औरैया। विशेष सत्र अदालत एससी-एसटी एक्ट ने थाना फफूंद के एक मुकदमे में सुनवाई करते हुए अभियुक्त वीपी उर्फ वेदप्रकाश को आरोपों से बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और बयानों में भारी विरोधाभास के चलते यह फैसला सुनाया।
फफूंद थाना क्षेत्र के गांव भौनकपुर निवासी वादी ने आरोप लगाया था कि 30 जून 2016 की रात उनकी बेटी शौच के लिए गई थी, जिसे मूलचंद्र और वी.पी. उर्फ वेदप्रकाश समेत अन्य लोग जबरन बाइक पर बैठाकर ले गए। पुलिस ने विवेचना के बाद मुख्य आरोपी मूलचंद्र की मृत्यु और अन्य की संलिप्तता न मिलने पर अंतिम रिपोर्ट प्रेषित की थी। इसके बाद वादी द्वारा प्रस्तुत प्रोटेस्ट पिटीशन के आधार पर अदालत ने पांच दिसंबर 2017 को अभियुक्त वीपी उर्फ वेदप्रकाश को तलब किया था। विचारण के दौरान अदालत ने पाया कि पीड़िता और उसके पिता के बयानों में गंभीर अंतर्विरोध था। पीड़िता ने जहां न्यायालय में अभियुक्त पर ट्रेन से सूरत ले जाने और बलात्कार का आरोप लगाया, वहीं उसके पिता ने जिरह में स्वीकार किया कि घटना की अगली सुबह अभियुक्त वेदप्रकाश मृतक मूलचंद्र के घर पर ही मौजूद था। अदालत ने कहा कि एक ही समय पर व्यक्ति का ट्रेन में होना और स्थानीय स्तर पर मौजूद होना भौतिक रूप से असंभव है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अपने दावों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है, जिसके चलते अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।