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Auraiya News: गर्मी में 25 दिन में फुंके 87 ट्रांसफार्मर
Sun, 26 Apr 2026 11:27 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:27 PM IST
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फोटो-1-वर्कशॉप में फुंके पड़े ट्रांसफार्मर।संवाद
बिधूना। क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।
अप्रैल में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के चलते एसी, कूलर, फ्रिज सहित अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इससे बिजली का लोड अचानक बढ़ने का सीधा असर ट्रांसफार्मरों पर पड़ा है और वे धड़ाधड़ फुंक रहे हैं। बिधूना वर्कशॉप के आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल से 25 अप्रैल तक 87 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं।
बताया गया है कि वर्कशॉप में प्रतिदिन तीन से चार ट्रांसफार्मर फुंके हुए पहुंच रहे हैं। इससे मरम्मत कार्य पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। बढ़ते विद्युत लोड के कारण फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं।
कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को निर्धारित समय की आधी बिजली भी नहीं मिल पा रही है। वहीं, जहां बिजली आपूर्ति हो रही है, वहां लो वोल्टेज की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
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वहां कुटीर उद्योग, सिंचाई और दैनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद उन्हें बदलने में एक से दो दिन का समय लग रहा है लेकिन कई स्थानों पर शिकायत के बावजूद कई दिनों तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
वर्तमान में वर्कशॉप में 10 से अधिक ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए खुले पड़े हैं, जो मटेरियल की कमी के चलते समय पर तैयार नहीं हो पा रहे हैं। वर्कशॉप के जेई अखिलेश कुमार ने बताया कि 25 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर सबसे अधिक खराब हो रहे हैं। इनका उपयोग ग्रामीण और निजी कार्यों में अधिक होता है। उन्होंने बताया कि विभाग शिकायत मिलने के बाद 24 घंटे के भीतर ट्रांसफार्मर ठीक करने का प्रयास करता है लेकिन पर्याप्त मटेरियल उपलब्ध न होने के कारण स्टॉक बनाए रखना संभव नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि मार्च और अप्रैल के दौरान पांच बड़े ट्रांसफार्मरों से तेल चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। इससे वे पूरी तरह डैमेज हो गए। वर्कशॉप में 10 केवीए से लेकर 400 केवीए तक के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की जाती है, लेकिन उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ही कार्य किया जा रहा है।
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अप्रैल में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के चलते एसी, कूलर, फ्रिज सहित अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इससे बिजली का लोड अचानक बढ़ने का सीधा असर ट्रांसफार्मरों पर पड़ा है और वे धड़ाधड़ फुंक रहे हैं। बिधूना वर्कशॉप के आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल से 25 अप्रैल तक 87 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं।
बताया गया है कि वर्कशॉप में प्रतिदिन तीन से चार ट्रांसफार्मर फुंके हुए पहुंच रहे हैं। इससे मरम्मत कार्य पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। बढ़ते विद्युत लोड के कारण फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं।
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कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को निर्धारित समय की आधी बिजली भी नहीं मिल पा रही है। वहीं, जहां बिजली आपूर्ति हो रही है, वहां लो वोल्टेज की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
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वहां कुटीर उद्योग, सिंचाई और दैनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद उन्हें बदलने में एक से दो दिन का समय लग रहा है लेकिन कई स्थानों पर शिकायत के बावजूद कई दिनों तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
वर्तमान में वर्कशॉप में 10 से अधिक ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए खुले पड़े हैं, जो मटेरियल की कमी के चलते समय पर तैयार नहीं हो पा रहे हैं। वर्कशॉप के जेई अखिलेश कुमार ने बताया कि 25 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर सबसे अधिक खराब हो रहे हैं। इनका उपयोग ग्रामीण और निजी कार्यों में अधिक होता है। उन्होंने बताया कि विभाग शिकायत मिलने के बाद 24 घंटे के भीतर ट्रांसफार्मर ठीक करने का प्रयास करता है लेकिन पर्याप्त मटेरियल उपलब्ध न होने के कारण स्टॉक बनाए रखना संभव नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि मार्च और अप्रैल के दौरान पांच बड़े ट्रांसफार्मरों से तेल चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। इससे वे पूरी तरह डैमेज हो गए। वर्कशॉप में 10 केवीए से लेकर 400 केवीए तक के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की जाती है, लेकिन उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ही कार्य किया जा रहा है।