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लखनऊ से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम न आने से बंद हुआ सोलर प्लांट
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बिधूना। सरकार की मंशा को विभागीय अधिकारी ही पलीता लगाने में जुटे हैं। यूपी नेडा की ओर से तीन करोड़ रुपये खर्च कर कुदरकोट में बना अत्याधुनिक मिनी ग्रिड सोलर पावर प्लांट महज एक केबल फुंकने और अफसरों की लापरवाही से कबाड़ हो गया। केबल बदलने के लिए तकनीकी टीम नहीं आई। हाल यह है कि ठप पड़े प्लांट में विद्युत उपकरण और बैटरियां खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं। गांव के लोग वर्षों से खामियां दूर कर इसे संचालित कराने की मांग करते चले आ रहे हैं।
यूपी नेडा ने वर्ष 2016-17 में एरवाकटरा ब्लाक के कुदरकोट में 175 किलो वाट (175000 वाट) क्षमता का मिनी ग्रिड पावर सोलर प्लांट स्थापित किया था। इस प्लांट से कुदरकोट के साथ इसके मजरे की 10 हजार की आबादी को बिजली मिलनी थी। गांव के डॉ. मोहर सिंह यादव, आशीष कुमार, दुष्यंत, राहुल गुप्ता ने बताया कि इस प्लांट का जब संचालन शुरू हुआ तो करीब 100 घरों में कनेक्शन कर रोशनी बिखेरने का काम किया गया। कुछ महीने तक सुचारु रूप से बिजली मिलती रही। केबल फुंका तो पूरे गांव तक बिजली आपूर्ति ठप हो गई और सरकार की मंशा पर पानी फिर गया। जिनके घरों के बाहर मीटर लगाए गए उन्हें आपूर्ति आज तक नहीं मिली।
पांच साल गुजर जाने के बाद प्लांट में लगे उपकरण खराब होने लगे हैं। इधर, प्लांट की देखरेख करने वाले विवेक यादव ने बताया कि यहां 365 बैटरियां लगी हैं। शुरुआत में लोड अधिक हो जाने के कारण केबल फुंकने लगा था। कई जगह पर फाल्ट हो गए। इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों ने लखनऊ के इंजीनियरों को दी। सोलर की कई प्लेटें भी टूट गईं हैं। खामियां दूर करने के लिए टीम को आना था, वर्षों गुजर गए आज तक कोई टीम आकर खामियां दूर नहीं कर सकी। यही कारण है कि प्लांट बंद पड़ा है, जो भी उपकरण लगे हैं वह भी खराब होने लगे हैं।
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बोले जिम्मेदार...
कुदरकोट सोलर प्लांट में बैटरियों व अन्य उपकरणों की वारंटी खत्म हो गई है। इसकी जानकारी मुख्यालय (लखनऊ) को दी जा चुकी है। शासन से ही एक कंपनी नामित कर फिलहाल इसे चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही नई तकनीकी के माध्यम से योजना का विस्तार कर चालू कराने की योजना है। विजय शंकर, जेई नेडा
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यूपी नेडा ने वर्ष 2016-17 में एरवाकटरा ब्लाक के कुदरकोट में 175 किलो वाट (175000 वाट) क्षमता का मिनी ग्रिड पावर सोलर प्लांट स्थापित किया था। इस प्लांट से कुदरकोट के साथ इसके मजरे की 10 हजार की आबादी को बिजली मिलनी थी। गांव के डॉ. मोहर सिंह यादव, आशीष कुमार, दुष्यंत, राहुल गुप्ता ने बताया कि इस प्लांट का जब संचालन शुरू हुआ तो करीब 100 घरों में कनेक्शन कर रोशनी बिखेरने का काम किया गया। कुछ महीने तक सुचारु रूप से बिजली मिलती रही। केबल फुंका तो पूरे गांव तक बिजली आपूर्ति ठप हो गई और सरकार की मंशा पर पानी फिर गया। जिनके घरों के बाहर मीटर लगाए गए उन्हें आपूर्ति आज तक नहीं मिली।
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पांच साल गुजर जाने के बाद प्लांट में लगे उपकरण खराब होने लगे हैं। इधर, प्लांट की देखरेख करने वाले विवेक यादव ने बताया कि यहां 365 बैटरियां लगी हैं। शुरुआत में लोड अधिक हो जाने के कारण केबल फुंकने लगा था। कई जगह पर फाल्ट हो गए। इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों ने लखनऊ के इंजीनियरों को दी। सोलर की कई प्लेटें भी टूट गईं हैं। खामियां दूर करने के लिए टीम को आना था, वर्षों गुजर गए आज तक कोई टीम आकर खामियां दूर नहीं कर सकी। यही कारण है कि प्लांट बंद पड़ा है, जो भी उपकरण लगे हैं वह भी खराब होने लगे हैं।
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कुदरकोट सोलर प्लांट में बैटरियों व अन्य उपकरणों की वारंटी खत्म हो गई है। इसकी जानकारी मुख्यालय (लखनऊ) को दी जा चुकी है। शासन से ही एक कंपनी नामित कर फिलहाल इसे चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही नई तकनीकी के माध्यम से योजना का विस्तार कर चालू कराने की योजना है। विजय शंकर, जेई नेडा