़ सौ पौध भी तैयार कराई जा चुकी है। सुंदरेशा ने बताया कि बड़हल का फल जून अंत से लेकर 15 जुलाई तक पकता है। इसी समय बीज निकालकर वन विभाग के बीज बैंक में जमा कर सकते हैं। बताया कि वह अपने स्तर पर क्षेत्रीय पारंपरिक फलों कैथा एवं अंजीर पौधे की भी नर्सरी तैयार करा रहे हैं। इसके लिए भी लोगों से सहयोग की अपील की है
पूर्व वैज्ञानिकों के शोध में सामने आ चुका है कि बड़हल का पका फल पोषण से भरपूर होता है। विटामिन सी, कैरोटीन जैसे एंटी आक्सीडेंट का अच्छा श्रोत होने के साथ जिंक, कापर, मैगनीज और आयरन भी पाया जाता है, जो इसके एंटी आक्सीडेंट गुणों को बढ़ा देता है। इस गुण के कारण हृदय रोगों से बचाव और कैंसर से लड़ने में सहायक है। एंटी इन्फ्लेमेट्री, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वाइरल होने के साथ बड़हल के पके फल का सेवन लिवर के लिए टानिक का काम करता है। यह डायटिक फाइबर और पाली फिनोल्स का भी अच्छा श्रोत है। मोटापा, डायबिटीज, कैंसर, ह्रदय रोग होने की आशंकाओं का कम करता है। बड़हल के पेड़ के अन्य भागों में भी ऐसे तत्व प्राप्त होते हैं, जोएचआईवी, हरपीज सिप्लेक्स वाइरस, फीताकृमि, घाव, स्किन एजिंग जैसी समस्याओं से बचाने एवं निजात दिलाने की क्षमता रखते हैं। बड़हल के पके फल का सेवन लिवर के लिए टानिक का काम करता है।
विज्ञापन
इनसेट
वन विभाग की कुल 9 नर्सरी में तैयार हो रही पौधें
डीएफओ सुंदरेशा के अनुसार जिले में औरैया में 2, कंचौसी में 1, रठगांव में 1 खरगपुर बिधूना में 1, अजीतमल में 2, इटैली अछल्दा में 1, मन्योड़ा में 1 वन विभाग की नर्सरी में विभिन्न प्रकार की पौधें तैयार की जा रहीं हैं।
विज्ञापन
डीएफओ सुंदरेशा ने बताया कि बड़हल का फल औरैया जिले के पारंपरिक फलों में से एक है। बड़हल के पौधों की जिले में घटती संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने बताया कि जिले में बड़हल के पेड़ों की संख्या बमुश्किल सौ रह गई है। जबकि पहले गांव-गांव इसके पेड़ होते थे। इसके लिए दिबियापुर रेंज कार्यालय पर बीज बैंक की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि इस समय बड़हल के फल के पकने वाला मौसम है। इसका फल खाने के बाद बीज फेंके न बल्कि वन विभाग के बीज बैंक में जमा करा दें। वन विभाग की नर्सरी में वह अपनी देख रेख में इकट्ठा हुए बीजों से पौध तैयार कराएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि इस फल का बीज सूखने का बाद बेकार हो जाता है। इसलिए सूखने से पहले या फिर फल से निकलने के दो दिनों के अंदर इसे बो देना होगा। बताया कि इस पौधे में कभी किसी वर्ष तो फल ही नहीं होते। पर इस बार पौधों में फल आए हैं। बताया कि अभी तक लगभग दो किलोग्राम बीज इकट्ठा किया जा चुका है। मधुपुर स्थित वन विभाग की नर्सरी में लगे दो पौधों में लगे फलों के बीज इकट्ठा किए जा रहे हैं। वन विभाग की नर्सरी में लगभग डेढ़ सौ पौध भी तैयार कराई जा चुकी है। सुंदरेशा ने बताया कि बड़हल का फल जून अंत से लेकर 15 जुलाई तक पकता है। इसी समय बीज निकालकर वन विभाग के बीज बैंक में जमा कर सकते हैं। बताया कि वह अपने स्तर पर क्षेत्रीय पारंपरिक फलों कैथा एवं अंजीर पौधे की भी नर्सरी तैयार करा रहे हैं। इसके लिए भी लोगों से सहयोग की अपील की है
विज्ञापन
पूर्व वैज्ञानिकों के शोध में सामने आ चुका है कि बड़हल का पका फल पोषण से भरपूर होता है। विटामिन सी, कैरोटीन जैसे एंटी आक्सीडेंट का अच्छा श्रोत होने के साथ जिंक, कापर, मैगनीज और आयरन भी पाया जाता है, जो इसके एंटी आक्सीडेंट गुणों को बढ़ा देता है। इस गुण के कारण हृदय रोगों से बचाव और कैंसर से लड़ने में सहायक है। एंटी इन्फ्लेमेट्री, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वाइरल होने के साथ बड़हल के पके फल का सेवन लिवर के लिए टानिक का काम करता है। यह डायटिक फाइबर और पाली फिनोल्स का भी अच्छा श्रोत है। मोटापा, डायबिटीज, कैंसर, ह्रदय रोग होने की आशंकाओं का कम करता है। बड़हल के पेड़ के अन्य भागों में भी ऐसे तत्व प्राप्त होते हैं, जोएचआईवी, हरपीज सिप्लेक्स वाइरस, फीताकृमि, घाव, स्किन एजिंग जैसी समस्याओं से बचाने एवं निजात दिलाने की क्षमता रखते हैं। बड़हल के पके फल का सेवन लिवर के लिए टानिक का काम करता है।
विज्ञापन
इनसेट
वन विभाग की कुल 9 नर्सरी में तैयार हो रही पौधें
डीएफओ सुंदरेशा के अनुसार जिले में औरैया में 2, कंचौसी में 1, रठगांव में 1 खरगपुर बिधूना में 1, अजीतमल में 2, इटैली अछल्दा में 1, मन्योड़ा में 1 वन विभाग की नर्सरी में विभिन्न प्रकार की पौधें तैयार की जा रहीं हैं।